राम रहीम: डेरा प्रमुख से जेल तक का सफ़र

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पंचकुला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को रेप केस में दोषी क़रार दिया है.

28 अगस्त को उन्हें सज़ा सुनाई जाएगी. दोषी ठहराए जाने के बाद गुरमीत राम रहीम को पहले वेस्टर्न कमान के मुख्यालय ले जाया गया और फिर सिरसा की सुनरिया जेल में ले जाया गया है.

गुरमीत राम रहीम का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है.

15 अगस्त 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे राम रहीम 1990 में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बने.

डेरा की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना ने की थी. आज पूरे देश में इनके 50 से अधिक आश्रम और लाखों की संख्या में अनुयायी हैं.

डेरा का प्रमुख काम सामाजिक कार्य, रक्तदान और ग़रीबों के लिए मदद जुटाना आदि है. इतना ही नहीं, डेरा प्रमुख फ़िल्मों में भी आजमाइश कर चुके हैं.

गुरमीत राम रहीम के बेटे की शादी कांग्रेस सदस्य हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी के साथ हुई है. हालांकि हरियाणा के पिछले चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया था.

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सिरसा स्थित आश्रम में डेरा का अस्पताल भी है जहां लोगों का सस्ता इलाज़ किया जाता है.

डेरा प्रमुख बनने के बाद से राम रहीम विवादों में कई बार घिरे.

राम रहीम से जुड़ा पहला चर्चित विवाद 1998 में आया. तब गांव बेगू में एक बच्चा डेरा की जीप के नीचे आ गया. यह ख़बर वहां के समाचार पत्र में छापी गई. डेरा के लोगों ने अख़बार के ऑफ़िस में जाकर हंगामा किया. बाद में डेरा की ओर से माफ़ी मांगी गई.

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Image caption सिरसा के स्थानीय पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने छापी थी बाबा के ख़िलाफ़ रिपोर्ट

हत्या, यौ शोषण का मामला

2002 में एक बड़ा मामला सामने आया. एक कथित साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख़्य न्यायाधीश को एक चिट्ठी लिख कर गुरमीत राम रहीम पर यौन शोषण का आरोप लगाया. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई.

उसी साल राम रहीम पर एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, जो डेरा सच्चा सौदा पर ख़बरें लिख रहे थे और डेरा के ही प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या का आरोप लगा. सिरसा के सांध्य दैनिक 'पूरा सच' के संपादक रामचंद्र छत्रपति को गोलियां मारी गईं.

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गुरुगोविंद सिंह की पोशाक में फ़ोटो

2007 में डेरा सलावतपुरा में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह ने गुरुगोबिंद सिंह की वेशभूषा में फ़ोटो खिंचवाए. इसके विरोध में बठिंडा में डेरा प्रमुख का पुतला फूंका गया.

प्रदर्शनकारी सिखों पर डेरा प्रेमियों ने हमला बोल दिया, इसके बाद पूरे उत्तर भारत में हिंसक घटनाएं हुईं. सिखों व डेरा प्रेमियों के बीच जगह-जगह टकराव हुए. इसी दौरान एक सिख युवक कोमल सिंह की मौत हो गई.

तब पंजाब में डेरा प्रमुख के जाने पर पाबंदी लगाई गई, लेकिन डेरा सच्चा सौदा इस मामले में झुकने को तैयार नहीं था. बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पूरे पंजाब व हरियाणा में सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया.

नामचर्चा में हिंसा

उसी साल सिरसा के एक गांव में पाबंदी के बावजूद डेरा सच्चा सौदा ने नामचर्चा रखी. नामचर्चा में डेरा प्रमुख काफ़िले सहित शामिल होने के लिए पहुंचे. इसके विरोध में सिखों ने काफ़िले को काले झंडे दिखाए.

इस बात से दोनों पक्षों में टकराव शुरू हो गया. देखते ही देखते भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया और दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया. डेरा प्रमुख को नामचर्चा बीच में ही छोड़कर भागना पड़ा.

इसके बाद गांव मल्लेवाला में नामचर्चा से विवाद उपजा. एक डेरा प्रेमी ने अपनी बंदूक से फ़ायर कर दिया जिसमें तीन पुलिसकर्मियों सहित आठ सिख घायल हो गए. माहौल फिर से तनावपूर्ण हो गया.

सिखों ने डेरा प्रेमियों पर लगाम कसने को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन किए. पंजाब के तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने घायलों का हाल-चाल जाना और हरियाणा सरकार से सिखों की सुरक्षा के प्रबंध करने की बात कही.

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जज को मांगनी पड़ी सुरक्षा

साल के मध्य में सीबीआई ने डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को अदालत में पेश होने के आदेश जारी किए. डेरा ने सीबीआई के विशेष जज को भी धमकी भरा पत्र भेजा जिसके चलते जज को भी सुरक्षा मांगनी पड़ी.

न्यायालय ने हत्या और बलात्कार जैसे संगीन मामलों में मुख्य आरोपी डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को जमानत दे दी जबकि हत्या के मामलों के सहआरोपी जेल में बंद थे.

ये मामले पंचकुला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में विचाराधीन हैं.

2007 से लेकर अब तक इन तीनों मामलों की अदालती कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए डेरा सच्चा सौदा ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

2007 में सीबीआई अदालत अंबाला में थी. उस दौरान पेशी के लिए बुलाए जाने पर डेरा प्रमुख की ओर से वहां हजारों समर्थकों को एकत्रित कर शक्ति प्रदर्शन किया गया और लगातार अदालत पर दबाव की रणनीति के तहत लोगों का हुज़ूम इकट्ठा किया गया.

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फ़कीरचंद की हत्या का मामला

2010 में डेरा के ही पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर डेरा के पूर्व मैनेजर फ़कीर चंद की गुमशुदगी की सीबीआई जांच की मांग की. बिश्नोई का आरोप था कि डेरा प्रमुख के आदेश पर फ़कीरचंद की हत्या कर दी गई.

इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए. हालांकि सीबीआई जांच के दौरान मामले में सुबूत नहीं जुटा पाई और क्लोज़र रिपोर्ट फाइल कर दी. बिश्नोई ने उच्च न्यायालय में क्लोज़र को चुनौती दे रखी है.

विराट से लेकर विजेंदर तक ने ली बाबा से ट्रेनिंग

गुरुमीत राम रहीम बाबा ने अपने एक वीडियो में कहा है, "बहुत से बच्चे भारत के लिए मेडल्स ला रहे हैं. विजेंदर ने देश का नाम रोशन किया है, विराट कोहली ने भी. हमारे पास उनके वीडियोज़ हैं कि वे यहां कैसे आए, हमसे कैसे सीखा और अब ये बच्चे देश का नाम रोशन कर रहे हैं."

डेरा के साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप

फ़तेहाबाद ज़िले के कस्बा टोहाना के रहने वाले हंसराज चौहान (पूर्व डेरा साधू) ने जुलाई 2012 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर डेरा के 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने का आरोप लगाया था.

अदालत के सामने 166 साधुओं का नाम सहित विवरण प्रस्तुत किया गया. यह मामला भी अदालत में विचाराधीन है.

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