सरहद पार शायरी: इस महफ़िल को आपका इंतज़ार है...

सरहद पार शायरी

एक बंटवारा हुआ, नक्शे पर एक लकीर खींची गई और दो मुल्क वजूद में आए.

लेकिन क्या एक लकीर खींच भर देने से हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच बन आई दीवार हर रिश्ते को तोड़ देती है.

कुछ ऐसा भी है जो दोनों मुल्कों और उसके लोगों को जोड़ता है, वो है हिंदुस्तान और पाकिस्तान की शायरी, उसकी कविता.

बंटवारे के 70 बरस पूरे होने पर दिल्ली और कराची में दोनों मुल्कों के नौजवान शायर बुधवार को फ़ेसबुक लाइव के ज़रिए एक मंच पर आएंगे.

ये बीबीसी की हिंदी और उर्दू सेवा की साझा पहल है.

दोनों शहरों में शायरों और कवियों की नौजवान पीढ़ी स्काइप के जरिए एक दूसरे से मुखातिब होगी और इसे बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर इसे लाइव देखा जा सकेगा.

तारीख़ 16 अगस्त और वक्त शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच.

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