प्रेस रिव्यू- ताजमहल मक़बरा या प्राचीन शिव मंदिर?

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सूचना आयोग ने सरकार से पूछा है कि ताजमहल शाहजहां का बनवाया हुआ मकबरा है या राजपूत राजा की ओर से मुग़ल बादशाह को तोहफ़े में दिया गया प्राचीन शिव मंदिर.

इतिहास का ये सवाल सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष पहुंचा और अब सूचना आयोग ने भारत के संस्कृति मंत्रालय से इस संबंध में जवाब मांगा है.

इस मामले में देश भर की कई अदालतों में याचिका भी दाखिल की गई है. सुप्रीम कोर्ट में भी इसे लेकर याचिका दायर की गई थी जिसे ख़ारिज कर दिया गया था.

हालांकि इससे जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं. हाल ही में सूचना आयुक्त श्रीधर अचार्युलु ने अपने एक आदेश में कहा था कि मंत्रालय को ताजमहल से जुड़ी सभी शंकाओं को ख़त्म कर देना चाहिए.

ताजमहल के प्राचीन शिव मंदिर होने का दावा हिंदुवादी इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश के लेखन को आधार बनाकर किया जाता है. अचार्युलु ने कहा कि कई मुक़दमों में भारतीय पुरातत्व विभाग भी पक्षकार है.

'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया'की एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने घरों में बीफ़ रखने को अपराध घोषित करने वाले क़ानून को फिर से लागू करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है.

पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीफ़ पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के बाद महाराष्ट्र पशु संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 1995 की धारा 5डी को ख़त्म कर दिया था. इस धारा को मार्च 2015 में राष्ट्रपति ने अनुमति दी थी.

इस प्रावधान के तहत कोई भी पुलिस अधिकारी बीफ़ होने के शक़ में किसी भी व्यक्ति को रोककर तलाशी ले सकता है. ये अधिनियम पुलिस को घरों में घुसकर तलाशी लेने का अधिकार भी देता है. महाराष्ट्र में 1976 में गोहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

'द इंडियन एक्सप्रेस'की एक रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के एक राष्ट्रीय खिलाड़ी की झारखंड राज्य कुश्ती संघ के दफ्तर में करंट लगने से मौत हो गई. 22 वर्षीय विशाल कुमार वर्मा राजधानी रांची में बाढ़ के पानी में घिरे कुश्ती संघ के दफ़्तर से पानी निकालने गए थे जब उन्हें करंट लग गया. अधिकारियों का कहना है कि जिस इमारत में कुश्ती संघ का दफ़्तर है उसे ख़तरनाक माना गया था और वहां लगा बिजली कनेक्शन अवैध था.

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Image caption हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला अपने बेटे के छेड़खानी के मामले में फंसने के बाद से सुर्खियों में हैं.

'द टाइम्स ऑफ़ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक विकास बराला चंडीगढ़ में जिस मकान में रह रहे थे वह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक सलाहकार दीपक मांगला के लिए आवंटित है.

रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ के थाने में दर्ज एफ़आईआर में विकास बराला का पता सेक्टर सात का घर नंबर 74 है. एक हज़ार वर्गमीटर का ये मकान विकास बराला के पिता सुभाष बराला के नाम पर आवंटित नहीं है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्टर 7 के 8 घर मंत्रियों के लिए आवंटित हैं और इनमें सिर्फ़ हरियाणा सरकार के मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ही रह सकते हैं.

अख़बार ने अपने सूत्रों के हवाले से कहा है कि मुख्यमंत्री अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके भी इन्हें किसी विधायक या पार्टी के मुखिया को आवंटित नहीं कर सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बराला काफी समय से इस मकान में रह रहे हैं. उन्हें एक विधायक फ्लैट भी आवंटित किया गया है.

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