निजता के अधिकार को मौलिक बताने वाले 9 जज

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सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने गुरुवार को निजता के अधिकार मामले में फैसला सुनाते हुए इसे मौलिक अधिकार बताया.

पीठ ने कहा कि निजता का अधिकार संविधान के आर्टिकल 21 के तहत दिए गए अधिकारों का हिस्सा है.

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली इस बेंच में 9 जज थे.

निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट

फ़ैसला सुनाने वाली इस बेंच में कौन-कौन जज थे. आइए जानते हैं-

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Image caption जस्टिस जे.एस. खेहर

चीफ़ जस्टिस जे.एस. खेहर

जस्टिस जगदीश सिंह खेहर का जन्म 28 अगस्त 1952 में हुआ था. पंजाब यूनिवर्सिटी से 1977 में एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद खेहर ने इसी यूनिवर्सिटी से एलएलएम की पढ़ाई की.

1979 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में खेहर ने वक़ालत शुरू की. जनवरी 1992 में वो पंजाब के एडिशनल जनरल एडवोकेट बने. आठ फ़रवरी 1999 को वो पंजाब हाई कोर्ट में जज नियुक्त किए गए.

2009 में वो उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बने और 2011 सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में जज बने. चार जनवरी 2017 को खेहर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बने.

28 अगस्त, 2017 को वो रिटायर हो जाएंगे.

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Image caption जस्टिस चेलमेश्वर

जस्टिस जे. चेलमेश्वर

चेलमेश्वर का जन्म 23 जून 1953 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में हुआ था. उन्होंने 1976 में आंध्र विश्वविद्यालय से एलएलबी की. केरल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे चेलमेश्वर 10 अक्टूबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.

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जस्टिस शरद अरविंद बोबडे

नागपुर (महाराष्ट्र) में 24 अप्रैल 1956 को जन्मे बोबडे ने नागपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी किया था. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस रहे बोबडे सुप्रीम कोर्ट से 23 अप्रैल 2021 को रिटायर होंगे.

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Image caption जस्टिस अग्रवाल

जस्टिस राजेश कुमार अग्रवाल

उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले अग्रवाल का जन्म 5 मई 1953 को हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की. मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहने वाले अग्रवाल ने 17 फ़रवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली थी.

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जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन

जस्टिस आर.एफ़. नरीमन का जन्म 13 अगस्त 1956 को मुंबई में हुआ था. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ लॉ में पढ़ाई की.

आर.एफ़ नरीमन को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने सर्वोच्च अदालत में सीनियर वक़ील बनाया था.

इन्हें बनाने के लिए जस्टिस वेंकेटचेलैया ने नियम में संशोधन किया था. जस्टिस नरीमन 45 साल के बजाए 37 साल में ही सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वक़ील बन गए थे. सात जुलाई, 2014 को नरीमन सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

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Image caption जस्टिस सप्रे

जस्टिस अभय मनोहर सप्रे

28 अगस्त 1954 को पैदा हुए सप्रे ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में प्रैक्टिस की. इसके बाद वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अडिशनल जज नियुक्त हुए. मणिपुर हाईकोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश बनने वाले सप्रे 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.

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जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़

दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी से कानून की पढ़ाई करने वाले चंद्रचूड़ 1998 में अडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया रहे. वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे और 13 मई 2016 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

जस्टिस संजय किशन कौल

26 दिसंबर 1958 को पैदा होने वाले कौल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1982 में एलएलबी किया. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रहे कौल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट के भी चीफ़ जस्टिस रहे. उन्होंने 17 फ़रवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली.

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Image caption जस्टिस नज़ीर

जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर

जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर का जन्म पांच जनवरी 1958 को कर्नाटक में हुआ था.

इन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट से 1983 में वक़ालत की शुरुआत की थी. कर्नाटक हाईकोर्ट में नज़ीर को 2003 में अतिरिक्त जज बनाया गया था.

सितंबर 2004 में नज़ीर कर्नाटक हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त किए गए.

वो ऐसे तीसरे जज हैं जो बिना किसी हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस रहे, सुप्रीम कोर्ट के जज बने. इसी साल फ़रवरी में नज़ीर सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.

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