नगालैंड संकट: ज़ेलियांग का सरकार बनाने का दावा

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महज़ चार महीने पहले पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री शुरहोज़ेली लीजित्सू की सरकार के सामने राजनीतिक संकट खड़ा हो गया हैं. यह संकट उन्हीं की पार्टी नागा पीपुल्स फ़्रंट (एनपीएफ) के नेता टीआर ज़ेलियांग की वजह से सामने आया है.

पूर्व मुख्यमंत्री ज़ेलियांग ने 8 जुलाई यानी शनिवार को राज्यपाल पीबी आचार्य को सौंपे एक पत्र के ज़रिए दावा किया कि उनके पास एनपीएफ के कुल 47 में से 34 विधायकों का समर्थन है.

ज़ेलियांग ने 4 जुलाई को दीमापुर स्थित उनके निवास पर पार्टी विधायकों की एक बैठक का हवाला देते हुए पत्र में कहा है कि ये विधायक उन्हें फिर से विधायक दल के नेता के तौर पर समर्थन दे रहे हैं ताकि वे राज्यपाल के समक्ष एनपीएफ के नेतृत्व में नागालैंड डेमोक्रेटिक गठबंधन की एक नई सरकार गठित करने का दावा पेश कर सकें.

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ज़ेलियांग ने राज्यपाल को सौंपे अपने पत्र में यह भी लिखा है कि उन्हें समर्थन देने वाले विधायकों ने मौजूदा मुख्यमंत्री लीजित्सू से आग्रह किया है कि वे इस्तीफ़ा दे दें ताकि उनके (ज़ेलियांग) मुख्यमंत्री बनने का रास्ता आसान हो सके.

निर्दलियों का भी समर्थन

ज़ेलियांग ने पार्टी के 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र भी राज्यपाल को सौंपा है. इसके अलावा ज़ेलियांग ने सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा भी किया है. .

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मुख्यमंत्री शुरहोजेली ने अभी तक विधायक के लिए चुनाव नहीं लड़ा है. हालांकि उनके विधायक बेटे खरिएहु लीजित्सू ने 10 उत्तरी अंगामी-आई सीट अपने पिता के लिए खाली कर दी है.

ज़ेलियांग ने राज्यपाल से आग्रह किया कि नगालैंड में नई सरकार गठन के लिए उन्हें आमंत्रित किया जाए. हालांकि राजभवन की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

इससे पहले, ज़ेलियांग ने नगालैंड सरकार के वित्त सलाहकार पद से अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया.

इस साल, फरवरी में नगालैंड में स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के एक फ़ैसले का विरोध करते हुए नागा जनजाति समूहों ने हिंसक आंदोलन किया था. राज्य में व्यापक स्तर पर हुई हिंसा के बाद ज़ेलियांग ने अपना आदेश वापस ले लिया था और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा भी दे दिया था.

नगालैंड में कोई विपक्ष नहीं है क्योंकि 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 49 विधायक एनपीएफ के हैं, जबकि 4 भाजपा के और 7 निर्दलीय हैं.

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