गाय को हमारे यहां माँ मानते हैं लेकिन....

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सोमवार से शुरु हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई.

बैठक में जीएसटी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से गोरक्षकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की बात भी कही.

प्रधानमंत्री ने कहा कि गोरक्षकों की मनमानी के ख़िलाफ़ राज्य सरकारों को सख्त क़दम उठाना चाहिए.

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प्रधानमंत्री ने इस बैठक के बाद ट्वीट करके गोरक्षकों की मनमानी की निंदा की है.

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कथित गोरक्षकों पर ये हैं प्रधानमंत्री मोदी की अहम बातें-

  • गौरक्षा को कुछ असामाजिक तत्वों ने अराजकता फैलाने का माध्यम बना लिया है. इसका फ़ायदा देश में सौहार्द बिगाड़ने में लगे लोग भी उठा रहे हैं. देश की छवि पर भी इसका असर पड़ रहा है. राज्य सरकारों को ऐसे असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए.
  • गाय को हमारे यहां माँ मानते हैं, लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं, लेकिन यह समझना होगा कि गौरक्षा के लिए क़ानून हैं और इन्हें तोड़ना विकल्प नहीं है.
  • क़ानून व्यवस्था को बनाए रखना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है और जहां भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं, राज्य सरकारों को इनसे सख्ती से निपटना चाहिए.
  • राज्य सरकारों को ये भी देखना चाहिए कि कहीं कुछ लोग गौरक्षा के नाम पर अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी का बदला तो नहीं ले रहे हैं.
  • हम सभी राजनीतिक दलों को गौरक्षा के नाम पर हो रही इस गुंडागर्दी की कड़ी भर्त्सना करनी चाहिए.
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गोरक्षकों के अलावा भी पीएम मोदी ने कई अहम बातें कही हैं-

  • कई दशकों से नेताओं की साख हमारे बीच के ही कुछ नेताओं के बर्ताव की वजह से कटघरे में है. हमें जनता को भरोसा दिलाना होगा कि हर नेता दागी नहीं है.
  • सार्वजनिक जीवन में स्वच्छता के साथ ही भ्रष्ट नेताओं पर कार्रवाई आवश्यक है. हर दल ऐसे नेताओं को पहचानकर अपने दल की राजनीतिक यात्रा से अलग करे.
  • देश को लूटनेवालों के ख़िलाफ़ जब क़ानून अपना काम करता है तो सियासी साजिश की बात करके बचने का रास्ता खोजने वालों के ख़िलाफ़ एकजुट होना होगा.
  • 9 अगस्त को अगस्त क्रांति के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. यह अवसर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन खपा देने वाले महान सपूतों को याद करने का है.
  • ये अवसर युवा पीढ़ी को अगस्त क्रांति का महत्व बताने का है. मेरा अनुरोध है कि दोनों सदनों और देश भर में इस अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन हो.
  • इस बार के राष्ट्रपति चुनाव ऐतिहासिक है. संभवत: पहली बार किसी भी दल ने दूसरे उम्मीदवार पर अमर्यादित टिप्पणी या बेवजह बयानबाजी नहीं की.
  • सभी दलों ने इस चुनाव की गरिमा का ध्यान रखा. यह हमारे लोकतंत्र की परिपक्वता की ऊँचाई है. अब हमें सुनिश्चित करना है कि एक भी वोट बेकार न जाए.

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