मज़दूर सीवर में उतरते गए और मरते गए...

Image caption सुरेंद्र ठाकुर, राजेंद्र भगत, फूल कुमार मंडल

सीवर सफ़ाई के दौरान ज़हरीली गैस से दम घुटने से हुई तीन मौतों के चश्मदीदों ने उन आखिरी पलों का ब्योरा दिया है.

दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में रविवार को दिल्ली जल बोर्ड के एक सीवर की सफ़ाई के दौरान हुए हादसे में सिर्फ़ एक व्यक्ति बच सका और वो अस्पताल में भर्ती है.

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सीवर के मैनहोल से महज़ 15 फ़ुट की दूरी पर सुरेंद्र ठाकुर बाल काटने का काम दशकों से कर रहे हैं.

सुरेंद्र ठाकुर की दुकान से ही सटी हुई एक चाय की दुकान है जिसके मालिक राजेंद्र भगत बचाव कार्य में मदद करने का दावा करते हैं.

हादसे के समय इन दुकानों पर फूल कुमार मंडल भी मौजूद थे.

सुरेंद्र ठाकुर

मैं उस समय अपने पड़ोसी दुकानदार की दाढ़ी बना रहा था और तभी चार मज़दूर सीवर में उतरने की तैयारी में जुटे थे.

दोपहर के साढ़े ग्यारह बजे होंगे. उन मज़दूरों ने कपड़े बाहर रखे और पहला सीवर में उतरा लेकिन बहुत देर तक नीचे से आवाज़ नहीं आई, शायद उसने वहीं दम तोड़ दिया होगा.

फिर एक दूसरा मज़दूर नीचे उतरा और वही हाल हुआ.

इस बीच बाहर बचे हुए दो मज़दूर तेज़ आवाज़ें लेकर उनके नाम पुकारते रहे और तीसरे ने सीवर में रस्सी फेंकी.

कोई जवाब न मिलने पर वो उसी रस्सी के सहारे नीचे उतरा और फिर ऊपर नहीं लौट सका.

आस-पास बुरी गंध फैल रही थी और साफ़ लग रहा था कि ये ज़हरीली गैस है जो सीवर से निकल रही थी.

चौथा मज़दूर परेशान होकर चिल्लाने लगा और जैसे ही उतरा गैसों के प्रभाव से कांपने लगा.

किसी तरह उसे तुरंत ऊपर खींचा गया और वो बेहोश हो चुका था.

राजेंद्र भगत

मैं बाथरूम होकर आया तो देखा ये लोग बनियान वगैरह उतार कर नीचे उतरने वाले थे.

पहले ने एक पतला सा पाईप पकड़ रखा था और जब वो उतरा तो शायद अंदाज़ा नहीं था कि सीवर कितना गहरा है.

हमें भी नहीं पता, शायद 20 या 30 फ़ुट गहरा हो, लेकिन पहले यहाँ एक पार्क होता था.

दूसरा मज़दूर भी रस्सी लेकर उतरा था लेकिन वापस नहीं लौटा और तीसरे का भी यही हाल हुआ.

मैंने थोड़ी दूर से झाँका तो छोटा सी सीढ़ियां दिखीं बस. इस बीच आस-पास भीड़ जमा हो गई थी. पुलिस भी पहुंची.

पुलिस वालों ने चौथे मज़दूर के पेट में रस्सियां बाँधी और उसे नीचे उतारा.

लेकिन तीन-चार फ़ुट नीचे जाने पर ही वो चिल्ला कर कांपने लगा और उसे तुरंत बाहर निकाला गया.

बाद में बड़ी गाड़ियां आईं और लाशों को नीचे से निकाला गया.

हैरानी ये है कि इतने दशकों में कभी इस सीवर की सफ़ाई होते नहीं देखी.

फूल कुमार मंडल

जब पहला आदमी नीचे जाकर गिरने लगा था तब वो चिल्लाने लगा था.

हम लोगों ने दूसरे और तीसरे मज़दूर से बहुत कहा कि बिना सुरक्षा के नीचे मत जाओ लेकिन वे नहीं माने.

हम लोग आधे घंटे तक यहीं मौजूद थे फिर पुलिस ने आकर हम लोगों को हटा दिया.

इसके बाद लाशें तभी निकल सकीं जब फ़ायर ब्रिगेड पहुंची.

इधर, दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक़ सीवर की गहराई 15 फ़ुट से ज़्यादा थी लेकिन रविवार को सफ़ाई के आदेश किसी को भी नहीं दिए गए थे.

डीजेबी के मुख्य अभियंता आरएस नेगी ने बीबीसी से कहा, "सीवर की सफ़ाई के लिए हमसे कोई आज्ञा नहीं ली गई".

उन्होंने बताया, "मेरे विभाग ने बताया है कि वो उस ठेकेदार को भी नहीं जानते और न ही उसे डीजेबी ने सफ़ाई का कोई ठेका दिया है. पुलिस जांच जारी है और हम लोग भी मामले की जांच करेंगे".

बहराल, हाल-फिलहाल में ये पहला मामला नहीं है जब सीवर की सफ़ाई में लोगों की जान गई हो.

पिछले महीने दक्षिणी दिल्ली में एक ऐसा हादसा हुआ था जिसमें तीन लोग हताहत हुए थे.

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