मायावती का इस्तीफ़ा राजनीतिक पैंतरेबाज़ी: भाजपा

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बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती की राज्यसभा में नाराज़गी और उसके बाद इस्तीफ़े को लेकर राजनीतिक दलों ने अपने तरीक़े से प्रतिक्रिया दी है.

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उन्हें इस्तीफ़े की बजाय संघर्ष करना चाहिए, वहीं समाजवादी पार्टी खुलकर मायावती का समर्थन करने से बच रही है.

राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी खुलकर मायावती के साथ दिखी और पार्टी के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी बयान दिया लेकिन उत्तर प्रदेश से कांग्रेस में राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी का कहना है कि ये समय इस्तीफ़े का नहीं बल्कि संघर्ष का है.

बीबीसी से बातचीत में प्रमोद तिवारी ने कहा, "ये सही है कि संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम किया जा रहा है लेकिन हमें इसके ख़िलाफ़ संघर्ष करना होगा. हम मायावती जी से अपील करते हैं कि वो अपना इस्तीफ़ा वापस लें."

प्रमोद तिवारी का कहना था कि मायावती को सिर्फ़ तीन मिनट समय देना उचित नहीं था क्योंकि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के दूसरे नेता भी अपना समय उन्हें देने की अपील कर चुके थे.

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तीन पेज का इस्तीफ़ा

वहीं समाजवादी पार्टी के नेता इस बारे में काफी संभल कर बयान दे रहे हैं. पार्टी के प्रवक्ता भी कुछ कहने से बच रहे हैं. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सदस्य नरेश अग्रवाल से जब उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने साफ़तौर पर कहा कि वे कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे.

हालांकि साथ में उन्होंने ये भी कहा कि इस्तीफ़ा तो स्वीकार होगा ही नहीं. नरेश अग्रवाल ने कहा, "पहले आप उनका इस्तीफ़ा पढ़िए. नियमावली में सिर्फ़ तीन लाइन के संक्षिप्त इस्तीफ़े का प्रावधान है. मायावती जी ने पूरे तीन पेज का इस्तीफ़ा कारण बताते हुए लिखा है."

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वहीं बहुजन समाज पार्टी इस मामले को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है.

बीएसपी विधायक मुख़्तार अंसारी ने विधान सभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज़ दबा रही है और उनकी पार्टी इसके लिए ज़मीन पर संघर्ष करेगी.

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नाटक

जबकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि ये मायावती की राजनीतिक पैंतरेबाज़ी है.

पार्टी के राज्य महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं, "जिस मुद्दे को मायावती राज्य सभा में उठा रही हैं वो राज्य का मामला है. विधानसभा का सत्र चल रहा है, यहां उनके विधायक उस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं. मायावती का कार्यकाल सिर्फ़ आठ महीने बचा है और आगे उनका राज्यसभा में न पहुंचना तय है, ऐसे में इस्तीफ़े का नाटक करके वो लोगों की सहानुभूति लेना चाहती हैं."

मायावती मंगलवार को राज्यसभा में पिछले दिनों सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष के मुद्दे पर बोलना चाहती थीं, लेकिन उन्हें इसके लिए सिर्फ़ तीन मिनट का समय दिया गया और जब इससे ज़्यादा वो बोलने लगीं तो उप सभापति ने उन्हें टोका और सत्ता पक्ष के लोग भी आपत्ति करने लगे.

इससे नाराज़ होकर मायावती बाहर चली आईं और फिर बाद में अपना इस्तीफ़ा दे दिया.

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