कट्टरपंथी ताकतों से भारत को ख़तरा: सोनिया गांधी

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यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि भारत की समावेशी संकल्पना पर हमले हो रहे हैं और घरेलू कुप्रशासन की वजह से देश के सामने गंभीर चुनौती पैदा हो गई है.

सोनिया गांधी ने कहा कि प्रेस पर सवाल करने की बजाए "आदेश मानने और सराहना करने के लिए दबाव डाला जा रहा है." उन्होंने कहा कि सच बोलना वर्तमान युग में अनिवार्य हो गया है.

सोनिया गांधी आज़ादी के 70 साल पूरे होने पर 'नेशनल हेरल्ड' अख़बार का स्मारक संस्करण जारी करने के लिए आयोजित समारोह में बोल रही थीं.

उन्होंने कहा, "नेशनल हेरल्ड उस समय की याद दिलाता है जब राष्ट्रवाद विदेशी शासन के ख़िलाफ़ लड़ा था, लेकिन आज घरेलू कुप्रशासन देश के लिए बड़ा ख़तरा बन गया है."

"ऐसे समय में जब समावेशी संकल्पना पर हमले हो रहे हों और प्रेस पर सवाल पूछने की बजाए आदेश मानने और सराहना करने के लिए दबाव बनाया जा रहा हो, सत्ता के सामने सच बोलना हमारे युग की ज़रूरत है."

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सोनिया ने कहा, "जब त्याग और संघर्ष की पीड़ा सहकर इतिहास बनयाा जा रहा था, उस समय अलग खड़े रहे लोग, जिनकी हमारे देश के संविधान में बहुत कम निष्ठा है, वो लोग आज ऐसा भारत बनाना चाहते हैं जो 15 अगस्त को आज़ाद हुए भारत से बिलकुल भिन्न हो."

सोनिया ने कहा, "हमें भूलना नहीं चाहिए कि इन लोगों ने भारत के निर्माण के लिए कोई बलिदान नहीं दिया. भले ही उनकी भाषा आधुनिक है, लेकिन वो अपने संकीर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को पीछे ले जाना चाहते हैं, उनकी आधुनिक जुमलेबाज़ी में पुरातनपंथी विचार छुपे हैं जो आधुनिक विचार और दृष्टिकोण के बिलकुल विपरीत हैं. इस पाखंड को बेनकाब करना और सच्चाई को सामने लाना हमारा फ़र्ज़ है. "

उन्होंने कहा, "आज कट्टरपंथी ताक़तों ने भारत के आज़माए गए और सफल मूल्यों पर सवालिया निशान लगा दिया है. बढ़ती हुई असहिष्णुता के बीच द्वेषपूर्ण ताकतें लोगों को बता रही हैं कि क्या नहीं खाना चाहिए, किससे प्यार नहीं करना चाहिए और क्या विचार नहीं रखने चाहिए. चौकसी के नाम पर उपद्रव करने वाली संस्कृति इसे प्रोत्साहित कर रही है. क़ानून को लागू करने वाले लोग इन्हें सक्रिय साथ दे रहे हैं. इस तरह के उदाहरण लगभग हर दिन हमारी आत्मा को आहत कर रहे हैं."

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इसी समारोह को भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी संबोधित किया.

राष्ट्रपति ने देश में भीड़ के हाथों हो रही हत्याओं पर चिंता ज़ाहिर की.

राष्ट्रपति ने कहा, "जब भीड़ का उन्माद बहुत ज़्यादा और अतार्किक, अनियंत्रित हो जाए तब हमें रूककर सोचना चाहिए कि क्या हम अपने देश के मूलभूत मूल्यों को बचाने के लिए पर्याप्त रूप से सजग हैं?"

राष्ट्रपति ने कहा, "जब हम अख़बार में पढ़ें या टीवी पर देखें कि किसी व्यक्ति को किसी क़ानून के कथित उल्लंघन या इसके बिना ही भीड़ के हाथों मारा जा रहा है तो हमें ठहरकर सोचना चाहिए."

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हाल के महीनों में कथित गोरक्षकों के हमले बढ़े हैं. एक 16 वर्षीय मुस्लिम युवक की ट्रेन में हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऐसी घटनाओं पर खेद जताते हुए कहा है कि गाय के नाम पर लोगों की हत्या अस्वीकार्य है.

इन हमलों के ख़िलाफ़ देश भर में #NotInMyName के नाम से प्रदर्शन भी हुए थे. यही नहीं अल्पसंख्यक मुसलमानों ने भी ईद का त्यौहार काली पट्टी बांधकर मनाया था.

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