गुजरात में कांग्रेस विधायकों की परेड के बाद भी क्रॉस वोटिंग का ख़तरा

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8 अगस्त को राज्यसभा चुनाव के मतदान में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को जीत दिलाने के लिए बेंगलुरू में मीडिया के सामने 42 विधायकों की परेड के बाद भी गुजरात में कांग्रेस पार्टी की स्थिति डंवाडोल बनी हुई है.

यह पहली बार है जब शंकर सिंह वघेला के पार्टी से अलग होने के बाद बीजेपी का मुक़ाबला करने के लिए कांग्रेस ठोस संख्या बल के साथ सामने आई है.

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वाघेला के पार्टी छोड़ने के तुरंत बाद ही कांग्रेस के छह विधायकों ने भी इस्तीफ़ा सौंप दिया. इससे 182 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों की संख्या घट कर 176 हो गई है.

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अमित शाह, स्मृति ईरानी भी मैदान में

इसका मतलब यह है कि आठ अगस्त को होने वाले चुनाव में राज्यसभा पहुंचने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 44 वोटों की जरूरत होगी. चुनावी मैदान में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस के पूर्व मुख्य सचेतक बलवंत सिंह राजपूत शामिल हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने मीडिया को बताया, "हमें राज्यसभा में अहमद पटेल को पहुंचाने के लिए 44 वोट की जरूरत है, जबकि बीजेपी के छह विधायकों को इस्तीफ़े के लिए लुभाने के बाद भी हमारे पास 51 वोट हैं, और अब जो विधायक हैं वो इस्तीफ़ा देने नहीं जा रहे."

चलता रहा आरोप-प्रत्यारोप का दौर

गोहिल ने बीजेपी के आरोपों को भी सिरे से नकार दिया कि हाल की बारिश से उनके क्षेत्रों में आई बाढ़ के बावज़ूद विधायक वहां नहीं पहुंचे. उन्होंने कहा, 'हमारे विधायक अपने अपने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ही थे. वास्तव में, इन क्षेत्रों में कोई मंत्री नहीं पहुंचा.'

लेकिन, बीजेपी के आरोपों का असर भी पड़ा. अहमद पटेल ने अपने क्षेत्र के दौरे की तस्वीर ट्वीट की और लिखा 'आज उत्तरी गुजरात के कई बाढ़ राहत शिविरों का दौरा किया.

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उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, 'राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया बेहद धीमी है. अगर सरकार सक्रिय रहती तो नुकसान को कम किया जा सकता था.'

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उत्तरी गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की परवाह कौन करता है इस पर होते हुए आरोप प्रत्यारोपों का दौर गुजरात से कर्नाटक पहुंच गया. लेकिन, यहां भी मुख्य मुद्दा कांग्रेस का अपने विधायकों को बेंगलुरु से 50 किलोमीटर दूर बेंगलुरु-मैसूरू हाईवे पर स्थित रिसॉर्ट में ले जाना रहा.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, 'अपने राज्य में सभी तरह के दबावों को झेलने के बाद अभी विधायक आराम कर रहे हैं. इनमें से कुछ मंदिरों में पूजा के लिए जाना चाहते हैं तो कुछ आईटी कंपनी. हम अगले कुछ दिनों में ये व्यवस्था करेंगे. लेकिन, बीजेपी नेताओं और वाघेला के आरोपों के बाद की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस को अपने विधायकों पर पूरा यक़ीन नहीं था इसिलिए उन्हें बेंगलुरु ले जाना पड़ा.'

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राजनीतिक विशेषज्ञ वाघेला के आरोपों को व्यावहारिक रूप से इस तरह देखते हैं.

अहमदाबाद स्थित राजनीतिक टीकाकार धीमंत पुरोहित ने बीबीसी से कहा, "जिस तरह वघेला और उनके बाद छह विधायकों ने पार्टी छोड़ दी, कांग्रेस ने घबराहट में अपने विधायकों को बेंगलुरू पहुंचा दिया. उन्होंने मीडिया के सामने उनकी परेड भी कराई लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि चुनाव के समय कोई क्रॉस वोटिंग नहीं होगा."

साथ ही उन्होंने कहा,"लेकिन, वाघेला के कांग्रेस छोड़ने के बाद चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ गई है. और अगर सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ये चुनाव हार गए तो ये कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा."

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गुजरात कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा उनके विधायक तोड़ रही है

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