'.... आवाज़ सुनकर लगा कि हम मर जाएंगे'

उत्तर प्रदेश में मुज़फ्फ़रनगर के खतौली में हुए रेल हादसे के चश्मदीदों के मुताबिक घायलों और शवों को ट्रेन के डिब्बों से निकालने में स्थानीय लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई.

लोगों का कहना है कि प्राशासनिक अमला काफ़ी देर से पहुंचा और लोगों ने आगे बढ़कर यात्रियों की मदद की.

एक यात्री दुष्यंत कपूर ने स्थानीय पत्रकार अमित सैनी को बताया, '' जिस वक्त काम चल रहा था मैं वहीं पर मौजूद था , मैंने देखा कि ट्रेन के पीछे वाला डिब्बा लहरें लेते हुए आया और पलट गया. हम तीन लड़के थे जो भागकर गए और अंदर से तीन शव निकाले. हमने तीन घायलों को भी बाहर निकाला. हम लोगों ने सबने मिलकर 20 से 25 घायल लोगों को निकाला है. ट्रैक पर सुबह से काम चल रहा था . सुबह मैं मेरठ गया था. और शाम को जब ट्रेन हादसा हुआ तब भी काम चल ही रहा था .''

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वहीं मुज़्ज़फ़्फ़रनगर के बीजेपी विधायक कपिल देव अग्रवाल ने बीबीसी को बताया,'' हादसे के 15 मिनट बाद हम वहां पहुंच गए थे. स्थानीय लोगों ने वहां पर पहुंचकर ट्रेन के डिब्बे से लोगों को निकालने का काम किया. प्रशासनिक अमला भी वहां पर पहुंचा और निजी जेसीबी मशीनें और कटर मंगाए गए, मृतकों को वहां से निकाला गया.''

कपिल देव अग्रवाल ने बताया, ''शनिवार सुबह ट्रैक पर मज़दूर काम कर रहे थे. इसकी जांच होगी, जांच एजेंसियां इस संबंध में कुछ कहेंगी तो सही होगा. लेकिन जो जानकारी है उसके मुताबिक कुछ कर्मचारी काम कर रहे थे उनसे कुछ लापरवाही ज़रूर हुई है. ''

वहीं स्थानीय निवासी सादिक ने बताया , ''यहीं पर मेरे भाई का घर है. हमने देखा कि यहां पर धुआं उठ रहा है. मैं और मेरा भाई यहां पर दौड़कर आए. डेढ़ घंटे बाद प्रशासन वहां पर पहुंचा.''

सादिक का कहना है कि करीब 95 फ़ीसदी यात्रियों को स्थानीय लोगों ने ही निकाला है.

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ट्रेन के स्टाफ़ राजेश कुमार बोएरा ने बताया, ''गाड़ी इतनी ज़ोर से हिल रही थी तब हमें लगा कि ट्रेन में कोई समस्या है और इतनी ज़ोर से आवाज़ हुई कि हमें लगा कि हम लोग मर जाएंगे. फिर भी हमने ट्रेन को पकड़ने की कोशिश की लेकिन हम फिर भी गिर गए. बाद में हमने देखा कि गाड़ी के आगे कंपार्टमेंट से धुआं निकल रहा है. हम आगे गए और अपने साथियों और कई लोगों को हमने निकाला. आगे के कंपार्टमेंट में कूद कर गए और वहां चिल्लाकर लोगों को निकलने को कहा, हमने वहां से भी दो लोगों को निकाला. पेंट्री कार के ऊपर जो डिब्बा चढ़ गया था उसमें से भी यात्रियों को निकाला है.''

मनोज कुमार शेट्टी जो ट्रेन में सफ़ाई सुपरवाइज़र हैं, वो एस-4 में थे. उन्होंने स्थानीय पत्रकार अमित सैनी को बताया, ''जब हम लोग बाथरूम गए थे कभी ट्रेन हिलने लग गई और गाड़ी रुक गई तो हम लोग ट्रेन से उतर गए. ''

उन्होंने बताया कि उनके छह साथियों के साथ वो सुरक्षित बाहर निकल आए.

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