गंदगी से जिहाद छेड़ने वाला कश्मीरी

बिलाल अहमद डार, वुलर झील, कश्मीर इमेज कॉपीरइट Majid Jahangir

उम्र 17 साल और रुतबा श्रीनगर नगर निगम के ब्रैंड एम्बैसडर का. ये तारीफ़ है वुलर झील को बचाने और इसमें फेंके जाने वाले कचरे से अपने परिवार का गुजारा चलाने वाले बिलाल अहमद डार की.

बिलाल बीते पांच सालों से भारत प्रशासित कश्मीर की मशहूर वुलर झील से कूड़ा-करकट साफ़ करने का काम कर रहे हैं.

जिस कूड़े को बिलाल झील से साफ़ करते हैं, उसे बेचकर वे अपना और परिवार का पेट पालते हैं. इसकी कहानी उनके पिता की मौत के बाद शुरू होती है.

इंटरनेट के बिना कश्मीरियों का जीवन

अपने ही समाज में आज कहां खड़ी हैं कश्मीरी औरतें?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बिलाल पांच सालों से कश्मीर की मशहूर वुलर झील से कूड़ा-करकट साफ़ करने का काम कर रहे हैं

वुलर की सफ़ाई

सिर पर घर की ज़िम्मेदारियों का बोझ था, पढ़ाई बीच में अधूरी छोड़नी पड़ी, घर चलाने के लिए बिलाल परिवार को लेकर बांदीपुरा से श्रीनगर आ गए.

श्रीनगर में मज़दूरी करने के दौरान बिलाल को एक दिन वुलर को साफ करने का ख़्याल यूं ही आया.

वो बताते हैं, "जब मैं काम की तलाश में श्रीनगर गया था तो मैंने वहां कुछ ऐसे लोगों को देखा जो प्लास्टिक लाद के ले जाते थे. एक बार मैंने उनसे पूछा कि आप लोग इस प्लास्टिक का क्या करते हैं? उन्होंने कहा कि हम इसको बेचते हैं."

'कश्मीर की तरह मानवता को आज़ादी चाहिए'

कश्मीर में 'सैंडविच' बनने को मजबूर पत्रकार

इमेज कॉपीरइट Majid Jahangir

वापस बांदीपुरा में...

बिलाल आगे बताते हैं, "इतने में मैंने भी सोचा कि हमारे वुलर में भी काफ़ी गंदगी है, और क्यों न मैं भी उसको साफ़ करूं जिससे वुलर भी साफ़ होगा और मेरे परिवार की रोज़ी-रोटी भी चल सकती है. फ़िर मैं वापस बांदीपुरा आया और वुलर से प्लास्टिक और दूसरे क़िस्म की गंदगी को साफ़ करना शुरू कर दिया."

आठवीं क्लास तक पढ़ाई करने वाले बिलाल कश्मीर के बांदीपुरा ज़िले के विलोर घाट गांव के रहने वाले हैं.

बिलाल कहते हैं कि उनके दिल में ये बात कांटे की तरह चुभती थी कि उनका वुलर झील गंदा हो रहा है जिसको साफ़ करने की ज़रूरत है.

कश्मीर का इलाका जहां कोई वोट देने नहीं आया

इससे पहले कि कश्मीर में और ख़ून बहे...

इमेज कॉपीरइट Majid Jahangir

खाली हाथ भी रहना पड़ता है...

उन्होंने बताया, "हम जब छोटे थे तो वुलर झील का पानी पीते थे, लेकिन अब ये गंदा हो गया है. इसका पानी पीने से इंसान बीमार हो सकता है. कोई भी इसकी सफ़ाई की तरफ़ ध्यान नहीं दे रहा था. मैं तो बीते पांच वर्षों से इसकी सफ़ाई का काम कर रहा हूँ."

वो कहते हैं कि वुलर को साफ करने के काम में कभी पैसा मिलता भी है तो कभी कुछ भी नहीं.

