बंगाल में फिर हिंसा, ममता से विपक्ष नाराज़

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पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना ज़िले के बदूरिया, बशीरहट, देगांगा और स्वरूपनगर इलाक़े में सोमवार से सांप्रदायिक तनाव चल रहा है.

बशीरहट क़स्बे में गुरुवार को भी पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़पे हुईं हैं.

इसकी शुरुआत एक विवादित फ़ेसबुक पोस्ट से हुई थी जिसमें मुसलमानों के पवित्र स्थान काबा की एक छेड़छाड़ की हुई तस्वीर साझा की गई थी.

ये तस्वीर 11वीं के एक छात्र ने पोस्ट की थी जिसे हिरासत में ले लिया गया था. बावजूद इसके तनाव बढ़ता ही चला गया.

इलाके में इंटरनेट के ज़रिए कई तरह की अफ़वाहें भी फैलाई गई हैं. अब राज्य सरकार बुनियादी स्तर पर निगरानी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है ताकि सांप्रदायिक तनाव हो ही ना पाए.

कोशिश

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "हर चुनावी बूथ स्तर पर छात्र, युवा, सभी धर्मों के प्रतिनिधि, क्लबों के सदस्यों को लेकर शांति वाहिनी बनाई जाएंगी. स्थानीय प्रशासन पंद्रह दिनों के अंदर इन वाहिनियों का गठन करेगा."

ममता ने कहा, "अपने इलाक़े में शांति बनाए रखना इस वाहिनी का काम होगा और प्रशासन इसमें पूरी मदद करेगा ताकि कोई अफ़वाह और सांप्रदायिक तनाव न फैला पाए."

हालांकि विपक्षी दलों का कहना है कि ममता अपनी सरकार की नाकामी को छुपाने के लिए ऐसी वाहिनियों का गठन कर रही हैं.

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आरोप

सीपीएम के मोहम्मद सलीम कहते हैं, "ममता बनर्जी जो घोषणा करती हैं वो घोषणा ही रह जाती है. जहां हंगामा चल रहा है वहां सैन्य और अर्धसैनिक बल तैनात करने की ज़रूरत है. वो चार दिनों से तनाव ही नहीं रोक पाई हैं और अब सांप्रदायिक तनाव रोकने की ज़िम्मेदारी जनता पर छोड़ रही हैं. प्रशासन तनाव रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहा है."

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आरोप है कि सत्तारूढ़ दल में ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने सांप्रदायिक भाषण दिए हैं और अगर ऐसे लोग शांति वाहिनियों में रहे तो उनका कोई मायने ही नहीं रहेगा.

आरएसएस के दक्षिण बंगाल के प्रांत प्रचारक जिश्नू बसु कहते हैं, "पश्चिम बंगाल के लोग उनकी घोषणा को सुन के हंस रहे हैं. इन शांति वाहिनियों का नेतृत्व कौन करेगा?"

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मुहम्मद कमरूज़्ज़मा तनावग्रस्त क्षेत्र में ही रहते हैं और मुस्लिम नेता हैं. वो मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत करते हुए कहते हैं, "ये सिद्धांत पहले ही लाना चाहिए था. हर मज़हब के नेता सांप्रदायिक तनाव कम करने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग धर्म के नाम पर ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं. सिर्फ शांति वाहिनी के गठन से काम नहीं चलेगा ऐसे लोगों को पकड़कर सज़ा भी दी जानी चाहिए."

वहीं जिस बदूरिया इलाक़े में हंगामा की शुरुआत हुई थी वहां तो स्थिति सामान्य हो गई है लेकिन पास ही के बशीरहट क़स्बे में ताज़ा झड़पे हुई हैं.

स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलिस ने जब दंगे में शामिल होने के आरोप में कुछ हिंदू नागरिकों की गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी तो स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया और पुलिस के साथ झड़प हुई.

पुलिस के कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई है और आग लगा दी गई है. तनावग्रस्त क्षेत्र में बीएसएफ़ के जवानों को भी तैनात किया गया है.

प्रशासन ने इंटरनेट पर भी पाबंदी लगा दी है.

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