राजनीतिक भूकंप के वो तीन घंटे जिसमें टूट गया बिहार का महागठबंधन

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नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने जा रहे हैं, ये ख़बर साढ़े छह बजे के आस पास से आनी शुरू हुई. जनता दल यूनाइटेड के विधायक दल के नेताओं के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सीधा राजभवन का रुख़ किया.

कयासों का दौर बहुत लंबा नहीं चल पाया क्योंकि महज आधे घंटे के अंदर नीतीश कुमार मीडिया से बात करते दिखे और कोई एक दो मिनट नहीं बल्कि पूरे 25 मिनट तक नीतीश बोले.

नीतीश कुमार हर उस बात पर साफ़गोई से बोले, जो उनके भविष्य की राजनीतिक का संकेत दे रहा था. पहले तो उन्होंने साफ़ कहा कि 20 महीने तक उन्होंने सरकार कायदे से चलाकर दिखाया.

नीतीश ने ये भी कहा कि गठबंधन धर्म को निभाते हुए जनता से किए वादे को पूरा करने की कोशिश की. उन्होंने शराबबंदी के अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इसके ज़रिए सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद रखी है.

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उन्होंने इस दौरान तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों पर भी साफ़ किया कि मैंने इस्तीफ़ा नहीं मांगा था, लेकिन जिस तरह के आरोप लग रहे थे, उसमें उनका काम करना मुश्किल हो गया था. नीतीश के मुताबिक तेजस्वी अगर इस्तीफ़ा देते तो उनका क़द बढ़ता ही.

लालू पर हमला

नीतीश कुमार ने अपने इस इस्तीफ़े के एलान में लालू प्रसाद यादव को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि धन-संपत्ति ग़लत तरीक़े से अर्जित करने का कोई मतलब नहीं है. कफ़न में कोई जेब नहीं होती है. कोई लेकर नहीं जाता है. ज़ाहिर है लालू यादव पर जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं, आय से ज़्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप लगते रहे हैं, उसे नीतीश ने ज़ोरदार तरीके से जनता के सामने रखा.

नीतीश कुमार ने अपने तरकश के हर उस तीर का इस्तेमाल किया जो उनकी इमेज पॉलिटिक्स को दमदार बनाती है.

नीतीश ने इन सबके बीच नरेंद्र मोदी सरकार के समर्थन का मसला, चाहे वो नोटबंदी हो चाहे राष्ट्रपति चुनाव हो, उस पर अपनी रणनीति को भी सही ठहराया. और तो और उन्होंने ये भी साफ़ कर दिया कि बिहार के हित में बीजेपी के साथ सरकार बनानी पड़ी तो वो बनाएंगे.

नीतीश की घर वापसी

नीतीश कुमार के ऐलान के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके नीतीश कुमार को बधाई दी. सवा सात बजे में पटना में बीजेपी विधायक दल के नेताओं की बैठक शुरू हो गई. इस दौरान बीजेपी की ओर से कहा गया नीतीश कुमार अगर समर्थन मांगेंगे तो देखा जाएगा.

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रात आठ बजे के करीब लालू प्रसाद यादव ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा. हालांकि उन्होंने जिस अंदाज़ में नीतीश कुमार पर हत्या के आरोप से अपनी बात शुरू की, उससे साफ़ लग रहा था कि महागठबंधन ख़त्म हो चुका है. लेकिन बीच में उन्होंने महागठबंधन में शामिल दलों को नीतीश कुमार की जगह नया नेता चुनने का ऑफ़र दे दिया.

लालू के इस ऑफ़र को देखकर बीजेपी तेजी से सक्रिय हुई और सवा नौ बजे तक भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार को समर्थन देने का एलान कर दिया. इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के विधायक नीतीश कुमार के घर पहुंचने लगे.

साढ़े नौ बजे तक तस्वीर साफ़ हो गई कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में एनडीए सरकार चार साल बाद फिर से बनने जा रही है. महज तीन घंटे के अंदर महागठबंधन का 20 महीने पुराना प्रयोग टूट गया. नीतीश कुमार एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के खेमे में पहुंच गए हैं.

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