जब तक बंदूक चलेगी, बात नहीं होगी: निर्मल सिंह

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भारत प्रशासित कश्मीर के उपमुख्यमंत्री के मुताबिक सही माहौल में ही हो सकती है पाक से बातचीत

भारत प्रशासित कश्मीर के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह स्वीकार करते हैं कि कश्मीर मुद्दे का हल 'टेबल' पर ही होगा.

हालांकि उनका मानना है कि बातचीत के लिए पहले घाटी में माहौल तैयार करने की ज़रूरत है जिसके लिए उनकी सरकार अपनी भूमिका अदा करने को तैयार है.

बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा, "आखिर में हल (कश्मीर मुद्दे का) जो है वो तो टेबल पर ही होगा. इसमें दो राय नहीं है."

उन्होंने ये भी माना कि "किसी भी तरह से बंदूक से ये मसला हल नहीं होने वाला और ये पक्की बात है. लेकिन उसके लिए माहौल चाहिए."

सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर चरमपंथियों के हमले से एक घंटा पहले उन्होंने बीबीसी से कहा कि वो वार्ता के लिए तैयार हैं.

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"ड्राइवर ने दिमाग लगाया और कई यात्रियों की जान बचा दी"

हुर्रियत का रवैया

लेकिन उनका सवाल था कि बातचीत किससे करें, "आपको याद होगा पिछली बार जब पार्लियामेंट्री डेलिगेशन आया तो हुर्रियत (अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस) वालों ने दरवाज़े बंद कर दिए."

कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार है. निर्मल सिंह कहते हैं कि हुर्रियत को चरमपंथी संगठनों का साथ छोड़ना होगा और हिंसा के रस्ते से अलग होना होगा, "जब तक बंदूक चलेगी, जब तक तोप चलेगी तब तक बातचीत नहीं होगी."

कश्मीर के मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच अक्सर बातचीत करने की कोशिश होती है.

निर्मल सिंह कहते हैं, "अगर पाकिस्तान से बातचीत होनी है तो सरहद पर फायरिंग बंद होनी चाहिए. आतंक को यहाँ हवा देने की कोशिश बंद होनी चाहिए. वो आएं बात करें ना."

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कश्मीर घाटी में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा

पाकिस्तान से वार्ता

आम कश्मीरी ये महसूस करता है कि जब से भाजपा केंद्र में सत्ता में आई है उसकी सरकार ताक़त के ज़ोर पर हकूमत कर रही है, इससे निर्मल सिंह इनकार करते हैं, "जितनी लिबरल तरीके से हमारी सरकार चल रही है, उसके बावजूद भी उकसाने की इतनी कोशिश होती है."

वो आगे कहते हैं कि अधिकतर लोग शांति चाहते हैं, तरक़्क़ी चाहते हैं. सरकार जो काम कर रही है जनता उसके साथ है. लेकिन माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की जाती है. चीज़ों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है जिससे मामला दब जाता है.

कश्मीर के लोगों का कहना है कि घाटी में जारी तनाव और पिछले साल हुई हिंसा (जिसमें दर्जनों युवाओं की मौत हुई) के बाद युवाओं में बेज़ारी बढ़ी है.

लेकिन निर्मल सिंह के अनुसार हज़ारों युवा सरकार के अलग-अलग कार्यकर्मों से जुड़ रहे हैं. सरकार उनकी परेशानियों को समझने की पूरी कोशिश कर रही है.

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