योगी आदित्यनाथ 'अपवित्र गूलर' के पेड़ छँटवाएँगे

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Image caption गूलर अंजीर प्रजाति का पेड़ है जो पूरे भारत में पाया जाता है.

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने काँवड़ यात्रा की तैयारी के तहत जो आदेश दिए हैं उनमें से एक "गूलर आदि अपवित्र समझे जाने वाले पेड़ों की छँटाई" भी है.

यूपी सरकार ने ये नहीं बताया है कि गूलर को किस आधार पर अपवित्र कहा जा रहा है, हालाँकि गूलर को देववृक्ष मानने वाले लोग भी बड़ी तादाद में हैं जो इसे पूजनीय मानते हैं.

गूलर भारत में पाया जाने वाला एक आम पेड़ है जिसका बोटैनिकल नाम फिकस रासेमोसा है. ये फिग यानी अंजीर प्रजाति का पेड़ है जिसे अंगरेज़ी में कलस्टर फ़िग भी कहते हैं.

गूलर के फूल नहीं होते

गूलर के बारे में एक बात मशहूर है कि इसके फूल नहीं होते, असल में गूलर के फल टहनियों पर गांठ की तरह लगते हैं.

क़िस्से कहानियों में अक्सर सुनने को मिलता है कि जो गूलर के फूल देख लेता है, वह बहुत अमीर हो जाता है. आयुर्वेद में गूलर का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर होता है.

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Image caption उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर दी गई सूचना का एक अंश

इसकी छाल सूजन दूर करने में मददगार होती है जबकि इसकी पत्तियों से ज़हर का असर दूर किया जा सकता है, यूट्यूब पर मौजूद एक वीडियो में पंतजलि के कर्ताधर्ता आचार्य बालकृष्ण इसके कई गुण बताते नज़र आते हैं.

गूलर के बारे में ये धारणा भी है कि वह स्त्रियों और पुरुषों दोनों के कई तरह के गुप्त रोगों के इलाज में काम आता है. गूलर को कुडुम्बर, उदुम्बर और हुमुर भी कहते हैं, वेबसाइटें बता रही हैं कि देश के कई हिस्सों में टोने-टोटके में गूलर का इस्तेमाल किया जाता है.

गूलर की जड़ की ताबीज़ पहनने से अपार धन की प्राप्ति होने का दावा भी कई जगह दिखाई देता है. गूलर के पेड़ की छत्तीसगढ़ में ख़ास इज्ज़त है, वहाँ इसे आम बोलचाल में डूमर कहा जाता है.

गूलर के उपयोग

राज्य के कई इलाक़ों में कई समुदायों में गूलर के पेड़ को गवाह मानकर शादी करने की परंपरा है, वहाँ पुराने ज़माने में तो गूलर के पेड़ के नीचे ही शादियाँ कराई जाती थीं.

गूलर का फल हल्का मीठा होता है और इसे देश के कई हिस्सों में चाव से खाया जाता है, इसके कच्चे फल की सब्ज़ी भी आम है.

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अब गूलर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की बात, गोवर्धन पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अधोक्षजानंद कहते हैं, "शास्त्रों का मत ये है कि गूलर का पेड़ शिवजी के लिए अपवित्र नहीं है बल्कि गूलर के पेड़ के बग़ैर शिवजी की पूजा संपन्न नहीं होती है."

स्वामी अधोक्षानंद कहते हैं, "शिवजी के लिए किए जाने वाले यज्ञ में नवग्रह समिधा लगती है जिसमें गूलर के पेड़ की लकड़ी अति आवश्यक होती है."

देव वृक्ष है गूलर

स्वामी कहते हैं, "ऐसे कई पेड़ हैं जिन्हें पूजा से दूर रखा जाता है लेकिन गूलर का पेड़ अवित्र नहीं माना जाता है बल्कि गूलर देव वृक्ष है".

इसी तरह हिंदू धर्म के प्रसार में जुटी सनातन संस्था ने अपनी साइट पर एक तस्वीर छापी है, जिसमें गूलर के पौधे दिख रहे हैं, साइट का कहना है कि हिंदू धर्म में जिन कुछ वृक्षों को देववृक्ष कहा गया है उनमें गूलर भी है.

यूपी सरकार जिस गूलर के अपवित्र होने की बात कह रही है, सनातन संस्था की साइट पर लिखा है, "यज्ञ कुंड के परिसर में गूलर के 56 पौधे अपने-आप उग आए हैं, इससे सिद्ध होता है कि मंत्रपाठ के कारण वातावरण सात्विक बनता है."

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सनातन संस्था की साइट पर लिखा है, "अनेक प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है कि इस वृक्ष में त्रिमूर्ति का वास है, इस वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, मध्य भाग में विष्णु और अग्र भाग में शिव का अस्तित्व होता है, इसलिए इस वृक्ष की पूजा करने हेतु कहा गया है."

सनातन संस्था का कहना है कि वृक्ष के अग्र भाग यानी टहनियों में शिव का निवास होता है जबकि योगी जी उसे कटवाने का निर्देश दे रहे हैं, किसकी बात को सही माना जाए?

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