गोरखपुर त्रासदी: गैस सप्लायर की भूमिका की जांच होगी

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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 30 बच्चों की मौत पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सफ़ाई दी है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के साथ लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी पूरी संवेदना उन सभी परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं. उन्होंने अस्पताल के अलग-अलग विभागों में भर्ती बच्चों की मौत के आंकड़े बताए.

उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को 23 मौतें हुई हैं और हम तथ्यों को सही रूप में पेश करें तो मानवता की बड़ी सेवा होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही यह ख़बर सामने आई थी, सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे. वह रिपोर्ट आने वाली है.

उन्होंने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी से मौत का मतलब जघन्य कृत्य है. कोई दोषी पाया जाता है तो किसी को बख़्शा नहीं जाएगा.'

पिछली सरकार में सप्लायर को मिला कॉन्ट्रैक्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गठन होने के साथ ही सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इमरजेंसी सेवाओं में कोई व्यवधान न आए. कोई फाइल किसी मेज़ पर तीन दिन से ज़्यादा न रुके. दवा या आवश्यक सुविधाओं के लिए किसी स्तर से धन की कमी न होने पाए.

उन्होंने कहा, 'गैस सिलेंडर सप्लायर की भूमिका की जांच के लिए मुख्य सचिव की अगुवाई में जांच समिति बनाई गई है जो हफ़्ते भर में रिपोर्ट देगी. इस सप्लायर को पिछली सरकार ने 2014 में उन्हें आठ वर्ष के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया है.'

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 अगस्त को उस अस्पताल मैं इसीलिए गया था कि इंसेफ्लाइटिस से निपटने के इंतज़ाम किए जाने के बावजूद कहीं कहीं ऐसा तो नहीं कि मरीज़ भर्ती न किए जा रहे हों. वहां तीन घंटे अधिकारियों के साथ बैठक ली थी. लेकिन ऑक्सीज़न की कमी पर कोई बात उनके संज्ञान नहीं लाई गई.

उन्होंने कहा, 'पूरा पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कुल 34 ज़िले हैं, जहां इन्सेफ्लाइटिस इस सीजन में उभरता है. 9 जुलाई को मैं गया था तो ये व्यवस्था सुनिश्चित की थी इसके उपचार की व्यवस्था हो और इसके लिए बेड आरक्षित हों. '

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इससे पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने गोरखपुर में अस्पताल का दौरा किया. इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल में गैस सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित ज़रूर हुई थी, लेकिन बच्चों की मौत इस वजह से नहीं हुई.

इस बीच प्रधानमंत्री के दफ़्तर से ट्वीट किया गया कि प्रधानमंत्री लगातार इस घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए हैं. वह केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के भी संपर्क में हैं.

पीएमओ ने यह भी ट्वीट किया है कि केंद्रीय स्वास्थ राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और स्वास्थ्य सचिव गोरखपुर की घटना पर नज़र रखे हुए हैं.

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प्रदेश सरकार ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है. इसकी वजह पूछे जाने पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, 'कुछ तो वजह ही होगी तभी उन्हें निलंबित किया गया है.'

उधर निलंबित प्रिंसिपल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने निलंबन से पहले ही घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा लिख लिया था. उन्होंने कहा है कि उनकी कोई ग़लती नहीं है. उन्होंने भी कहा है कि कोई भी मौत ऑक्सीज़न की कमी से नहीं हुई है.

आशुतोष टंडन ने बताया कि प्रधान सचिव की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय जांच की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कार्रवाई की जाएगी.

गोरखपुर में दोनों मंत्रियों की प्रेस कांफ्रेंस की पांच बातें-

1.

'अगस्त के महीने में यहां हर साल बच्चों की मौतें हुई हैं. अगस्त 2014 में यहां 567, अगस्त 2015 में 668 और 2016 में 587 मौतें हुई थीं. यानी हर रोज़ मौतों का आंकड़ा तीनों सालों में क्रमश: 18, 21.5 और 18.9 है.'

2.

'यहां गोरखपुर के अलावा दूर-दूर से, बिहार और नेपाल से भी मरीज़ आते हैं. किसी भी मेडिकल कॉलेज में गांव के लोग आख़िरी स्टेज में ही बच्चों को इलाज़ के लिए लेकर आते हैं.'

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3.

'गैस सप्लाई बाधित होने का विषय आ रहा था. हमने जांच शुरू की तो रिकॉर्ड्स में देखा कि बच्चों की मौत किस कारण से हुईं. कुछ मौतें एईएस, इनफेक्शन और कुछ मौतें इसलिए हुईं क्योंकि बच्चे कमज़ोर पैदा हुए थे. एक बच्चे का लीवर फेलियर हुआ था.'

4.

'हमने गैस सप्लाई से जुड़े काग़ज़ भी देखे. लिक्विड गैस सप्लाई कम होने की बीप 10 तारीख़ को साढ़े सात बजे से शुरू हुई. ऐसी स्थिति में व्यवस्था होती है कि गैस सिलेंडरों से सप्लाई ली जाती है. ये व्यवस्था तुरंत शुरू हो गई थी. लेकिन ये व्यवस्था 11.30 बजे तक ही चल सकी, क्योंकि गैस सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. 11.30 से 1.30 बजे तक एम्बुपैड्स पंप करना शुरू किया गया. 1.30 बजे बाक़ी गैस सिलेंडर की सप्लाई आ गई थी. अब भी सिलेंडरों से सप्लाई चल रही है.'

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5.

'लेकिन 7.30 से लेकर 10.05 बजे के बीच सात बच्चों की मौतें हुईं, मगर उस वक़्त गैस सप्लाई की कमी नहीं थी. अगली मौत 11 तारीख को सुबह 5.30 बजे हुई. जब सप्लाई बाधित थी और अम्बु सिस्टम से पंप किया जा रहा था, तब मौतें नहीं हुईं. ये बातें हमने रिकॉर्ड में पाई हैं.'

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 जुलाई और 9 अगस्त को इस अस्पताल के दौरे पर गए थे. उनके सामने बातचीत में ऑक्सीज़न सप्लाई का मामला आना चाहिए था, लेकिन किसी ने इस बारे में बात नहीं की.

6.

आशुतोष टंडन ने कहा, 'गैस सप्लाई करने वाले डीलर का कुछ भुगतान बाक़ी था. एक अगस्त को इस बारे में चिट्ठी लिखी गई थी. 5 तारीख को लखनऊ में डीजी के दफ़्तर से भुगतान भेजा गया था. 7 तारीख को भुगतान कॉलेज के खाते में आया, लेकिन डीलर का कहना है कि उसको भुगतान 11 तारीख को मिला. भुगतान में देरी की उच्चस्तरीय जांच की जा रही है.'

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