चीनी-भारतीय पेरेंट के 'गुनाह' की सज़ा काटती बच्ची

4 साल की चीनी लड़की हान रिउ होउ इमेज कॉपीरइट KERALA POLICE

दक्षिण भारत के केरल में एक चार साल की चीनी लड़की जेल प्रशासन और न्यायपालिका के लिए चिंता का सबब बन गई है.

दरअसल, चार साल की निर्दोष हान रिउ होउ अपने मां-बाप के कथित अपराध की शिकार बन गई है. होउ की मां जियाओलिन चीनी हैं, जबकि सौतेले पिता हफ़ीज़ अनज़ भारतीय.

चीन में मेडिकल की पढ़ाई के दौरान हफ़ीज़ और जियाओलिन के बीच प्यार हो गया. लगभग सात महीने पहले भारत लौटकर हफ़ीज़ कक्कानाड़ के एक अपार्टमेंट में रहने लगे.

वीज़ा खत्म होने के बाद भी भारत में रुकने के आरोप में पुलिस ने 19 जुलाई को जियाओलिन और उसके भाई सॉन्ग की होउ और हान रिउ होउ को अपने गिरफ़्त में ले लिया. लेकिन हफ़ीज़ पुलिस की गिरफ़्त से बच गए.

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कक्कानाड़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट (फ़र्स्ट क्लास) का मानना है कि रिश्तेदारों की गैरमौज़ूदगी में बच्ची कहीं और छोड़े जाने के लिए बहुत छोटी है. इसलिए उन्होंने बच्ची को मां के साथ ही रखने का आदेश दिया.

22 जुलाई को नए माहौल में आने के साथ ही हान रिउ होउ के लिए यह एक नई शुरुआत थी. उसे त्रिशूर ज़िले के वियूर सेंट्रल जेल में रखा गया.

मां-बेटी को जेल में चार अन्य महिला कैदियों के साथ रखा गया, ये सभी जेल की रसोई में काम करती हैं.

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बच्ची के लिए मुश्किल समय

जेल के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, "हम उसे लोकल रेस्टोरेंट से चाइनिज़ खाना देते हैं. उसे अंडा दिया जाता है जिसका वो केवल सफ़ेद भाग ही खाती है. उसे दिन में दो बार 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है."

अधिकारी ने बताया, "हान को साइकिल चलाने और खिलौनों से खेलने के लिए क्रेच भी भेजा गया था. लेकिन उसने वहां जाने से मना कर दिया क्योंकि वहां उसके साथ खेलने के लिए कोई और बच्चा नहीं था. इसलिए हमने उसे तस्वीरें बनाने के लिए क्रेयॉन दिया, जो वो अपनी मां के साथ बनाती है."

लेकिन अधिकारी के लिए चिंता का विषय है कि हान परेशान हो रही हैं क्योंकि उनकी मां के अलावा कोई और उसके साथ चीनी में बात नहीं कर सकता.

उनके वकील ने कोर्ट से अपील की है कि होउ को वियूर सेंट्रल जेल से 60 किलोमीटर दूर कक्कानाड़ जेल भेजा जाए ताकि उसे घर का बना चाइनीज़ फ़ूड मिल सके.

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होउ और हफ़ीज़ के वकील पीके सजीवन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "कोर्ट ने हमारी अपील से सहमति जताते हुए उन्हें कक्कानाड़ जेल भेजे जाने का आदेश दे दिया, लेकिन हम ज़मानत पर हाई कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार कर रहे हैं.'

हाई कोर्ट में जमानत की याचिका केरल के एक अन्य ज़िले में दर्ज मामले से संबंधित है, जहां यह पाया गया था कि मेडिकल वीज़े के लिए प्रस्तुत अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी प्रमाणपत्र से कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी.

सजीवन ने कहा, "वो दस्तावेज़ों के मामले में पहले से न्यायिक हिरासत में हैं और इसी बीच मेडिकल वीज़ा भी 1 जुलाई को समाप्त हो गया."

ज़मानत याचिका पर हाई कोर्ट के सामने सुनवाई या तो मंगलवार को या फिर कुछ दिनों बाद होगी.

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