पश्चिमी सभ्यता का भविष्य दांव पर: डोनल्ड ट्रंप

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Image caption गुरुवार को पोलैंड दौरे पर आए ट्रंप का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति एंडर्ज़ेज ड्यूडा

पोलैंड की राजधानी वॉरसा में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने प्रमुख भाषण में कहा है कि पश्चिमी सभ्यता का भविष्य ख़तरे में है.

ट्रंप ने पोलैंड को एक ऐसा देश बताया है जो पश्चिम की आज़ादी की रखवाली के तैयार है. उन्होंने वॉरसा में 'आतंकवाद और चरमपंथ' के खतरे को लेकर आगाह भी किया.

डोनल्ड ट्रंप ने रूस की भी आलोचना की. ट्रंप ने रूस से 'जिम्मेदार देशों के समुदाय में शामिल' होने की अपील की.

इमिग्रेशन और संप्रभुता के मसले पर पोलैंड की कंजर्वेटिव सरकार का रुख ट्रंप प्रशासन की तरह है.

जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में जी-20 के सम्मेलन के लिए दौरे पर निकले ट्रंप का पहला पड़ाव पोलैंड है.

पोलैंड की सत्तारूढ़ लॉ एंड जस्टिस पार्टी के नेता जैरोस्लॉ कैज़िस्की ने ट्रंप की यात्रा पर कहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति की यात्रा पर दूसरे यूरोपीय देश ईष्या कर रहे हैं.

जैरोस्लॉ कैज़िस्की ने ख़ासतौर पर ब्रिटेन का नाम लिया है. इस महीने के आखिर में राष्ट्रपति ट्रंप फ़्रांस का भी दौरा करने वाले हैं.

लेकिन सवाल उठता है कि पहले पोलैंड ही क्यों? बीबीसी संवाददाता कैविन पॉनिया के मुताबिक इसके पांच कारण हैं.

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Image caption 2001 में पोलैंड के दौरे पर जॉर्ज बुश

दोस्ताना स्वागत

ये तय है कि पोलैंड में राष्ट्रपति ट्रंप का दोस्ताना स्वागत होने वाला है. जाहिर है ट्रंप घरेलू मोर्चे पर पोलैंड यात्रा के जरिए अच्छा संदेश देना चाहेंगे.

हैम्बर्ग में उम्मीद की जा रही है कि जी-20 के मीटिंग स्थल के बाहर एक लाख के करीब प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो सकते हैं.

ब्रिटेन की उनकी चिरप्रतिक्षित यात्रा के दौरान भी लंदन में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है.

लेकिन पोलैंड में ट्रंप प्रशासन के लिए सब कुछ सहज और आसान रहने वाला है.

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Image caption पोलैंड के नेताओं पर कानून के शासन को दरकिनार करने के आरोप लगते रहे हैं

एक जैसी राजनीति

पोलैंड के सियासी नेता और ट्रंप दोनों खुद को एक ऐसी राजनीतिक मुहिम की उपज के तौर पर देखते हैं जो राजनीति के उदारवादी कुलीन तबके को हराकर सत्ता में आई है.

पश्चिम के देशों में ये कुलीन तबका सालों से राजनीति पर काबिज़ रहा था.

चाहे वो इमिग्रेशन का मुद्दा हो या फिर क्लाइमेट चेंज का, वे बिना किसी संकोच के राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखना पसंद करते हैं.

पोलैंड के एक ताकतवर मध्यमार्गी अख़बार में स्तंभकार माइकल स्ज़ल्डरज़िस्की कहते हैं, "ये विडंबना ही है कि आप ट्रंप या जैरोस्लॉ कैज़िस्की की जितनी भी आलोचना करें, उन्हें लगता है कि वे सही कर रहे हैं."

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Image caption मई में ब्रसेल्स सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने नैटो के नेताओं से रक्षा पर ज्यादा खर्च करने की अपील की थी

पोलैंड की तारीफ

पोलैंड यात्रा में ट्रंप ये जताएंगे कि जिन्होंने नेटो के मिलिट्री बजट में जीडीपी का दो फीसदी खर्च करने का टारगेट पूरा किया है, उन्हें इनाम दिया जाएगा.

माना जा रहा है कि ट्रंप इस टारगेट को पूरा करने के लिए पोलैंड की तारीफ करने वाले हैं. आखिर नेटो के कुछ ही सदस्यों देशों ने ये पूरा किया है.

फिलहाल पोलैंड में अमरीका के नौ सौ सैनिक कैम्प किए हुए हैं. इसका मकसद पूर्वी यूरोप में रूस से डरे नेटो देशों की चिंता को दूर करना है.

नेटो के आर्टिकल-5 के मुताबिक किसी एक सदस्य देश पर हमले का मतलब हर किसी पर हमला है.

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यूरोपीय यूनियन को झटका

पोलैंड दौरे में ट्रंप बाल्टिक, एड्रियाटिक और ब्लैक सी के बीच पड़ने वाले 12 देशों के सम्मेलन 'थ्री सीज़ समिट' को भी संबोधित करेंगे.

इस सम्मेलन का मकसद पोलैंड को यूरोपीय यूनियन के बाहर एक क्षेत्रीय ताकत के तौर पर पेश करना है. ईयू पर अभी तक फ्रांस और जर्मनी का दबदबा रहा है.

ट्रंप को इस सम्मेलन का आशीर्वाद यूरोपीय यूनियन के कई देशों को शायद पसंद न आए.

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रूस और अमरीका

गैस फ़ैक्टर

पोलैंड की सरकार ये कोशिश कर रही है कि रूस पर उसकी ऊर्जा निर्भरता कम हो.

पिछले महीने ही अमरीका से पहली बार लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस का पहला जहाजी बेड़ा पोलैंड पहुंचा है. ट्रंप के लिए ये मुनाफे का सौदा है.

पूर्वी यूरोप के देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को रणीनीतिक तरीके से पूरा करना चाहते हैं और अमरीका के लिए ङी अपना गैस बेचने का ये अच्छा मौका है.

'थ्री सीज़ समिट' के नेताओं को ट्रंप ये संदेश देने वाले हैं.

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