सोनिया गांधी का अप्रत्यक्ष रूप में संघ पर निशाना

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है.

लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भाषण दिया.

पीएम मोदी ने कहा, ''ये बहुत ज़रूरी है कि देश के युवा भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी रखें. देश के आंदोलन में इसकी काफ़ी अहमियत थी. अंग्रेज़ों ने इसकी कल्पना नहीं की थी.''

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पीएम मोदी के बाद सोनिया गांधी ने अपने भाषण में बिना नाम लिए संघ पर निशाना साधते हुए कहा, ''भारत छोड़ो आंदोलन हमारी आज़ादी की लड़ाई में क्रांतिकारी परिवर्तन की मिसाल बन गया. लेकिन इसके लिए हमें अनगिनत कुर्बानियां देनी पड़ीं.''

''आज यही कुर्बानियां हमें मौका देती हैं कि हम उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें याद करें. आज जब हम इन शहीदों को नमन कर रहे हैं, हमें नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में ऐसे संगठन और लोग भी थे, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था. उन तत्वों का भारत को आज़ादी दिलाने में कोई योगदान नहीं रहा.''

संघ का विरोध करने वाले लोगों का अक्सर ये आरोप रहता है कि आज़ादी की लड़ाई में आरएसएस ने अंग्रेज़ों का साथ दिया था.

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और क्या बोलीं सोनिया गांधी?

  • अंग्रेज़ों का आदेश न मानने वालों पर कोड़े बरसाए गए. सत्याग्रहियों को डराने और धमकाने की कोशिश में पुलिस द्वारा महिलाओं का उत्पीड़न किया.
  • मुझे लगता है कि अब जब हम भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. लेकिन अब कुछ आंशकाएं भी हैं. ये एहसास बढ़ रहा है कि अंधकार की शक्तियां हमारे बीच फिर तेजी से उभर रही हैं.
  • क्या जहां आज़ादी का माहौल था, वहां भय नहीं फैल रहा. क्या जनतंत्र की इस बुनियाद को नष्ट करने की कोशिश नहीं हो रही. जो विचारों की आज़ादी, समाजिक न्याय, स्वेच्छा की आज़ादी पर आधारित है.
  • ऐसा लगता है कि सेक्यूलर और उदारवादी मूल्य ख़तरे में पड़ते नज़र आ रहे हैं. पब्लिक स्पेस में असहमति और विचारों की गुंजाइश कम होती जा रही है.
  • क़ानून के राज में भी गैर-क़ानूनी शक्तियां हावी दिखाई देती हैं.
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पीएम मोदी ने क्या कहा?

  • 2017 से लेकर 2022 तक जब आज़ाद भारत अपने 75 साल पूरे करने की ओर बढ़ रहा है, तब 1942 से लेकर 1947 जैसे जज़्बे को बनाए रखने की ज़रूरत है.
  • 1942 में 'करो या मरो' का नारा था. आज 'करेंगे और करके रहेंगे' का नारा है. ये पांच साल हमारे 'संकल्प से सिद्धि' के साल होंगे.
  • आज हमारे पास न गांधी हैं न ही गांधी जैसा नेतृत्व नहीं है. लेकिन हमारे पास 125 करोड़ लोगों का विश्वास है कि हम साथ मिलकर कर सकते हैं. आज़ादी के लिए लड़ने वालों के हम सपने महसूस कर सकते हैं.

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