प्रेस रिव्यू: अलगाववादियों पर कार्रवाई को लेकर क्या बोलीं महबूबा?

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द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने शनिवार को हाल ही में अलगाववादी नेताओं को गिरफ़्तार किए जाने की आलोचना की है.

महबूबा ने कहा, ''आप विचारों को क़ैद में नहीं रख सकते. आप विचारों को मार नहीं सकते.'' महबूबा ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी सरकार सरहद पार और श्रीनगर मुज़फ़्फ़राबाद रोड लिंक से होने वाले व्यापार पर किसी भी तरह की रोक लगाने को बर्दाश्त नहीं करेंगी.

महबूबा ने कहा, ''मैं बार-बार ये कहती हूं कि आप विचार को नहीं मार सकते. एक आइडिया बेहतर आइडिया बन सकता है.''

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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, उत्तर प्रदेश के बरेली में 14 साल की बलात्कार पीड़िता की शादी गांववालों ने रेप के आरोपी से करवा दी है.

बीते साल गर्भपात करवाने की इजाज़त न मिलने के बाद बलात्कार पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया था. डॉक्टरों का कहना था कि अगर पीड़िता का गर्भपात करवाया गया तो ये जच्चा और बच्चा दोनों के लिए ख़तरनाक हो सकता है.

फिलहाल बच्चे के साथ पीड़िता आरोपी के घर में रह रही है. भारत में 20 हफ़्ते तक ही गर्भपात कराने की कानून इजाज़त देता है.

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जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़, गुजरात कांग्रेस ने भले ही अपने विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है लेकिन राज्यसभा चुनाव में पार्टी की मुश्किलें कम होती नज़र नहीं आ रही हैं.

अख़बार ने लिखा है कि कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल पर हार का संकट बना हुआ है. क्योंकि पार्टी से किनारा करने वाले वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला के सात समर्थक अभी पार्टी की पहुंच में नहीं हैं. इन विधायकों से पार्टी का संपर्क नहीं हो पा रहा है.

वाघेला के करीबी नेता राघवजी पटेल ने दावा किया है कि क़रीब 20 और विधायक पार्टी से टूटने को तैयार हैं.

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जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू हुए 30 दिन हो रहे हैं. दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने की ख़बर में ये दावा किया है कि जीएसटी के चलते ग्राहकों से ज़्यादा रुपये वसूल किए जा रहे हैं.

अख़बार ने लिखा कि जीएसटी का सिस्टम ज़्यादातर कारोबारियों को पता ही नहीं है. ख़बर में कई बड़े नामी स्टोर्स के एमआरपी के बाद जीएसटी लगाने की बात कही गई. एक जुलाई से पूरे देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लागू किया गया था.

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अमर उजाला की एक ख़बर के मुताबिक़, भारतीय बच्चों में तेज़ी से ब्रेन ट्यूमर बीमारी बढ़ रही है. हर साल इस बीमारी से क़रीब 40 से 50 हज़ार लोग जूझते हैं. इनमें 20 फ़ीसदी संख्या बच्चों की होती है.

इसे देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने देशभर के डॉक्टरों को एडवाइजरी जारी करके मरीजों का तुरंत इलाज करवाने का निर्देश दिया है.

अगर ये बीमारी शुरू में पकड़ में आ जाए तो 90 फ़ीसदी मामलों में इसका इलाज संभव है.

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