गोरखपुर: मंत्री-मुख्यमंत्री की पीसी के बाद भी अनसुलझे हैं सवाल

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गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कथित तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से तीस से भी ज़्यादा बच्चों की मौत के मामले में सरकार ने सफ़ाई दी है, लेकिन अब भी कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं.

शनिवार को राज्य के चिकित्सा मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री दोनों गोरखपुर पहुंचे, वहां अधिकारियों से मुलाक़ात की. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को निलंबित करने का फ़रमान सुनाया.

इसके बाद दोनों मंत्री के लखनऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक करने के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस को भी संबोधित किया. लेकिन गैस सप्लाई बंद होने संबंधी सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं आ पाया. यही नहीं, ऐसे और भी कई सवाल हैं जो उत्तर की मांग कर रहे हैं.

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ऑक्सीजन सप्लाई नहीं रुकी तो इतनी मौतें कैसे हो गईं?

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Image caption उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह

इस बारे में शुरू से सरकारी अधिकारियों की ओर से ही विरोधाभासी बयान आए कि दो दिन के भीतर इतने बच्चों की मौत कैसे हो गई? ज़िलाधिकारी बयान देते हैं कि मौत ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से हुई और ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है.

स्वास्थ्य मंत्री ने भी तत्काल ट्वीट कर दिया कि मौत की वजह ये नहीं है लेकिन एक दिन बाद गोरखपुर पहुंचने पर स्वास्थ्य मंत्री ने ही अपने बयान में कुछ नरमी बरती और कहा कि ऑक्सीजन की सप्लाई बंद नहीं हुई थी बल्कि कम यानी लो हो गई थी.

वहीं गैस सप्लाई करने वाली कंपनी के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्होंने बकाया पैसों के लिए प्राचार्य को पत्र ज़रूर लिखा था लेकिन गैस की सप्लाई बंद नहीं की थी. अधिकारियों का कहना है कि ये वो भी जानते हैं कि इससे क्या हो सकता है.

लेकिन सवाल यही कि सब कुछ ठीक था तो बच्चे मरे कैसे?

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मृतकों के आंकड़ों में अंतर कैसे आ रहा है?

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सरकारी और ग़ैर सरकारी आंकड़ों की तो छोड़िए, सरकारी विभागों की ओर से भी बच्चों की मौत के जो आंकड़े अब तक आ रहे हैं, उनमें एकरूपता नहीं है. शुक्रवार को ज़िलाधिकारी की ओर से तीस बच्चों के मरने की ख़बर आई तो सीएमओ की ओर से 21 की. शनिवार को भी ये आंकड़े अपने-अपने तरीक़े से तैरते रहे.

हालांकि बाद में ज़िलाधिकारी ने इस बात की पुष्टि की इस वॉर्ड में पिछले तीन-चार दिनों में मरने वालों की संख्या साठ है. लेकिन वहां मौजूद लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि मौतों का आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा है.

सवाल ये है कि आंकड़ों को लेकर सरकार कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रही है?

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प्राचार्य की ग़ैर मौजूदगी पर भी उठ रहे हैं सवाल

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Image caption अस्पताल में ऑक्सीज़न सिलेंडरों की जांच करते कर्मचारी.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के लिए अगर ऑक्सीजन सप्लाई कटने की बात हो रही है तो इसमें दो अहम किरदार आ रहे हैं. एक तो गैस सप्लाई करने वाली फ़र्म और दूसरे मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आरएन मिश्र.

फ़र्म ने प्राचार्य के ही नाम पत्र लिखा कि उन्हें क़रीब सत्तर लाख का भुगतान अब तक नहीं हुआ है और ऐसे में लंबे समय तक ऑक्सीजन की सप्लाई जारी नहीं रखी जा सकती है. बताया जा रहा है कि पत्र पहले ही भेजा गया था लेकिन घटना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी के साथ हुई बैठक में भी प्राचार्य ने इस बारे में कोई चर्चा नहीं की.

यही नहीं, इस दौरान प्राचार्य न तो सामने आए और न ही किसी को फ़ोन पर उपलब्ध हो सके. पहले तो बताया गया कि वो छुट्टी पर गए हैं लेकिन उनके निलंबित होने की ख़बर के बाद ही वो कुछ चैनल पर अपना पक्ष रखते दिखाई दिए.

प्राचार्य की ग़ैर-मौजूदगी भी कई सवाल खड़े कर रही है, ख़ासकर इसलिए कि मुख्यमंत्री ने जब ज़रूरत पड़ने पर कितनी भी बड़ी धनराशि अस्पताल को देने की बात कही, उस समय उन्होंने साठ-सत्तर लाख रुपये का ये मामला उनके सामने क्यों नहीं रखा?

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सरकार की उदासीनता

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मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इतनी बड़ी घटना हो जाए और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तो छोड़िए, स्वास्थ्य विभाग के किसी बड़े अधिकारी तक ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि आख़िर एकाएक इतनी मौतें कैसे हो गईं.

बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की कमी से मौत का सिलसिला पिछले तीन दिन से चल रहा था, बावजूद इसके प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन गंभीर नहीं दिखे.

आमतौर पर सिद्धार्थ नाथ सिंह उन मंत्रियों में से हैं जो सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस मामले में मृतकों के परिवार वालों के प्रति संवेदना जताने के लिए उन्होंने एक ट्वीट तक नहीं किया.

यही मंत्री जी लखनऊ में भी नहीं थे और उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में व्यस्त थे. सवाल ये है कि नौनिहालों की मौत के कारणों को जानने और उन्हें बचाने की कोशिश ज़्यादा ज़रूरी थी या फिर शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत?

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