एआईडीएमके में सुलह क्यों कराना चाहते हैं मोदी?

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भाजपा की कोशिशों से एआईएडीएमके के दोनों गुटों में विलय के आसार बन रहे हैं.

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीस्वामी भी शामिल हुए. इसके बाद उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात हुई.

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम और ई पलानीस्वामी के बीच गतिरोध टूट सकता है.

मौजूदा स्थिति और भविष्य के संकेतों पर बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र ने वरिष्ठ पत्रकार टीआर रामचंद्रन से बात की.पढ़िए टीआर रामचंद्रन की राय.

सबको मालूम था कि भाजपा चाहती है कि एआईडीएमके के दोनों गुट एक हो जाएं और उनसे वह तमिलनाडु में गठबंधन कर ले. महीनों से ऐसी कोशिश है.

अब जाकर ऐसा लग रहा है कि जयललिता के देहांत के बाद जो फूट एआईडीएमके में पड़ी थी, दोनों दलों में विलय होने की संभावना है, लेकिन कुछ अड़चनें अब भी हैं.

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भाजपा की दिलचस्पी

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Image caption ई पलानीस्वामी

दक्षिण भारत में सिर्फ कर्नाटक में ही भाजपा की सरकार रही है. बाकी प्रदेशों में पार्टी की कोई ख़ास पकड़ नहीं है. तमिलनाडु में एक ज़माने में कांग्रेस एक अहम पार्टी थी. लेकिन इस वक़्त कांग्रेस वहां डीएमके के साथ है.

एआईएडीएमके के भीतर ऐसी स्थिति है कि जयललिता का ताज चाहने वालीं शशिकला जेल में हैं. उनको पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम दोनों बाहर रखना चाहते हैं.

साथ आने में कई दिक्कतें थीं क्योंकि पनीरसेल्वम कह रहे थे कि वो किसी साधारण पद पर वापस नहीं आएंगे. उनको इस विलय से कुछ न कुछ तो मिलना चाहिए.

मेरे ख़्याल में अब तय ये हुआ है कि वो अब पार्टी का सबसे अहम महासचिव पद संभालेंगे. लेकिन इस पर अभी बातचीत चल ही रही है.

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जयललिता की मौत की जांच

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Image caption पनीरसेल्वम

जयललिता की मौत की सही जांच कराना भी पहले दोनों गुटों के बीच एक मसला था. लेकिन अब एक समझ बनी है कि दोनों पक्ष चाहते हैं कि जयललिता की मौत की सीबीआई जांच हो.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इससे असहमत नहीं है. लेकिन बाक़ी चीज़ें जब तक अपनी जगह पर ठीक नहीं हो जातीं, तब तक इस पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा.

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पर पलानीस्वामी की प्रधानमंत्री से 20 मिनट की मुलाक़ात से लगता यही है कि कुछ फाइनल किए जाने की ओर बढ़ रहे हैं. ख़बर ये भी है कि पनीरसेल्वम भी प्रधानमंत्री से मिलने वाले थे. अगर वो मिल लें तो मान लीजिए कि विलय तो लगभग तय ही है.

अभी तो ऐसा ही लगता है कि निकट भविष्य में एआईडीएमके एनडीए में शामिल हो सकती है. लेकिन तमिलनाडु की राजनीति पर कुछ भी पुख़्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता.

एआईएडीएमके में अभी दो ही गुट दिख रहे हैं, लेकिन कई गुट हैं. अगर ये दोनों गुट शशिकला और दिनाकरण को छोड़कर अपने आप में मजबूत बन जाते हैं तो ठीक है. पर अभी मेरे ख़्याल में जल्दबाज़ी में कुछ कहना ठीक नहीं होगा.

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