भारतीय यहूदी चाहते हैं इसराइली संसद में प्रतिनिधित्व

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भारत में बसा यहूदी समुदाय चाहता है कि उनके प्रतिनिधियों को इसराइल की संसद में जगह मिलनी चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल दौरे को लेकर भारतीय यहूदी समाज उत्साहित है और उसे लगता है कि लंबे समय से अधर में लटक रहे उनके मुद्दों को भी इससे फायदा पहुंचेगा.

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खास कर मुंबई में बसने वाले यहूदी प्रधानमंत्री से काफ़ी उम्मीदें रख रहे हैं, क्योंकि मुंबई की सामाजिक पृष्ठभूमि में यहूदियों का योगदान उल्लेखनीय है.

मुंबई के नरीमन हाउस पर 26/11 के चरमपंथी हमलों में निशाना बने यहूदी भारत और इसराइल के राजनैतिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानते हैं.

मोदी की इसराइल यात्रा पर बीबीसी ने मुंबई में रहने वाले यहूदी समुदाय के कुछ लोगों से बात की.

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'आतंक से डर'

प्रतिष्ठित एडवोकेट और भारतीय यहूदी महासंघ, मुंबई के चेयरमैन जोनाथन सोलोमन कहते हैं, "हम प्रधानमंत्री के इसराइल दौरे की ख़बर से ख़ुश हैं क्योंकि इससे भारत में यहूदियों की स्वीकार्यता को ठोस समर्थन मिल रहा है. भारत में यहूदी धर्म का पालन करने वालों का आंकड़ा कम हुआ है. यहां कुल 5 हज़ार यहूदी हैं, लेकिन इसराइल में भारतीय मूल के यहूदियों का आंकड़ा 50-60 हज़ार है."

उन्होंने कहा, "भारत में यहूदियों को कोई डर नहीं है. लेकिन देश के बाहर पैदा होने वाले आतंक से हमें डर है."

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प्रतिनिधित्व

द अमेरिकन ज्युइश ज्वॉंइन्ट डिस्ट्रीब्यूशन कमेटी के कार्यकारी निदेशक जैकब कहते हैं, "भारत को स्वतंत्रता मिलने के एक साल बाद इसराइल स्वतंत्र हुआ और तब कई भारतीय यहूदी अपने देश चले गए. वहां भारतीय यहूदियों का आंकडा 80 हज़ार तक है."

उनके अनुसार, "भारत और इसराइल के बीच सुरक्षा, खेती, पानी जैसे कई मुद्दों पर एक साथ मिल कर काम हो रहा है. लेकिन, मैं चाहता हूं कि भारतीय यहूदियों के प्रतिनिधि को इसराइली संसद में स्थान मिलना चाहिए. इथोपियन और रूसी यहूदी जो इसराइल बहुत बाद में पहुंचे थे अगर उनके प्रतिनिधि वहां संसद में हो सकते हैं तो भारतीय यहूदियों को भी ये अधिकार मिलना चाहिए."

उनका कहना था, "वहां के भारतीय यहूदियों के एक होकर इसराइली संसद में अपने प्रतिनिधित्व की मांग रखने के लिए प्रधानमंत्री के दौरे के मंच का सही उपयोग करना चाहिए."

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Image caption सोलोमन सोफ़र

'भेदभाव नहीं'

'सर जैकब ससून एंड एलायड ट्रस्ट' के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी सोलोमन सोफ़र चाहते हैं कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच दिल का रिश्ता क़ायम होना चाहिए.

उन्होंने कहा, "भारत बड़े स्तर पर इसराइल से हथियार ख़रीदता है. वहां की सरकार के साथ मिलकर भारत में कृषि संबंधी तकनीकों पर भी अच्छा काम हुआ है. दूसरे राष्ट्रों की तरह भारत, इसराइल की उपेक्षा नहीं करता. भारत में यहूदियों के साथ कोई भेदभाव नहीं है."

वो कहते हैं, "नब्बे के दशक से भारत और इसराइल के रिश्ते बेहतर हुए. इतने सालों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने ये कदम नहीं उठाया, मोदी का इसराइल जाना बहुत बड़ी बात है. हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच दिल का रिश्ता बने."

मुंबई के इतिहास में यहूदियों का बड़ा योगदान रहा है.

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बग़दाद के पाशा के मुख्य खजांची डेविड ससून, दाउद पाशा के अत्याचार के चलते 1832 में मुंबई आ गए.

मुंबई में ससून डॉक्स, ससून लायब्रेरी, सिनेगॉग्ज़, स्कूल और विक्टोरिया एंड अलबर्ट म्यूज़ियम ससून परिवार की ही देन है.

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