व्हाट्सऐप पर बिक रहा था जामा मस्ज़िद से चोरी हुआ बच्चा

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'मेरा कलेजा मुंह को आ गया लेकिन खुदा के घर में थी तो हिम्मत बांधे रखी. उस दिन जामा मस्ज़िद में चार बच्चे खोए थे. तीन तो मिल गए लेकिन मेरा बेटा नहीं मिला. मिलता कैसे, वो तो चोरी हो गया था.' ये कहना है दिल्ली के करावल नगर में रहने वाली अफ़रोज़ का.

अफ़रोज़ के मुताबिक, बीते 5 जून को उनका ढाई साल का बेटा आहिल दिल्ली के जामा मस्ज़िद से चोरी हो गया था.

जब मां से जुदा हो गया आहिल

अफ़रोज़ आज भी 5 जून के उस दिन को याद करके रोने लगती हैं, बार-बार अल्लाह को शुक्रिया कहती हैं और उनके बेटे को ढूंढ़ लाने वाले पुलिस वालों को लाखों दुआएं देती हैं.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

अफ़रोज़ कहती हैं कि उस दिन वह अपने पति आरिफ़ और परिवार के साथ जामा मस्ज़िद गई थीं, इफ़्तार के बाद जब मर्द नमाज़ पढ़ने चले गए, वो अपने दो बच्चों को उनकी ख़ाला के पास छोड़कर हाथ-मुंह धोने के लिए चली गईं और जब वह लौटकर आईं तो उनकी बहन ने बताया, आहिल ग़ायब है.

वे कहती हैं, "उन्होंने मस्ज़िद परिसर में ऐलान भी कराया लेकिन बच्चा खोया नहीं था, चोरी हुआ था. कोई उसे उठा ले गया था. फिर मिलता कहां से?"

बच्चे के पिता आरिफ़ कहते हैं, "हमनें बच्चा गुम होने के तुरंत बाद जामा मस्ज़िद थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई."

इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप पर मिला सुराग

दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर बयान जारी किया है.

सेंट्रल दिल्ली क्षेत्र के डीसीपी मंदीप सिंह रंधावा के अनुसार, "एफ़आईआर दर्ज होने के बाद, व्हाट्सऐप ग्रुप्स और तमाम अन्य जगहों पर बच्चे की तस्वीर जारी कर दी गई, कुछ दिनों बाद पुलिस को बच्चे के व्हाट्सऐप पर ढाई लाख रुपये में बेचे जाने की जानकारी मिली."

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डीसीपी रंधावा ने बताया, "पुलिस ने वो नंबर ट्रेस किया लेकिन 5 लोगों के इस 'बच्चा चोर गिरोह' को शक़ हो गया था. जिसके बाद उन्होंने खुद ही मादीपुर में बच्चे को एक जगह छोड़ दिया और ख़ुद पीसीआर को फोन करके बुलाया. 28 जून को आहिल अपने घर पहुंच गया."

पुलिस के बयान के मुताबिक, बाल कल्याण समिति ने बच्चे को मादीपुर से बचाया.

पुलिस ने बताया है कि इस मामले में शामिल तीन महिलाओं और एक पुरुष को जहांगीरपुरी इलाके से गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि एक शख़्स अभी भी फ़रार है.

घर वापस लौटा आहिल

अफ़रोज़ कहती हैं कि पूरे 24 दिन बाद आहिल घर आने के बाद उनके पास आने से कतराता है और सिर्फ़ उनके ही नहीं वो किसी भी औरत के पास नहीं जाना चाहता.

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Image caption आहिल की तस्वीर

अफ़रोज़ ने कहा, "जब पुलिस वाले उनका बच्चा लेकर आए तो उनके बच्चे ने उन्हें पहचाना ही नहीं हालांकि वो अपने पिता को तुरंत पहचान गया लेकिन एक मां के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि उसका बच्चा उसे पहचानने से इनकार कर दे."

वे कहती हैं, "ढाई साल का आहिल 24 दिनों तक अपने परिवार से दूर रहा. इस दौरान उसे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में बेचने की कोशिश की गई."

अफरोज़ ने बीबीसी से पांच मिनट की बातचीत में तीन बार एक बात दोहराई..."कोई किसी का बच्चा कैसे चुरा सकता है. उसकी अपनी औलाद चोरी हो जाए तो..."

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