'सिर्फ़ भारत में अकेली महिलाओं के लिए चुनौती नहीं'

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मैं एक ट्रैवलिंग आर्टिस्ट हूं. अपनी कविताएं लिखती हूं, कहानियां लिखती हूं. स्टेज़ पर उन्हें परफॉर्म करती हूं.

मैं सिंगापुर में रहती हूं, पूरी दुनिया में घूमती हूं. भारत की बात करूं तो दिल्ली से लेकर बैंगलुरु, जयपुर और मुंबई में शो कर चुकी हूं.

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हैदराबाद में भी मैं शो करने ही आई हूं. अभी हैदराबाद में ही हूं. यहां पहली बार आई हूं. अगले महीने चेन्नई जा रही हूं, फिर बर्लिन, पेरिस और एम्सर्टडम जाना है.

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एक अकेली महिला के रूप में ऐसे यात्रा करना काफ़ी चुनौती भरा होता है. मैं ये नहीं कहूंगी कि ये सिर्फ़ भारत में होता है.

इंडोनेशिया और थाइलैंड में भी मैंने चुनौतियों का सामना किया है.

लेकिन ये रूम न मिलने जैसी चुनौती नहीं थीं. मसलन, एक बार मुझे एक पुरुषों की डॉरमेटरी में सोना पड़ा. क्योंकि वे लोग एक गेस्ट के लिए छह लोगों वाली पूरी डॉरमेटरी नहीं खोलना चाहते थे.

हैदराबाद में कुछ ऐसा हुआ कि इस होटल में मेरे लिए रूम आयोजक ने बुक किया था. लेकिन होटल की पॉलिसी को चेक नहीं की. मैंने भी पॉलिसी चैक नहीं की. होटल की पॉलिसी में लिखा था कि स्थानीय और अविवाहित जोड़ों के प्रवेश पर मनाही है. इसके साथ ही अकेली महिलाओं के प्रवेश पर भी मनाही है.

जब मैं पहुंची तो उन्होंने मुझे इस बारे में बताया और मेरे काफी कहने पर भी वह नहीं माने. रात के 11 बज रहे थे. मैंने गो आईबीबो से बात की तो उन्होंने मुझे फुल रिफंड दिया.

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इसके बाद होटल स्टाफ़ ने कहा कि बात ख़त्म हो गई. इसके बाद मैं होटल के बाहर खड़ी हो गई. मुझे लोगों ने पहले बताया हुआ था कि ये जगह ख़तरनाक है.

मैं सड़क पर थी तो मैंने फोन निकाला और फ़ेसबुक पर पूरा मामला बयान किया.

इसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गईं. कई लोगों ने रिप्लाई किया और मुझे घर आने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि मेरे दोस्त का दोस्त वहां रहता है आप वहां चली जाइए.

फिर, मैंने अपने एक दोस्त के दोस्त घर पहुंची और पूरे टाइम यहीं रही. लेकिन इसी बीच फेसबुक पर मेरी पोस्ट वायरल हो गई और गो आईबीबो प्रभावित होने लगी. लोगों ने ट्वीट करना शुरू कर दिया.

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फ़िर गो आईबीबो ने मुझसे माफ़ी मांगते हुए मुझे दूसरे होटल में जगह दी.

(बीबीसी तमिल सर्विस की संवाददाता विष्णु प्रिया के साथ बातचीत पर आधारित)

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