#PehlaPeriod: दादी ने कहा, मां को कौआ छू गया है

माहवारी पर आधारित सिरीज़ #PehlaPeriod की छठी किस्त में आज पढ़िए ऋचा साकल्ले, पूजा दास, शिवानी पांडेय और जागृति पांडेय के अनुभव.

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Image caption ऋचा साकल्ले

ऋचा साकल्ले

मुझे कभी समझ नहीं आता था कि मेरी मां को हर महीने क्या हो जाता है? वो क्यों हमसे कट जाती है. क्यों उन चार दिनों में वो सिर्फ बर्तन धोती है? क्यों उनके धोए बर्तनों पर दादी गंगाजल छिड़कती है?

मां से पूछती तो वो टाल देती. हिम्मत करके दादी से पूछा तो उन्होंने बताया कि तुम्हारी मां को कौआ छू गया है.

फिर एक दिन हमारी 12 साल की केयर टेकर को भी कौआ छू गया. दादी उस पर चीख रही थी कि घर की चीजों को हाथ क्यों लगाया.

पर वो बेचारी चुपचाप रोते हुए अपनी अंडरवियर धो रही थी, कुछ ही दिनों बाद वो काम छोड़कर चली गई.

मुझे हमेशा इस बात का डर रहता था कि कौआ किसी दिन मुझे भी छूकर न चला जाए. कई बार ये भी सोचती थी कि अगर दादी को नहीं छूता है तो हो सकता है कि मुझे भी न छूए.

एक दिन स्कूल के टॉयलेट में पैंटी में कुछ लाल दिखा. उस समय तो कुछ नहीं किया. जल्दी-जल्दी घर आयी और मां को बताया. वो किचन में गईं और लाकर शक्कर खिला दी.

इसके बाद मां ने मुझे माहवारी के बारे में सबकुछ समझाया.

कौए को लेकर मेरा डर जा चुका था. मैंने और मम्मी ने डील की थी कि दादी को इस बारे में नहीं बताएंगे और वाकई दादी को इस बारे में कभी पता नहीं चला.

पूजा दास

पीरियड के बारे में न तो किसी ने घर में बताया था और न ही किसी बाहरी ने.

उस समय मैं 13 साल की थी. दादी के घर गई हुई थी और एक दिन खून से कपड़े लाल हो गए. मुझे लगा ब्लड कैंसर है और परेशान हो गई.

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Image caption पूजा दास

मम्मी को बताया तो उन्होंने घर के पुराने कपड़ों से तैयार पैड दिया.

पहला पीरियड जब बीता तो लगा कि चलो मुसीबत टली, लेकिन बाद में मालूम हुआ कि ये तो सिर्फ़ शुरुआत है.

शिवानी पांडेय

उस वक्त सातवीं क्लास मे थी. गांव में थी तो मां ने पैड की जगह कपड़ा यूज़ करने को दिया.

पहला पीरियड था तो ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हुई. बार-बार कपड़ा गंदा हो रहा था. उस दिन से मां ने दादी के साथ सोने पर पाबंदी लगा दी.

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Image caption शिवानी पांडेय

सोने से पहले बिस्तर पर पुरानी चादरें बिछा दिया करती थीं ताकि अच्छी वाली चादर खराब न हो.

फिर भी खून के धब्बे पड़ ही जाते थे. छुआछूत क्या होता है और जिसके साथ होता है, उसे कैसा लगता है, इसका एहसास मुझे पहली बार हुआ.

मुझे समझ नहीं आया कि पीरियड की वजह से दादी का प्यार, मेरे लिए कैसे कम हो गया.

जागृति पांडेय

मेरा पीरियड 13वें साल में आया था. उस समय सर्दियों की छुट्टियां चल रही थीं.

मुझे पीरियड के बारे में सबकुछ पहले से ही पता था, क्योंकि मेरे स्कूल में कई वर्कशॉप हुआ करती थीं.

बावजूद इसके जब मुझे पहली बार ब्लीडिंग हुई तो मैं रोने लगी. वहीं मेरी मां मुझे बार-बार समझाने की कोशिश कर रही थीं.

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Image caption जागृति पांडेय

मैं बार-बार यही कह रही थी कि भगवान ने मेरे साथ बेईमानी की है.

भाई को क्यों नहीं होता ये सब? लेकिन आज जब मैं ये पुरानी बातें याद करती हूं तो अपनी नासमझी पर खूब हंसी आती है.

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