बिलाल ने बताया, "दिन भर वुलर में जो कूड़ा-करकट साफ करता हूं, उससे कभी 250 रुपये की कमाई हो जाती है तो कभी सौ रुपये और कभी खाली हाथ भी रहना पड़ता है. जब कुछ नहीं कमाता हूं तो बर्दाश्त कर लेता हूं. फिर इस बात से तसल्ली हो जाती है कि चलो वुलर की सफ़ाई तो हो गई."

बर्फ़ की इमारतें खड़ी करने वाला कश्मीरी

मार्शल आर्ट में चैंपियन कश्मीरी बच्चे

इमेज कॉपीरइट Majid Jahangir

वुलर से रोज़गार

बिलाल कहते हैं कि वुलर की गंदगी ने ही उनके पिता की जान ली थी, "मेरे पिता भी इसी वुलर में काम करते थे. वुलर की गंदगी से उन्हें कैंसर हो गया. पिता की मौत के बाद मैंने तय किया मैं ही इसकी सफ़ाई करूंगा. मैं भी कभी-कभी बीमार हो जाता हूं, लेकिन फिर दवा के लिए पैसे नहीं होते हैं."

बिलाल के घर में माँ और उनकी दो बहनें हैं जिनकी ज़िम्मेदारी उनपर है. वह कहते हैं कि वुलर साफ़ होगा तो यहां सैलानी भी आएंगे और पीने के लिए साफ़ पानी भी मिलेगा.

वुलर झील से यहां के स्थानीय लोग अपना रोज़गार भी कमाते हैं. इसमें नदरो (एक तरह की स्थानीय सब्ज़ी) भी उगती है, लोग रेत भी निकालते हैं और मछलियां भी और मांझी अपनी किश्तियों से लोगों को एक किनारे से दूसरे किनारे तक ले जाते हैं.

झगड़े के बाद फ़ौजी ने चलाई गोली, अधिकारी की मौत

जन्नत की महिलाओं की आफ़त में ज़िंदगी

इमेज कॉपीरइट Majid Jahangir

बिलाल पर डॉक्यूमेंट्री

बिलाल के पड़ोसी इरशाद अहमद डार कहते हैं कि वो बीते पांच सालों से उन्हें वुलर की सफ़ाई का काम करते देखते आ रहे हैं. कश्मीरी फ़िल्मकार जलाल जिलानी ने बिलाल के संघर्ष को अपनी डॉक्यूमेंट्री में दुनिया को दिखाया है.

जलाल बताते हैं, ''वुलर का वजूद ख़तरे में हैं. साठ साल पहले वुलर 272 वर्ग किलोमीटर में फैला था, लेकिन अब ये सिकुड़कर 72 वर्ग किलोमीटर में रह गया है. मैंने जब बिलाल के अनोखे तरीके को देखा तो मेरी भी ज़िंदगी बदल गई.''

'धर्म कोई भी हो, कश्मीर में बहुत भाईचारा है'

पहले दुश्मन की हड्डी तोड़ूंगी फिर इलाज करूंगी- तजामुल

इमेज कॉपीरइट TAUSEEF MUSTAFA/AFP/Getty Images
Image caption वुलर झील में सिंघाड़ा (एक तरह का पानी फल) चुनती एक कश्मीर महिला

श्रीनगर नगर निगम के कमिश्नर डॉक्टर शफ़क़त ने बीबीसी को बताया कि उनकी काउंसिल ने बिलाल को श्रीनगर का ब्रैंड एम्बैसडर चुना है.

उन्होंने कहा, ''बिलाल ने हम सब की आंखें खोल दी हैं. एक तो उन्होंने वुलर को साफ किया है और उससे अपना घर भी चलाया है. इससे बढ़कर हमारे लिए कोई प्रेरणा नहीं हो सकती, ख़ासकर उन लोगों के लिए जो गंदगी फैलाते हैं."

'एक दिन कश्मीर में मुसलमान अल्पसंख्यक बन जाएंगे'

कश्मीर के हालात से असम का ग्रीन टी उद्योग ठप

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)