जिन्हें ईद के दिन 'मनहूसियत दिखी'

Image caption खंडावली

सोलहंवी शताब्दी में भारतीय शासक शेर शाह सूरी ने जिस सड़क का निर्माण कराया था आज उसे ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम से जाता है.

ये सड़क जब बनी थी तब इसने देश के तमाम हिस्सों, धर्मों और संप्रदायों को एक दूसरे के ज़्यादा करीब लाने में खासी मदद की होगी.

सोमवार को मैं इसी सड़क से होकर हरियाणा के बल्लभगढ़ ज़िले के एक गाँव पहुंचा.

ईद के मौके पर जहाँ खुशियां बांटी जाती हैं, खंडावली नाम वाले इस गाँव के लोग 16 साल के एक बेटे को गंवाने के ग़म में हैं.

Image caption जुनैद का परिवार

जुनैद खान वो युवक थे और उनकी पडोसी अमीना ने कहा पचासों साल बाद 'ईद में ऐसी मनहूसियत दिखी है'.

उन्होंने कहा, "न तो हमने नए कपड़े पहने हैं, न ही खरीदारी हुई और और न ही रंग-बिरंगी बत्तियां सजाई गई हैं. अँधेरा है सब तरफ़ क्योंकि हमारे बच्चे को हमसे छीन लिया गया".

मामला 22 जून का है जब जुनैद खान दिल्ली से मथुरा जाने वाली एक ट्रेन में सवार हुए थे बल्लभगढ़ उतरने के लिए.

उन्हें इसी ट्रेन यात्रा के दौरान पीटे-पीट कर मार दिया गया था और उनके भाई हाशिम के मुताबिक़, "धक्का-मुक्की इतनी बढ़ गई कि कुछ दूसरे यात्रियों ने उनकी टोपियों पर फ़ब्तियाँ कसीं और आखिरकार दबोच कर छुरे से हमला किया".

खंडावली में इस बात को लेकर रोष भी है और अफ़सोस भी क्योंकि जुनैद ईद की ही खरीददारी करने आए थे और घर लौट रहे थे.

उनके भाई ताहिर ने बताया, "मैंने ही उसे पांच हज़ार रुपए इनाम में दिए थे क्योंकि वो कुरान पढ़ने में माहिर हो हाफ़िज़ बन गया था".

जुनैद के मोहल्ले में पहुँचने के बहुत पहले से ही ज़्यादातार दुकानों के शटर बंद दिखे और मस्जिद वीरान पड़ी हुई थी.

उनके पडोसी नफीस खान ने कहा, "किसी ने भी ईद नहीं मनाई है और ये कहने में कोई डर नहीं है कि अभी तक जुनैद के हत्यारों का पता भी नहीं लगाया जा सका है".

जहाँ पूरे इलाके में ईद के मौके पर सिर्फ सेवईयां, मूंग का हलवा, गोलगप्पे और चूड़ियों के ठेले सजा करते थे आज वहां न्यूज़ चैनलों की ओबी वैनें खड़ी दिखाई पड़ीं

गाँव के बच्चे-बूढ़े इस ईद पर छज्जों से झाँक कर सड़क की रौनक नहीं बल्कि पुलिस की गाड़ियों और पत्रकारों के कैमरों को निहार रहे थे.

हत्या के विरोध में गाँव में लोगों ने हाथों में काली पट्टियां बाँध रखी थी.

चार दिनों के बाद अपनी परचून की दुकान खोलने वाले जुनैद के चाचा असलम को 'इंसाफ का इंतज़ार है'.

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'तुम पाकिस्तानी मुल्ले बीफ़ खाते हो'

उन्होंने बताया, "हमें किसी से कोई शिकायत नहीं और सभी मिलजुल कर रहना चाहते हैं. लेकिन क्या वजह है कि अभी तक गुनहगार गिरफ्त में ही नहीं आ सके हैं".

ट्रेन में दिन-दहाड़े हुई इस हत्या में अभी एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है जिससे पूछताछ जारी है.

हरियाणा सरकार ने तफ़्तीश की टीमें बना डालीं हैं और हमलावरों के सुराग देने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी कर दी है.

लेकिन स्थानीय लोगों में इस बात का गुस्सा बढ़ता जा रहा है कि अब तक सरकार ने आकर पीड़ित परिवार की कोई सुध क्यों नहीं ली.

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