#SwachhDigitalIndia: व्हाट्स ऐप पर संदेश का स्रोत पता लगाना मुमकिन?

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व्हाट्स ऐप अपने उपभोक्ताओं को संदेश, ऑडियो और वीडियो कॉल्स भेजने के अलावा, तस्वीरें, वीडियो और अपनी लोकेशन शेयर करने की सुविधा देता है.

हाल ही में व्हाट्स ऐप ने अपने संदेशों को एंड टू एंड एनक्रिप्टेड करना शुरू किया. इसका मतलब है कि कोई भी तीसरा पक्ष दो लोगों के बीच के संदेशों को नहीं पढ़ सकता.

कंपनी ने कहा है, "जब आपका संदेश एंड टू एंड एनक्रिप्टेड होता है तो आपके मैसेज, तस्वीरें, वीडियो, वॉयस मेसेज, डॉक्यूमेंट, स्टेटस अपडेट और कॉल गलत हाथों में जाने से बच जाती हैं."

"व्हाट्स ऐप के एंड टू एंड एनक्र्पिशन से आप और आप जिसे संदेश भेज रहे हैं, सिर्फ़ वो ही बातचीत कर पाएंगे, दूसरो कोई भी नहीं. व्हाट्स ऐप भी नहीं."

"आपका संदेश एक ताले की मदद से सुरक्षित है, सिर्फ़ आपके पास और आप जिसे संदेश भेज रहे हैं, उनके पास इस ताले को खोलने और संदेश पढ़ने की विशेष चाभी है. और अधिक सुरक्षा के लिए हर भेजे जाने वाले संदेश के लिए अलग ताला और चाभी होती है."

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ऐसी स्थिति में मानिए कोई गलत, भड़काने वाला संदेश या वीडियो वायरल हो जाता है जिसे रोका जाना चाहिए. क्या ये पता लगाना संभव है कि इस वीडियो या संदेश को सबसे पहले व्हाट्स ऐप में किसने डाला, इसका सोर्स क्या था?

कैसे पता चलेगा सोर्स?

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फ़ेसबुक के एक प्रवक्ता ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. फ़ेसबुक व्हाट्स ऐप का मालिक है.

कई जानकारों का भी मानना है कि ये पता लगाना संभव नहीं है कि किसी वीडियो को किसने और कहां सबसे पहले व्हाट्स ऐप में डाला.

कारण साफ़ है. कंपनी का कहना है कि वो डाटा सर्वर पर नहीं बचा कर रखती है.

एथिकल हैकर रिज़वान शेख को भी कंपनी की बात पर यकीन है लेकिन वो कहते हैं कि अगर सुरक्षा एजेंसियां चाहें तो वो ये पता लगा सकती हैं कि मैसेज किन-किन मोबाइल पर गया और उसे आगे फॉरवर्ड किया गया, लेकिन रिसोर्सेज़ की कमी के कारण हर बार ये करना संभव नहीं हो पाता.

वो कहते हैं, "एक मैसेज व्हाट्स ऐप पर कुछ ही घंटों में वायरल हो जाता. अगर आप मैसेज को फैलने से रोकना चाहते हैं और पता लगाना चाहते हैं कि ये कहां से आया, तो ऐसा करने के लिए शुरुआती घंटों में ही कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत होती है."

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व्हाट्स ऐप ने भाषा की सीमा को तोड़ दिया है. वीडियो, ग्राफिक्स के माध्यम से मैसेज तेज़ी से फैल जाते हैं.

अब इस कहानी को ही लीजिए

वर्ष 2015 में खबर आई कि वायु सेना का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. पुलिस ने चित्रकूट के आसपास के 10 किलोमीटर के हिस्से को छान मारा लेकिन कुछ नहीं मिला. तब पुलिस को शक़ हुआ कि ये खबर झूठी थी.

चित्रकूट के तत्कालीन एसपी पवन कुमार ने बताया कि ये बात व्हाट्स ऐप में एक तस्वीर के कारण फैली.

स्थानीय पत्रकार विवेक अग्रवाल कहते हैं कि ख़बर करने की जल्दी के कारण किसी ने भी इसकी सत्यता की जांच नहीं की.

कुमार बताते हैं कि ये तस्वीर दरअसल मध्य प्रदेश के सतना की थी.

एक अन्य पत्रकार जिसने इस मामले पर ख़बर चलाई थी, उनके मुताबिक ये तस्वीर राजस्थान से आई थी.

ऐसी स्थिति में ये पता करना किी किसी तस्वीर या वीडियो की उत्पत्ति कहां से हुई, बेहद मुश्किल है.

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सेंटर ऑफ इंटरनेट एंड सोसाइटी के सुनील अब्राहम के पास व्हाट्स ऐप से जुड़े कुछ सवाल हैं.

वो कहते हैं दो पक्षों के बीच तो एनक्रिप्शन सबसे बेहतर काम करता है लेकिन ग्रुप बातचीत में क्या होता है.

"दो पक्षों के बीच एंड टू एंट एनक्रिप्शन सबसे बेहतर काम करता है. एक ग्रुप में एक संदेश को कई पक्षों के पास भेजा जाता है. मुझे ये विश्वास करने में परेशानी है कि एक मैसेज को जब 100 सदस्यों वाले ग्रुप में भेजा जाता है तो वो संदेश 100 बार एनक्रिप्ट होता है और फिर हर ग्रुप सदस्य को प्राप्त होता है. मुझे नहीं लगता है कि ये तकनीक इस तरह से काम करती है."

उनका मानना है कि व्हाट्स ऐप के पास इस सवाल के जवाब होने चाहिए.

इस बीच एनडीटीवी के मुताबिक व्हाट्स ऐप ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वो सोशल मीडिया पर शेयर होने वाले यौन हिंसा के वीडियो को शेयर होने से रोकने के लिए मदद करेगी.

एंड टू एंड एनक्रिप्शन के माहौल में ये कैसे होगा, ये साफ़ नहीं है.

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