नजरियाः मोदी के पीछे भाजपा में घुस आई है ढेर सारी कांग्रेस

देखने की अदा है कि देश के संस्कृति मंत्री, महेश शर्मा को प्रधानमंत्री मोदी में महात्मा गांधी दिखाई दे रहे हैं.

संभवतः उनकी आंखों के आगे, इस साल जनवरी में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा जारी किए कैलेंडर पर चरखा कातते मोदी की चमकीली तस्वीर नाच रही होगी तभी उन्होंने नमक सत्याग्रह पर अंग्रेजी में लिखी एक किताब के विमोचन के मौके पर कहा, "आज हमारे बीच में हमारे प्रधानमंत्री जी के रूप में एक और गांधी युग के प्रणेता हैं."

'एक बार फिर महात्मा गांधी की हत्या हुई है'

इससे पहले हाल ही में महेश शर्मा आर्कियालॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के अफ़सरों की एक टीम लेकर गुजरात में वडनगर रेलवे स्टेशन के उस प्लेटफ़ॉर्म का दौरा कर चुके हैं जहां कथित तौर पर मोदी बचपन में चाय बेचा करते थे.

'गोडसे से नाता'

उस चाय की दुकान के इर्द गिर्द वडनगर को 'टूरिस्ट स्पॉट' के रूप में विकसित किया जाना है. सौ करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया जा चुका है.

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प्रधानमंत्री मोदी को गांधी के रूप में देखने और चाय की दुकान को दुनिया भर के सैलानियों के सामने प्रेरणा की तरह सजाने की कवायद में हास्यास्पद विरोधाभास है.

गांधी में एक नैतिक बल, सादगी और सरकार के बजाय जनता की तरफ खड़े होने का हठ की हद छूता आग्रह था जिसका भाजपा हमेशा से माखौल उड़ाती रही है.

भाजपा का पितृसंगठन आरएसएस गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को सुविधानुसार कभी अपना प्रतीक पुरूष मानता और कभी नकारता रहा है.

गांधी के विराट व्यक्तित्व को एक जाति के भीतर समाने लायक आकार में सिकोड़ देने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उन्हें अब भी महज एक "चतुर बनिया" मानते हैं.

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दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी हैं जो चाय की दुकान पर गिलास धुलने वाले बालक के अभागे निर्धन अतीत से लेकर अपना नाम लिखा नौलखा सूट पहनने और आलोचकों को जवाब देने के लिए उसे ऊंची क़ीमत में नीलाम कराने वाले एलीट प्रधानमंत्री के वर्तमान तक का सफ़र तय कर चुके हैं.

वह गाय के नाम पर सांप्रदायिक भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों की हत्याओं (मॉब लिंचिंग) के बढ़ते चलन पर लंबी चुप्पी के बाद चिंतित तो होते हैं लेकिन कोई कठोर प्रशासनिक क़दम उठाने के बजाय एक कहानी सुनाते हैं.

मोदी पर विशेषणों की बरसात

इस कहानी का सार यह होता है कि गाय में मानव से अधिक मानवता, करूणा और पश्चाताप की भावना होती है. ठोस कार्रवाई की आशा लगाए देश प्रधानमंत्री के कथालोक में गोते लगाने लगता है. भूलना नहीं चाहिए कि लंगोटी पहनने वाले गांधी ने कई बार अपनी जान की बाजी लगाकर सांप्रदायिक दंगों को रोका था.

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जाहिर है कि महेश शर्मा के लिए गांधी सिर्फ अपने काम का एक सजावटी विशेषण है और प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी पर विशेषणों की बरसात हो रही है. योग गुरू बाबा रामदेव उन्हें राष्ट्रऋषि कहते हैं.

'महात्मा' का 'चतुर बनिया' बनना हमें परेशान क्यों नहीं करता?

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ उन्हें दुनिया को योग सिखाने वाला महायोगी बता रहे हैं. सूचना एवं प्रसारण मंत्री वैंकेया नायडू को मोदी भारत को भगवान का दिया उपहार मानते हैं.

गृहराज्य मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि विख्यात फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस ने बहुत पहले मोदी के बारे में भविष्यवाणी कर दी थी कि वह 2014-2016 के बीच भारत का नेतृत्व संभाल कर उसे विश्वशक्ति बनाएंगे.

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भाजपा कांग्रेस की व्यक्तिपूजा और चापलूसी का विरोध करने वाली पार्टी रही है लेकिन अब मोदीवादी पार्टी में बदल चुकी है.

पार्टी की हर सभा में "मोदी-मोदी" का कोरस है और नगरपालिका का चुनाव भी प्रधानमंत्री के चेहरे पर लड़ा जा रहा है. केंद्र सरकार के मंत्रियों और पार्टी के बड़े नेताओं में प्रधानमंत्री की नज़र में नंबर बढ़वाने के लिए भीषण स्पर्धा चल रही है. छोटे नेताओं द्वारा रचित विरुदावलियों के "पद" कम मानीखेज़ नहीं है लेकिन वे सही कानों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं.

बीजेपी नहीं मोदी की बीजेपी

अभी अप्रैल में प्रधानमंत्री मोदी सूरत गए थे, वहां उनके झाड़ू लगाते हुए विश्व के सबसे ऊंचे कटआउट ही नहीं लगवाए गए थे बल्कि एयरपोर्ट पर बुर्काधारी हज़ार मुस्लिम महिलाओं को भी लाया गया था. कहा गया, वे तीन तलाक़ पर अपना समर्थन जताने आई थीं.

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केंद्र में भाजपा सरकार के तीन साल पूरे होने पर देश भर में मोदीफ़ेस्ट आयोजित किए जा चुके हैं. इस फ़ेस्ट के मोदी का मतलब है मेकिंग आफ डेवलप्ड इंडिया. विपक्षियों के हमलों से बचने और अपना मकसद दोनों एक साथ साधने की यह कला जो भाजपाईयों ने खुद मोदी से सीखी है.

मोदी शब्दसंक्षेपों के ज़रिए (एबीसीडी- आदर्श,बोफ़ोर्स, कोल, दामाद. आरएसवीपी- राहुल, सोनिया, वाड्रा, प्रियंका, भीम- भारत इंटरफेस फार मनी) अपना संदेश देने में पारंगत है.

चापलूसी की कांग्रेसी शैली के गगनचुंबी दिनों में पार्टी के अध्यक्ष देवकांत बरूआ ने इंदिरा इज़ इंडिया- इंडिया इज़ इंदिरा कहा था. ज्ञानी जैल सिंह अपनी नेता के कहने पर झाड़ू लगाने को तैयार थे.

अब तीन साल की सत्ता के दौरान मोदी को अवतारी पुरूष बताने का कीर्तन ढोल मजीरे के साथ उठान पर है. कोई भी देख सकता है कि मोदी के पीछे-पीछे भाजपा में ढेर सारी कांग्रेस घुस आई है.

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