इलाहाबाद: 'पुलिस न होने' के फ़ायदे गिनाकर एक दिन की दारोगा बनीं सौम्या

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इलाहाबाद में 10वीं की एक छात्रा सौम्या दुबे को एक दिन के लिए सिविल लाइंस थाने का प्रभारी बनाया गया. उनको यह मौका एक निबंध प्रतियोगिता में पहला स्थान पाने पर मिला.

बीबीसी से बातचीत में सौम्या ने बताया कि उनके स्कूल के हिंदी टीचर ने बताया था कि 6 अगस्त को पुलिस लाइंस में एक निबंध प्रतियोगिता होनी है जिसका टॉपिक था- पुलिस रहित समाज.

उन्होंने कहा, "इसमें कुल 25 बच्चे शामिल हुए थे. 15 अगस्त को मुझे बताया गया कि मैं पहले स्थान पर रही."

टैगोर पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली सौम्या को प्रतियोगिता में 75 अंक मिले.

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एसएचओ बनाए जाने के बारे में बताते हुए सौम्या कहती हैं, ''मैं काफी खुश थी. जब मैं वहां गई तो सबने मेरा स्वागत किया और सभी ने अपनी-अपनी ड्यूटी के बारे में बताया. किसका क्या काम होता है ये समझाया गया. मेरी भूमिका क्या होगी ये भी बताया गया.''

उन्होंने बताया, ''थाने में आने वाली समस्याएं कैसे सुलझाते हैं और पुलिस विभाग कैसे काम करता है ये जाना. मैंने लोगों की समस्याएं सुनीं और उनकी अर्जियां भी लीं. अपनी ड्यूटी के दौरान मैंने दो कॉन्स्टेबल की छुट्टी पास की.''

सौम्या ने बताया कि थाने की कार्यवाही समझने के बाद उन्हें फील्ड पर जाने का मौका भी मिला और वह पेट्रोलिंग टीम के साथ शहर की सड़कों पर निकलीं.

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Image caption सौम्या ने थाने में लोगों की शिकायतें भी सुनीं

सौम्या बताती हैं, ''मैंने देखा कि कैसे-कैसे रूट सेट किए जाते हैं और कैसे हमारे पुलिसकर्मी लोगों की सुरक्षा करते हैं. पेट्रोलिंग के बाद मैं वाहनों की चेकिंग के लिए भी पहुंचीं और कुछ लोग जो बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते पकड़े गए उनके चालान भी किए.''

क़ाबिले-तारीफ़

पुलिस को लेकर सौम्या कहती हैं, ''इसके पहले मुझे बस यही पता था कि पुलिस अधिकारी होते हैं, जो हमारी सुरक्षा करते हैं. और कई बार लोगों के बीच बातचीत में पुलिस के बारे में थोड़ा बहुत सुना था. लेकिन वहां गई तो पता चला कि घर बैठकर ये बोलना कि उन्होंने ऐसा नहीं किया, वैसा नहीं किया, आसान है लेकिन वहां जाकर काम करना क़ाबिले-तारीफ़ है.''

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Image caption सौम्या की कॉपी पर निरीक्षक की टिप्पणी

सौम्या ने कहा कि पुलिस रहित समाज के लिए ज़रूरी है कि हम आत्म अनुशासन में रहें और नियमों का पालन करें. उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भी उन्होंने यही बात लिखी और कहा कि अगर हर व्यक्ति अनुशासन में रहकर नियमों का पालन करे तो पुलिस की ज़रूरत कम हो जाएगी.

स्कूल में सब खुश

इस सम्मान के बाद स्कूल के माहौल को लेकर उन्होंने कहा, ''मेरे स्कूल में सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. सब प्रोत्साहित कर रहे हैं कि आगे के कंपटीशन में आप हिस्सा लो और जितना हो सके अच्छा करने का प्रयास करो.''

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Image caption सौम्या ने पुलिस विभाग के कामकाज की भी जानकारी ली

लक्ष्य

आप आगे चलकर क्या बनना चाहती हैं, इस सवाल के जवाब में सौम्या ने कहा कि उनका सपना सिविल सेवा में जाने का रहा है जो अब और पक्का हो गया है.

वह कहती हैं, ''इसके पहले मेरा लक्ष्य था कि मैं सिविल सेवा में जाऊंगी. लेकिन अब एसएचओ बन गई तो और ज़्यादा कॉन्फिडेंस आ गया है कि मैं ये कर सकती हूं. मैं आईपीएस बनना चाहती हूं.''

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इलाहाबाद के एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि इस प्रतियोगिता का मकसद पुलिस और आम जनता के बीच दूरी को कम करना है.

कुलकर्णी ने कहा, ''हम चाहते थे कि बच्चे पुलिस के नज़रिये से चीजों को समझें और समाज में जागरूकता लाएं. इससे पुलिस और जनता के बीच दूरी मिटेगी और प्रशासन बेहतर होगा.''

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