नज़रिया- 'बेटी बचाने की बात करने वाले किसे बचा रहे हैं?'

चंडीगढ़ छेड़छाड़ मामला इमेज कॉपीरइट Facebook/BBC

चंडीगढ़ में बीते दिनों हरियाणा बीजेपी प्रमुख सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पर एक महिला के साथ छेड़खानी का आरोप लगा है. हरियाणा बीजेपी उपाध्यक्ष रामवीर भट्टी ने एक चैनल से कहा, ''लड़की को रात 12 बजे के बाद बाहर नहीं निकलना चाहिए था.''

दरअसल, हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला समेत दो लोगों को एक लड़की से छेड़छाड़ करने के आरोप में शनिवार को चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था. हालांकि, बाद में दोनों को जमानत पर छोड़ दिया गया.

आरोप लगाने वाली लड़की एक आईएएस अधिकारी की बेटी है. पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर आरोपियों की कार जब्त कर ली थी. मामले को लेकर लड़की ने शनिवार को कोर्ट में बयान दर्ज कराया था.

इस मामले में बीजेपी का रवैया अजीब सा है. पार्टी पूरी तरह से बेनकाब हो गई है. मुख्यमंत्री कहते हैं कि इसका उनके प्रदेश अध्यक्ष से कोई लेना-देना नहीं है, ये व्यक्ति विशेष से जुड़ा मामला है और कानून अपना काम करेगा.

जो पार्टी 'बेटी बचाने' की बात करती हो उसमें से हरियाणा बीजेपी का कोई भी नेता इस मुद्दे पर बोला है? सिर्फ़, राजकुमार सैनी ने बयान दिया हैं.

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इस घटना की निंदा करने की जगह ये लोग इस तरह के बेवकूफ़ी से भरे तर्कों के साथ आ रहे हैं कि रात को वो क्या कर रही थी. पीड़िता के ख़िलाफ़ ऑनलाइन मीडिया पर कैंपेन चलाया गया. उसका चरित्र हनन करने की कोशिश की गई. कहीं से तस्वीर उठाकर बताया गया कि वो बराला को जानती है.

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ये तस्वीर भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने पोस्ट की थी. और, ये पार्टी का असली चरित्र बताता है कि ये लोग लड़के को बचाने के लिए भरसक कोशिश कर रहे थे. इन्हें इस बात से फर्क़ भी नहीं पड़ता कि उस लड़की के साथ क्या हुआ.

हरियाणा में बीजेपी की इमेज पर असर

हरियाणा में बीजेपी की इमेज पर इस मामले का असर पड़ेगा. ये तर्क माना जा सकता है कि विकास बराला वयस्क हैं और सुभाष बराला का इससे कोई संबंध नहीं है. लेकिन बीजेपी का इस मामले पर स्टैंड क्या रहा है?

क्या एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस मामले की निंदा की.

चंडीगढ़ के प्रवक्ता ने इस मामले की निंदा की, लेकिन उन्हें भी ऐसा करने में दो दिनों का वक्त क्यों लगा.

और, विकास की जमानत बीजेपी वालों ने कराई और ये लोग उसके साथ एकजुटता दिखाते हुए थाने तक भी गए. इससे निश्चित रूप से पार्टी की इमेज पर असर पड़ेगा.

आखिर क्यों हो रहा है राजनीतिकरण?

ये एक साधारण सा मामला है. नशे की हालत में दो युवा लड़कों ने शायद सोचा कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

इन लड़कों ने बीच सड़क पर एक महिला को रोकने की कोशिश की. उसकी गाड़ी रोककर उसकी गाड़ी में घूंसे मारे. वे क्या करने की कोशिश कर रहे थे.

'मैं अगर गाड़ी रोकती तो शायद बच नहीं पाती'

हरियाणा बीजेपी के एक भी नेता ने खुलकर निंदा नहीं की है और बीजेपी अगर सच में महिलाओं का सम्मान करती है तो उसे खुलकर निंदा करनी चाहिए.

लेकिन इसकी जगह नेता महिला को डिफेम कर रहे हैं. पूछ रहे हैं कि महिला रात में वहां क्या कर रही थी. ये क्यों नहीं पूछ रहे कि ये दोनों लड़के वहां क्या कर रहे थे.

क्या बीजेपी पर बन रहा है राजनीतिक दवाब

मीडिया का रोल विपक्ष से ज्यादा अहम है. हर पार्टी में इस तरह के लोग होते हैं. विनोद शर्मा के बेटे द्वारा मॉडल को मारने का मामला था क्योंकि उसे शराब नहीं परोसी गई थी. राजनीतिक लोग बस राजनीतिक नफे-नुकसान देखते हैं.

इसकी जगह जिस तरह मीडिया इस पूरे मामले को देख रही है. मुझे लगता है इससे ज्यादा असर पड़ेगा.

बराला के साथ क्या हुआ और क्या नहीं हुआ ये बेकार की बात है लड़की को न्याय मिलना चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता खुशबू संधू से बातचीत पर आधारित)

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