तेजस्वी पर इस्तीफ़े के दबाव के बीच राजद की बैठक

इमेज कॉपीरइट biharpictures.com

राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब सबकी नज़रें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हैं.

सीबीआई छापेमारी के तीन दिन बीत जाने के बाद भी उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

छापे के बाद बोले लालू- मोदी से मुझे डर नहीं लगता

लड़ाई में फँस गए हैं लालू के तेजस्वी?

इन तीन दिनों में इतना ज़रूर हुआ है कि नीतीश भौगोलिक रूप से लालू यादव के क़रीब आ चुके हैं. सात जुलाई को जब छापेमारी हुई तो नीतीश कुमार राजगीर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे.

नीतीश रविवार को पटना लौट आए हैं. गौरतलब है कि पटना में नीतीश और लालू यादव के आवास आस-पास है.

नीतीश की चुप्पी

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इस बीच ख़बरों के मुताबिक आज का लोक-संवाद का सरकारी कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है.

यह कार्यक्रम आम तौर पर हर सोमवार आयोजित होता है और इसके बाद मुख्यमंत्री मीडिया से बातचीत भी करते हैं. माना जा रहा है कि मीडिया के सवालों से बचने के लिए ऐसा किया गया है.

कोविंद के समर्थन से पीछे हटना मुमकिन नहींः जेडीयू

नज़रिया: नीतीश की मुस्कान से लालू उतने परेशान नहीं, जितने लालू की मुस्कान से नीतीश

हालांकि ये कोई पहला मौक़ा नहीं कि जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते किसी बड़ी घटना के बाद मीडिया से दूरी बनाई हो.

अपने पिछले कार्यकालों के दौरान नीतीश ने मिड डे मील हादसे सहित कुछ बड़ी घटनाओं पर चंद दिनों तक ख़ामोश रहना ही पसंद किया था. लेकिन इस बार मामला किसी हादसे का नहीं बल्कि राजनीतिक है.

लड़ाई क़ानूनी नहीं राजनीतिक

इमेज कॉपीरइट biharpictures.com

नीतीश की चुप्पी के बीच राष्ट्रीय जनता दल के विधायक दल की आज बैठक हो रही है.

माना जा रहा है कि नीतीश इसके इंतज़ार में हैं कि उनके सरकार की बड़ी सहयोगी पार्टी इस बैठक में क्या-क्या फैसला लेती है.

मैं 2019 में विपक्ष का पीएम चेहरा नहीं हूं: नीतीश कुमार

हालांकि राजद पहले ही यह साफ़ कर चुका है कि उनके नेता और सूबे के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे.

आज की बैठक के बारे में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने बताया, "लालू जी सहित विपक्षी दलों के नेताओं को प्रताड़ित करने के राजनीतिक निहितार्थ हैं. आज की बैठक में अपने विधायकों को इससे रुबरू कराएंगे. बैठक का मकसद आने वाले संघर्ष के लिए उनको तैयार करना है. विधायकों को ये बताना है कि ये लड़ाई क़ानूनी नहीं राजनीतिक है."

जदयू ने मंगलवार को एक अहम बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि नीतीश कुमार इस बैठक के बाद ही अपने फैसले के साथ सामने आएंगे.

मांझी ने याद दिलाया अपना इस्तीफ़ा

इमेज कॉपीरइट PRASHANT RAVI

इस बीच कल सत्तारुढ़ गठबंधन के घटक दलों की ओर से तो कोई बड़ा बयान नहीं आया लेकिन विपक्षी दलों ने अलग-अलग तरीके से तेजस्वी के इस्तीफ़े के लिए नीतीश पर दबाव बढ़ाया.

2005 में जब नीतीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे तो तब उनके मंत्रिमंडल सहयोगी के रुप में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी शपथ ली थी.

लेकिन शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि उन पर एक घोटाले में शामिल होने के आारोप लगे थे.

अपने इस इस्तीफे के आधार पर मांझी ने नीतीश पर कल निशाना साधते हुए कहा, "नीतीश के लिए नैतिकता और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टोलरेंस' पीछे छूट गए हैं. वे केवल अपनी कुर्सी बचाने के लिए तेजस्वी के इस्तीफ़े के सवाल पर चुप हैं."

उमा और तेजस्वी का मामला अलग-अलग

इमेज कॉपीरइट Getty Images

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद नित्यानंद राय ने बीबीसी से खास बातचीत में कहा, "अगर तेजस्वी इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो भाजपा इसके लिए आंदोलन करेगी."

तेजस्वी के इस्तीफ़े की मांग पर राजद का यह भी तर्क है कि पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती इस्तीफ़ा दें.

गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उमा भारती पर मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया लेकिन इसके बाद भी ने उन्होंने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया था.

उमा भारती के इस्तीफे की मांग पर नित्यानंद राय कहते हैं कि उमा भारती और तेजस्वी का मामला अलग-अलग है.

इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने राजद विधायकों से अपील की है कि वे लालू जी पर दबाव बनाकर तेजस्वी का इस्तीफ़ा लें और किसी दूसरे नेता को उपमुख्यमंत्री बनाएं.

नज़रिया: आखिर लालू और नीतीश के बीच चल क्या रहा है?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे