ये सिर्फ़ मेरी जीत नहीं, पैसे और ताकत की हार भी है: अहमद पटेल

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Image caption कांग्रेस नेता अहमद पटेल

गुजरात राज्यसभा चुनावों में भारी उठापटक के बाद अहमद पटेल आख़िरकार अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे. उनके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी चुनाव जीत गए. अहमद पटेल को 44 वोट मिले जबकि स्मृति ईरानी को 46 और अमित शाह को भी 46 वोट मिले. चौथे उम्मीदवार बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले.

क्रॉस वोटिंग की वजह से अहमद पटेल के जीतने पर संशय था. लेकिन फिर कांग्रेस की मांग मानते हुए चुनाव आयोग ने दो बागी कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द कर दिए और भाजपा का गणित बिगड़ गया.

कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग करने वाले अपनी ही पार्टी के दो विधायकों राघवजी पटेल और भोला गोहिल के वोट रद्द करने की मांग की थी क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने अपने मतपत्र अनाधिकारिक लोगों को दिखा दिए थे.

शाम 5 बजे ही गिनती शुरू होनी थी, लेकिन कांग्रेस की शिकायत के बाद गिनती रोक दी गई थी. देर रात वोटों की गिनती शुरू हुई और 174 वोटों को वैध माना गया.

नतीजों के बाद अहमद पटेल ने ट्विटर पर 'सत्यमेव जयते' लिखते हुए अपनी जीत का एलान किया. उन्होंने लिखा, 'यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है. यह पैसे, ताक़त और राज्य की मशीनरी के खुले इस्तेमाल की हार है. मैं उस प्रत्येक विधायक को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने भाजपा की अभूतपूर्व धमकियों और डर के बावजूद मुझे वोट दिया. भाजपा ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक आतंक को ही उजागर किया है. गुजरात के लोग चुनाव में उन्हें जवाब देंगे.'

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दो वोटों की वजह से फंसा था पेंच

कांग्रेस का आरोप था कि उनकी ही पार्टी के विधायक राघवजी पटेल और भोला गोहिल ने वोट डालने के बाद अपने बैलट आधिकारिक पार्टी प्रतिनिधि के अलावा भाजपा प्रतिनिधि को भी दिखाए थे.

नियमों के मुताबिक, वोट करने वाले विधायकों को अपने बैलट सिर्फ़ अपनी पार्टी के आधिकारिक प्रतिनिधि (चुनाव एजेंट) को दिखाने होते हैं.

देर रात 11:40 पर कांग्रेस नेता अर्जुन मोडवाडिया ने दोनों के वोट रद्द होने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि जब दोनों विधायकों ने वोट दिया तो कांग्रेस के चुनाव प्रतिनिधि शक्तिसिंह गोहिल ने उसी समय खड़े होकर आपत्ति दर्ज कराई थी.

उन्होंने कहा, ''उस समय अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की. दोनों वोट बैलट बॉक्स में डाल दिए गए. लेकिन तभी रिटर्निंग अफ़सर ने आश्वासन दिया था कि वीडियो देखकर फ़ैसला करेंगे.''

वीडियो सार्वजनिक किया जाए: भाजपा

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर मतदान का वीडियो सार्वजनिक किया जाए तो सबको पता चल जाएगा कि वोट रद्द करने का फ़ैसला ग़लत है. उन्होंने वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की और यह भी कहा कि इससे नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और भाजपा तीनों सीटें जीतेगी.

उन्होंने कहा, ''वीडियो में हमारे चुनाव प्रतिनिधि दिख ही नहीं रहे हैं और दोनों विधायकों का वोट शक्तिसिंह गोहिल के अलावा किसी ने नहीं देखा है, बल्कि नियम का उल्लंघन शक्तिसिंह गोहिल ने किया, जब उन्होंने देखा कि राघवजी पटेल ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ वोट दिया है तो वो गुस्से में खड़े हो गए और मतपत्र छीनने की कोशिश की.''

'वाघेला खेमे' के दोनों विधायक

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Image caption शंकर सिंह वाघेला ने हाल ही में छोड़ी है कांग्रेस

दोनों विधायक शंकर सिंह वाघेला खेमे के माने जाते हैं जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़ी है. वाघेला ने मंगलवार सुबह समाचार चैनलों से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने कांग्रेस को वोट नहीं दिया है क्योंकि अहमद पटेल चुनाव हार रहे हैं और वो अपना वोट ख़राब करना नहीं चाहते.

दोनों पार्टियों के बड़े नेता पहुंचे थे चुनाव आयोग

मंगलवार को मतदान के बाद पहले कांग्रेस शिकायत लेकर चुनाव आयोग गई और उसकी आपत्ति के ख़िलाफ वरिष्ठ भाजपा नेताओं का समूह भी आयोग पहुंच गया. दोनों पार्टियां दिन भर में तीन-तीन बार चुनाव आयोग पहुंचीं. कांग्रेस की तरफ़ से पी चिदंबरम, रणदीप सुरजेवाला और अशोक गहलोत ने चुनाव आयोग में अपनी शिकायत दी.

भाजपा की तरफ़ से अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण समेत छह केंद्रीय मंत्रियों ने चुनाव आयोग पहुंचकर कांग्रेस की शिकायत को बेबुनियाद करार दिया.

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गुजरात से राज्यसभा चुनावों की तीन सीटें हैं और चार उम्मीदवार खड़े थे. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत की राह आसान मानी जा रही थी, लेकिन तीसरी सीट के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सलाहकार और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. उनका मुक़ाबला हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए बलवंत सिंह राजपूत से था.

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हाल ही में छह कांग्रेस विधायकों के पार्टी छोड़ने से यह चुनाव कांटे का हो गया था. इन छह में से तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे. इसके बाद कांग्रेस विधायकों को प्रभावित किए जाने से बचाने के लिए पार्टी ने उन्हें बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भेज दिया था. मतदान से एक दिन पहले ही उन्हें एक साथ अहमदाबाद लाया गया.

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