#PehlaPeriod: 'मेरी बहन पीरियड्स को अच्छे दिन कहती है'

इमेज कॉपीरइट AFP

माहवारी पर आधारित सिरीज़ #PehlaPeriod की तीसरी किस्त में अपने-अपने अनुभव बता रही हैं तीन लड़कियां- ऋतुपर्णा मुद्राराक्षस, मोनालिसा किस्कू और महिमा भारती.

#PehlaPeriod: 'जब पापा को बताया तो वो झेंप गए'

#PehlaPeriod: बेटे के हाथ, लड़कियों के 'डायपर'

ऋतुपर्णा मुद्राराक्षस

मम्मी काफ़ी हद तक पुराने ख़्यालों की थीं. पीरियड्स से जुड़ी किसी जानकारी के बारे में उन्होंने पहले कोई बात कभी नहीं बताई. उनके कपड़ों में लगे दागों के बारे में कभी उत्सुकतावश पूछा भी तो जबाब मिला कि तिलचट्टा काट गया था.

इमेज कॉपीरइट Rituparna
Image caption ऋतुपर्णा मुद्राराक्षस

नौंवी में पढ़ती थी. तेरह बरस की उम्र लेकिन पीरियड्स और उस बारे में पूरी तरह अंजान. बेहद खिलंदड़ी मैं एक शाम जब खेलकर वापस आई तो कपड़ों पर खून का दाग था. सोचा कूदते-फांदते कहीं चोट लग गयी है. डांट के डर से मम्मी को बिना बताए कपड़े बदले और गंदे हुए कपड़े बाथरूम में ही छिपा दिए.

अजीब तब लगा, जब अगले दिन मेरी बेहद स्ट्रिक्ट मां ने स्कूल से छुट्टी कराई. खैर, उन्होंने कुछ आधा-अधूरा सा बताया कि मैं 'बड़ी' हो गई हूं. कई सारी पाबंदियों की लिस्ट थमाई, जिनमें उन दिनों के दौरान खेलना, साइकिल चलाना, ठंडा-खट्टा ना खाना सरीखी मेरी पसंदीदा गतिविधियां शामिल थीं.

साथ ही, उस समय मिलने वाले केअर-फ्री को इस्तेमाल करने का तरीका भी समझाया. सच कहूं तो यह सब झमेला मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था.

मोनालिसा किस्कू

इमेज कॉपीरइट Monalisa
Image caption मोनालिसा किस्कू

'मेरी बहन पीरियड्स को 'अच्छे दिन' कहती है'

मैं 14 साल की थी, जब 9वीं क्लास में मेरा पहला पीरियड आया. मैं अपनी क्लास की आखिरी लड़की थी, जिसके इतनी देर से पीरियड्स शुरू हुए थे.

मेरी सहेलियों को पांचवीं और छठी क्लास में पहला पीरियड आया था. मैं उनकी तकलीफों और पीरियड्स के बारे में की जाने वाली बातों में आमतौर पर शामिल नहीं होती थी. मुझे नहीं मालूम होता था कि वो क्या ''अडल्ट बातें'' कर रही हैं.

पीरियड्स के दौरान ज़ाहिर है कि मुझे काफी तकलीफ होती थी. मां का शुक्रिया, जिन्होंने हर दम मुझे समझा और साथ दिया. शुरुआत के कुछ महीनों में मां मेरे लिए नैपकिन लाती थीं. लेकिन कुछ वक्त बाद मैंने खुद नैपकिन खरीदने शुरू कर दिए.

उस दौर में भी पीरियड्स आने पर कहती थी- आंटी आई है. मेरी बहन आज कल पीरियड्स को अच्छे दिन कहती है.

महिमा भारती

इमेज कॉपीरइट Mahima bharti
Image caption महिमा भारती

जब हम बड़े हो रहे थे तो मम्मी को मेनोपॉज़ शुरू हो चुका था. उनकी दिक्कत तो समझ नहीं आती थी लेकिन ये पता था कि वो तकलीफ में हैं.

घर में 5 साल बड़ी दीदी को भी पीरियड्स होने लगे थे. लेकिन हमको जानने की जिज्ञासा थी कि दीदी को वॉशरूम में हर बार इतना टाइम क्यों लगता है.

फिर मम्मी ने एक दिन आराम से बैठा के समझाया कि पीरियड्स क्या होते हैं और क्यों ज़रूरी होते हैं?

आठवीं क्लास में थे जब पहली बार पीरियड्स आए. दीवाली की छुट्टी थी तो घर में ही थे. थोड़ा अजीब सा डर लगा पहले लेकिन फिर मम्मी ने समझा के नॉर्मल कर दिया. सरकारी स्कूल में थे तो एनजीओ वाले सैनिटरी नैपकिन्स और बुकलेट्स देने आते थे. उसमें पीरियड से जुड़ी सारी जानकारी थी.

उसे पढ़ा, तो पीरियड्स से जुड़ा सारा ज्ञान मिल गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे