'नीतीश-लालू गठबंधन में अपने-अपने हित साध रहे'

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जब से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन दिया है तब से राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड गठबंधन में दरार की अटकलें थम नहीं रहीं.

राजद नेता लालू यादव के समझाने के बावजूद जदयू राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हुई.

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इसके अलावा राजद-जदयू गठबंधन में तनाव की ख़बरों को तब हवा मिली जब पिछले साल मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी की नीतीश कुमार ने तारीफ़ की. नीतीश कुमार की शराबबंदी की नीति की प्रधानमंत्री मोदी भी तारीफ़ कर चुके हैं.

इसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को समर्थन और फिर जीएसटी लॉंचिंग के दौरान पार्टी के सदस्यों की मौजूदगी ने इन अटकलों को हवा दी.

नीतीश-लालू गठबंधन को लेकर लग रहे कयास पर कभी नीतीश कुमार की जगह बिहार के मुख्यमंत्री रहे महादलित नेता जीतन राम मांझी का मानना है कि नीतीश और लालू अपना अपना हित साधने में लगे हैं और दबाव की राजनीति कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता वास्तल्य राय से बातचीत में हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने राजद-जदयू गठबंधन और बीजेपी की राजनीति पर चर्चा की. पढ़ें क्या कहा जीतन राम मांझी ने.

'सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को चली'

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नीतीश कुमार ने कांग्रेस को महागठबंधन की कमज़ोर कड़ी बताया था. हाल ही में वो कांग्रेस की आलोचना कर चुके हैं.

मांझी कहते हैं कि नीतीश कुमार की स्थिति ऐसी है कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली. जिस कांग्रेस के खिलाफ़ आंदोलन हुआ और ये लोग जिसकी उपज हैं, उसी कांग्रेस की गोद में दोनों भाई बैठ गए और आज वो कहते हैं कि कांग्रेस से दूरी बनाएंगे.

अगर ये किसी के पिछलग्गू नहीं हैं तो अब उनका स्वार्थ या विकल्प दिख रहा है, इसीलिए कांग्रेस से दूरी बना रहे हैं.

नीतीश कुमार एकदम भरोसेमंद नहीं हैं, राजनीति में उन पर कोई भरोसा करेगा तो पछताएगा. बीजेपी के साथ रहकर उन्होंने क़द बढ़ाया और एकाएक बीजेपी को धोखा दिया.

अब नरेंद्र मोदी के हर कदम को समर्थन देने और राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के पीछे की वजह यही है कि वो राजद को दिखाना चाहते हैं कि लालू यादव के दबाव में नहीं रहना चाहते. नीतीश बिहार के गठबंधन में लालू यादव पर दबाव की राजनीति कर रहे हैं. बीजेपी और एनडीए के साथ नज़दीकी दिखाने से राष्ट्रीय जनता दल के लोग थोड़ा सा सहमेंगे.''

बीजेपी डोरे डाल रही?

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बिहार बीजेपी के नेता सुशील कुमार मोदी लगातार लालू प्रसाद यादव के परिवार पर आरोप लगाते रहे हैं और कह चुके हैं नीतीश कुमार अगर गठबंधन से बाहर आते हैं तो उनकी सरकार ख़तरे में नहीं आएगी.

ये राजनीतिक तकाज़ा है कि अटूट गठबंधन को तोड़ने के लिए किसी एक से सहानुभूति दिखाई जाए.

बिहार प्रदेश बीजेपी के नेता ही इस तरह के बयान दे रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसा नहीं कर रहा है.

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मेरा मानना है कि नीतीश-लालू की पार्टियों का गठबंधन नहीं टूटेगा क्योंकि दोनों ही अपने अपने राजनीतिक एजेंडे में सफल हो रहे हैं. लालू प्रसाद यादव का एजेंडा था अपने बेटे को उप मुख्यमंत्री बनाना और राजनीति में स्थापित करना, अपनी बेटी को राज्यसभा सांसद बनाना, इसलिए वो इस गठबंधन को बरक़रार रखना चाहेंगे.''

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नीतीश कुमार की बात करें तो वो इस गठबंधन सरकार के ज़रिए ब्रैंडिंग कर रहे हैं, जैसे प्रकाश पर्व मनाना, महात्मा गांधी सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने के मौके पर समारोह हो या फिर शराब बंदी हो, ये उसकी ब्रैंडिंग का ज़रिया है, इससे ग़रीबों को कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है. नीतीश के ये सारे क़दम सिर्फ़ इसलिए हैं ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बन जाए और फिर प्रधानमंत्री पद के लिए वो दावेदारी पेश कर सकें.

'नहीं टूटेगा गठबंधन'

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बिहार में जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय दनता दल के गठबंधन में लालू यादव और नीतीश दोनों ही अपने-अपने हित साधने में लगे हैं, इसलिए इसके टूटने की संभावना कम है.

प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षाओं की बात कई बार होती रही है. हालांकि नीतीश कुमार ने कहा कि वो 2019 में प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं.

राजनीति में नेता जो कहते हैं वो कभी होता है क्या? कबीर दास कह चुके हैं कि 'कबीर दास की उल्टी बानी, बरसे कंबल, भींजे पानी'. यहां भी ऐसा ही है, वो निगेटिव बोलते हैं उसका मतलब पॉज़िटिव होता है.''

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