लालू का नीतीश पर वार, कहा 'धोखा दे दिया'

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बिहार की राजनीति में छिड़े घमासान के बीच राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार पर ज़बरदस्त हमला बोला है.

नीतीश कुमार ने अपने हालिया भाषण में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ और महागठबंधन में सहयोगी रहे लालू यादव की आलोचना की थी.

नीतीश कुमार ने बीते हफ्ते महागठबंधन की सरकार से इस्तीफ़ा देकर बीजेपी के समर्थन से नई सरकार का गठन किया था.

पिछले दिनों लालू यादव के बेटों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार महागठबंधन में असहज हो गए थे और उन्होंने लालू यादव का साथ छोड़ दिया था.

उसके बाद लालू प्रसाद यादव ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "नरेंद्र मोदी की जयकारा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं, इन्होंने मोदी के विषय में क्या कहा था और मोदी ने इनके बारे में क्या कहा था. देश भर में निष्पक्ष लेख और मीडिया ख़त्म नहीं हुआ है और लेखक लिख रहे हैं कि ये किस चरित्र के आदमी हैं."

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'बाबरी मस्जिद विध्वंस में नीतीश कुमार की भूमिका'

लालू यादव ने नीतीश कुमार को बाबरी मस्जिद मामले से भी जोड़ा.

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लालू ने कहा, "मैं 1992 में पहले मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय एकता परिषद का सदस्य था, आडवाणी ने आश्वासन दिया था बाबरी मस्जिद को कुछ नहीं होने देंगे और जब बाबरी मस्जिद ध्वस्त हुई तो भारत के संविधान, भाईचारा, और एकता को बीजेपी-आरएसएस और बजरंग दल ने भंग किया. नीतीश कुमार की भूमिका सुन लीजिए- 1994 में बीजेपी का मुंबई में सम्मेलन हुआ. जॉर्ज फर्नांडिस के ब्रेन का ऑपरेशन हुआ था. रविराय, चंद्रजीत यादव, हेगड़े जी आदि नेता वहां गए. ये लोग समता पार्टी बना चुके थे. ये लोग इस सम्मेलन में गए. लेकिन आडवाणी नीतीश का ऐसे हाथ पकड़कर ले गए जैसे कन्या का हाथ दूल्हा पकड़ता है और आडवाणी ने नीतीश का हाथ पकड़कर उठाया. ये पलटीबाज़ और पलटूराम नेता हैं."

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'जब नीतीश हाथ जोड़कर आए'

लालू यादव ने आगे कहा, "नीतीश कुमार बोलो ये सच है कि नहीं तुमने कहा था कि हम लोग बूढ़े हो चले हैं, एक टर्म हमको दे दीजिए और अब लड़कों के लिए राजनीति करना है. ये हमारे लड़के की बलि चढ़ाना चाहते थे. जब हमने सपोर्ट दे दिया और जब हमारे बेटों के काम की सराहना होने लगी तो इनके कान खड़े हो गए, ये भूल गए कि इन्होंने एक टर्म मांगा था. ये तो अनंत टर्मों के चक्कर में थे."

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'नीतीश हमेशा सामंतों के बीच रहे'

लालू ने कहा कि बिहार की जनता जानती है कि पिछड़ा वर्ग, अकलियत और दलित को ताकत देने में उनका क्या योगदान है और ये भी कि नीतीश कुमार हमेशा सामंतों के बीच रहे हैं.

'नीतीश कुमार की हैसियत क्या है'

लालू ने नीतीश पर पलटवार करते हुए कहा, "नीतीश कहते हैं लालू यादव को मैंने अपना वोट ट्रांसफ़र किया. भूल जाते हो नीतीश कुमार कि तुम्हारी हैसियत क्या है. हम 77 में संसदीय चुनाव जीते थे. जेपी ने हमें टिकट दिया था. जब तुम छात्र नेता थे तो हम नेता बनाने की मशीन थे. दो-दो बार विधायका का चुनाव हारे. हरनौत से चुनाव हारे थे."

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'मुलायम के कहने पर नीतीश को बनाया नेता'

लालू यादव ने कहा है कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव के कहने पर नीतीश को नेतृत्व सौंपा था.

वे कहते हैं, "याद है नीतीश, तुमको हमेशा हम बचाए हैं. राज्यसभा के चुनाव में भी तुम्हारा कचूमर निकल जाता. मांझी जी को सीएम बनाकर तुम कूद-कूदकर बोले थे - "मैंने तो सेक्रिफ़ाइस कर दिया, मैंने तो महादलित को बनाया मुख्यमंत्री." तुम तो सोचे थे कि जीतन मांझी को कठपुतली सीएम बना दिया, लेकिन जब कुठपुतली चांव-चांव करने लगी तो तुम बीमार हो गए.

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार जब भी बीमारी का बहाना बनाएं तो समझना चाहिए कि वो कोई ख़तरनाक काम कर रहे हैं.

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