#NotInMyName: 'अरब क्रांति से बड़ा होगा ये आंदोलन'

बुधवार को भारत की राजधानी दिल्ली समेत भारत में कई जगह भीड़ के हाथों लोगों की हत्या (लिंचिंग) के बढ़ते मामलों के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

सूफ़ी-पॉप गायक रबी शेरगिल मंच पर बैठ 'बुल्ला की जाणा मैं कौन....." गा रहे थे, लेकिन थोड़ा धीमे और अफ़सोसनाक अंदाज़ में.

करीब डेढ़ हज़ार लोगों की भीड़ दिल्ली शहर की जान कहे जाने वाले जंतर-मंतर में टकटकी लगाए उन्हें सुन रही थी.

मौका किसी रॉक कॉन्सर्ट का नहीं था.

भीड़ के हाथों लोगों की हत्या होने के बढ़ते मामलों से नाराज़, सरकार से जल्द एक्शन लेने की मांग के साथ ये लोग यहां हाथों में काली पट्टी बाँध पहुंचे थे.

नज़रिया: हिंदुओं के 'सैन्यीकरण' की पहली आहट

पहलू, अख़लाक़ को मारने में भीड़ क्यों नहीं डरती?

गुहार

कोई गुरुग्राम यानी गुड़गांव से आया था, कोई नोएडा-गाज़ियाबाद से और कुछ फ़रीदाबाद से भी.

कुछ दिन पहले हरियाणा के एक मुस्लिम युवक, जुनैद ख़ान, की ट्रेन में हुई हत्या के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इसके ख़िलाफ़ गुहार लगाई.

नारा है #NotInMyName जो दिन भर ट्विटर पर टॉप ट्रेंड बना रहा.

नतीजन, न सिर्फ दिल्ली में, बल्कि मुंबई, कोलकाता समेत दर्जन भर भारतीय शहरों में लोगों ने शाम छह बजे इकठ्ठा हो कर अपना विरोध जताया.

महिलाओं की भागीदारी बराबरी की रही हर शहर में.

'पिता की मौत के बाद भी उन्हें देख नहीं सका'

'पुलिस न आती तो वो हमें ज़िंदा जलाने वाले थे..'

जंतर-मंतर पर आईं एक महिला मेहज़बीन को लगा कि 'लोगों ने इतनी तादाद में आकर उन्हें भी चौंका दिया है'.

'आवाज़ तेज़ होगी'

उन्होंने कहा, "आप बस देखते जाइए. ये सवा सौ करोड़ लोगों का भारत हैं और ये अरब क्रांति से भी बड़ा होने वाला है. यहाँ पांच-दस करोड़ लोग नहीं. धीरे-धीरे सभी इस तरह की हत्याओं के खिलाफ आवाज़ उठाने घरों से बाहर निकलेंगे".

बुधवार के इस विरोध की ख़ास बात ये भी थी कि सोशल मीडिया के ज़रिए इसकी अपील करने वालों ने साफ कह दिया था कि "राजनीतिक दलों और संस्थाओं से जुड़े लोग इसमें अपने बैनर वगैरह लेकर न आए और बतौर आम नागरिक पहुंचें".

राजस्थानः कथित गौरक्षकों के हमले में एक की मौत

जमा हुए प्रदर्शनकारियों में पत्रकार, प्रोफ़ेसर, डॉक्टर, बिज़नेसमैन समेत रिटायर्ड फौजी भी मौजूद थे.

लोगों में मोहम्मद अख़लाक़, पहलू खाँ, ज़ाहिद रसूल भट, अयूब पंडित और जुनैद जैसी हत्याओं पर ग़ुस्सा दिखा.

गुड़गांव के रहने वाले अरुणजोत सिंह ने कहा "ज़्यादातर मुसलमान मरे है और वो भी खान-पान से जुड़े शक के चलते."

उन्होंने बताया, "ये मेरा हिंदुस्तान नहीं है. वहां सभी मज़हबों की इज़्ज़त होती थी."

ज़्यादातर प्रदर्शनकारी केंद्र में आसीन भाजपा सरकार पर इस तरह के मामलों में 'चुप्पी या ढिलाई बरतने के' भी आरोप लगा रहे थे.

हालांकि ये याद दिलाए जाने पर कि पीएम नरेंद्र मोदी और सरकार के तमाम मंत्रालयों ने लिन्चिंग की घटनाओं पर देर से ही सही लेकिन खेद तो प्रकट किया है, यहाँ आए लोग नाराज़ हो जाते है.

लिंचिंग पर राजनीतिक दलों की निष्क्रियता का मतलब

अवार्ड लौटाने वाली शबनम ने कहा- मोदी मेरे प्रतिनिधि नहीं

इनमें से बहुत ने इस बात को भी स्वीकार किया कि "सरकार एक्शन में है लेकिन थोड़ा समय और लगेगा".

सुचित्रा नाम की एक महिला दोपहर तीन बजे से ही जंतर-मंतर पर आ कर बैंठ गईं. उन्होंने कहा, "अब तो तीन साल होने को आ गए. मोदी जी खुल कर गोरक्षकों के ख़िलाफ़ ऐक्शन क्यों नहीं लेते?"

'पहलू ख़ान की तरह है अयूब पंडित की हत्या'

'वो रहम की भीख माँगता रहा, लोग वीडियो बनाते रहे'

इस बीच बल्लभगढ़ के जिस युवक, जुनैद, की मौत हुई थी उसके परिवारजनों के लिए हरियाणा सरकार ने 10 लाख रुपए मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)