अफ़ग़ानिस्तान में वर्जिनिटी टेस्ट पर रोक की मांग

अफगानिस्तान महिला इमेज कॉपीरइट Getty Images

अफ़ग़ानिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने सरकार से महिलाओं पर किए जाने वाले वर्जिनिटी टेस्ट पर रोक लगाने की मांग की है.

आयोग का कहना है कि इस तरह के परीक्षण से महिलाओं को मानसिक परेशानी पहुंचती हैं. आयोग ने इसे यौन हिंसा की श्रेणी में रखा है.

वर्जिनिटी टेस्ट के दौरान यह जांचा जाता है कि महिलाओं का हायमन बरकरार है या नहीं.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में पुलिस अक्सर उन महिलाओं को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए भेजती है, जो अपने साथी के साथ चली जाती हैं.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस परीक्षण से गुजरने वाली महिलाओं को सामाजिक कलंक समझा जाता है.

इस महिला के वीडियो पर हंगामा है क्यों बरपा?

इमेज कॉपीरइट Getty Images

मानवाधिकार आयोग की इस मांग पर पुलिस ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में वर्जिनिटी टेस्ट से उन सभी महिलाओं को गुजरना होता है जो किसी भी तरह के अनैतिक बर्ताव के आरोप में गिरफ्तार की जाती हैं.

आयोग का तर्क है कि वर्जिनिटी टेस्ट महिलाओं की मर्जी के ख़िलाफ़ किया जाता है, इसलिए यह किसी यौन शोषण से कम नहीं है. आयोग इसे मानवाधिकार हनन के रूप में भी देखता है.

आयोग ने यह भी कहा है कि चिकित्सकीय दृष्टिकोण से हायमन का बरकरार रहना महिलाओं के कौमार्य होने का सबूत नहीं हो सकता. यह विभिन्न कारणों से नष्ट हो सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान में 'सुनती हो' के ख़िलाफ़ फूटा ग़ुस्सा

आयोग ने एक सर्वे में इस तरह के परीक्षण से गुजरने वाली महिलाओं से बात की, जिसमें उन्होंने इसे अपमानित करने वाली प्रक्रिया बताया.

महिलाओं ने इस क़ानून को मानसिक प्रताड़ना देने वाला बताया है.

आयोग ने इस परीक्षण को अंतरराष्ट्रीय नीति के ख़िलाफ़ भी बताया है. संस्थान का कहना है कि वर्जिनिटी टेस्ट अक्सर पुरुष सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी में किया जाता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)