छत्तीसगढ़ में आदिवासी छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने वाला जवान हुआ गिरफ़्तार

छत्तीसगढ़ इमेज कॉपीरइट CG KHABAR

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा में आदिवासी लड़कियों से छेड़खानी करने वाले केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के एक जवान को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

बस्तर के पुलिस उप महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बीबीसी को बताया कि छेड़खानी के मामले में पीड़ित लड़कियों ने दो जवानों की पहचान की थी, जिसके बाद सीआरपीएफ के एक जवान शमीम अहमद को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि घटना के बाद छुट्टी पर चले गये दूसरे जवान नीरज कांडवाल की गिरफ़्तारी के लिये टीम रवाना की जा रही है.

'आदिवासी महिला के साथ हिरासत में प्रताड़ना'

बीती 31 जुलाई को पालनार के आदिवासी लड़कियों के छात्रावास में एक निजी टीवी चैनल ने रक्षाबंधन पर एक आयोजन किया था.

इमेज कॉपीरइट CG KHABAR

इसमें ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों समेत सीआरपीएफ की अलग-अलग बटालियनों के लगभग सौ जवानों को बुलाकर उन्हें राखी बांधी गई थी.

'लड़कियों के साथ मनमानी'

छात्रावास की आदिवासी लड़कियों का आरोप है कि आयोजन के दौरान जब कुछ लड़कियां शौचालय के लिये बाथरूम गईं तो सीआरपीएफ के कुछ जवानों ने उनके साथ छेड़छाड़ की.

छात्राओं का कहना है कि उन्हें बाथरूम में बंद कर उनके साथ बदसलूकी की और 16 से अधिक लड़कियों के साथ जवान घंटों तक मनमानी करते रहे.

दो साल के बच्चे को 200 रुपए में बेचने का आरोप

आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के मामले में नोटिस

लड़कियों ने इस मामले में छात्रावास कर्मचारी और अधीक्षिका से शिकायत की.

इसके बाद 1 अगस्त को ज़िले के कलेक्टर और एसपी भी मौके पर पहुंचे. लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने जब सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर जानकारी दी और आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी सामने आईं तब कहीं जाकर 7 अगस्त को मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता और पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज़ किया गया.

एफ़आईआर दर्ज होने में लगे 8 दिन

पालनार में स्थित आदिवासी छात्रावास ज़िला मुख्यालय से महज़ 36 किलोमीटर की दूरी पर है.

अभी कुछ महीने पहले ही पालनार गांव को देश का पहला ऑनलाइन लेन-देन करने वाले गांव के बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़िले के कलेक्टर को सम्मानित किया था.

राज्य सरकार ने भी पालनार को सूचना और तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करने वाले गांव के तौर पर प्रचारित किया था.

इमेज कॉपीरइट CG KHABAR

लेकिन नाबालिग आदिवासी लड़कियों से छेड़छाड़ के इस मामले में एफआईआर दर्ज़ किये जाने में आठ दिन लगने पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई सवाल खड़े किये हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी का कहना है कि सोशल मीडिया में यह मुद्दा नहीं उठता तो सरकार इस मामले को भी रफा-दफा कर देती.

सोनी सोरी ने कहा, "तीसरी से दसवीं-ग्यारहवीं तक की आदिवासी लड़कियों से छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश के इस मामले को दबाने में सप्ताह भर तक सरकार और उसके अधिकारी जुटे रहे. मुझे नहीं लगता कि गिरफ़्तारी के बाद भी कोई कार्रवाई होगी. लगभग साल भर में चुनाव होने वाले हैं, इसलिये सरकार ने बदनामी के डर से कार्रवाई की है."

बस्तर में सुरक्षाबलों द्वारा आदिवासियों के साथ छेड़छाड़, दुष्कर्म और उनकी हत्या के आरोप नये नहीं है.

आदिवासी नेता सोनी सोरी की नक्सली सांठगांठ के आरोप में गिरफ़्तारी के बाद उनकी योनी में कथित रूप से पुलिसकर्मियों द्वारा पत्थर के टुकड़े डालने संबंधी मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक में पेश हुई थी.

इसी साल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुरक्षाबलों द्वारा बड़ी संख्या में आदिवासी लड़कियों के साथ बलात्कार के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था.

बस्तर में आदिवासियों के मानवाधिकारों का उल्लंघन

नवंबर 2015 में बीजापुर के पांच गांवों में और जनवरी 2016 में बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा ज़िलों में सुरक्षाबलों द्वारा बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार की ख़बरें सामने आई थीं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इससे संबंधित शिकायतों के बाद खुद ही अपने अन्वेषण और विधि विभाग के एक जांच दल को मौके पर जाकर जांच के निर्देश दिए थे, जिसने आरोपों को सही पाया था.

इमेज कॉपीरइट CG KHABAR

इसके बाद आयोग ने आठ बलात्कार पीड़िताओं को 3-3 लाख रुपये, 6 यौन प्रताड़ित महिलाओं को 2-2 लाख रुपये और शारीरिक प्रताड़ना की शिकार दो महिलाओं को अंतरिम आर्थिक सहायता के रुप में 50-50 हज़ार रुपये दिये जाने की अनुशंसा संबंधी नोटिस राज्य सरकार को दिया था.

आयोग का कहना था कि वह केवल 16 महिलाओं का ही बयान ले पाई, जबकि इस मामले में पीड़ित 20 महिलाओं के बयान राज्य सरकार को लेने के निर्देश भी आयोग ने जारी किये थे.

आदिवासी लड़कियों के साथ सुरक्षाबलों के बलात्कार और छेड़छाड़ के कई मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं, कुछ थानों की फ़ाइलों में और कुछ मामले तो कई-कई आवेदनों के बाद भी आज तक एफआईआर में तब्दील नहीं हो पाए हैं.

इसी सप्ताह संयुक्त राष्ट्र संघ में आदिवासी मामलों के उपाध्यक्ष फुलमान चौधरी ने भी बस्तर का दौरा करने के बाद आरोप लगाया है कि कि बस्तर में आदिवासियों के मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है, संविधान का उल्लंघन हो रहा है.

चौधरी कहते हैं- "झारखंड और छत्तीसगढ़ में, खास कर बस्तर में मानवाधिकार की स्थिति ख़राब है. भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं, आदिवासियों से जुड़े उन मुद्दों को लेकर भारत सरकार को और गंभीर होना चाहिये."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे