बंटवारे की त्रासदी से जुड़ा आम आदमी का सामान

देश आज अपना 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इसके साथ ही देश के विभाजन को भी 70 साल हो गए है. उस दौर को जीने वाले लोगों के दिलों में विभाजन का दर्द आज भी जिंदा है.

दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर और बीकानेर हाउस में विभाजन के दौर से जुड़ी चीजों की प्रदर्शनी लगाई गई है. इसे '1947 पार्टिशन आर्काइव' ने लगाया है. इस प्रदर्शनी में उस वक्त के आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की गई चीज़ों को शामिल किया गया है.

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बंटवारे की ग़लतियों से सीख नहीं लेंगे तो आगे नहीं बढ़ेंगे

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1. पत्थर और लकड़ी से बना यह मूसल इसर दास निजवान का है. वे इसे पाकिस्तान के शहर डेरा गाज़ी खान से रोहतक ले आए थे. इसर दास निजवान एक हकीम थे और इस मूसल की मदद से दवाइयां पीसने का काम करते थे. हकीम होने के साथ-साथ वे घी का व्यापार भी करते थे.

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2. धातु से बनी यह सीटी नंद किशोर निजवान की है. वे स्वतंत्रता से पहले ब्रिटिश सेना में शामिल थे. विभाजन के वक्त वे इस सीटी को अपने साथ भारत ले आए थे.

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3. यह चाकू भाग मल्होत्रा का है. जिसे उन्होंने विभाजन के समय हुए साम्प्रदायिक दंगों के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए रखा था. उस समय ज़मीदारों द्वारा अपने पास रखी गई तलवारों को छोट-छोटे चाकुओं में बदल दिया गया और परिवारजनों के बीच बांट दिया गया.

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4. यह कैंची साल 1948 में लाजवंती गुल्यानी ने चांदनी चौक से ख़रीदी थी. उनकी बेटी ने उस दौरान सिलाई सीखना शुरु किया था. उन्होंने अपनी बेटी के लिए यह कैंची खरीदी थी.

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5. यह इंद्र प्रकाश पोपली का रिफ्यूज़ी पहचान पत्र है. उनका जन्म मुल्तान में हुआ था. विभाजन के दौरान वे दिल्ली चले आए. साल 1958 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें पुनर्वास का मुआवजा दिया गया. वे भारतीय रेलवे में इलैक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में कार्यरत रहे.

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