पंचकुला और सिरसा में कैसी गुज़री रात?

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बलात्कार मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकुला और सिरसा में भड़की हिंसा में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी हैं जिनमें 29 की मौत पंचकुला और 2 की मौत सिरसा में हुई है.

पंचकुला और सिरसा में कल की हिंसा के बाद अब क्या माहौल है? इस सवाल पर स्थानीय पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन बताते हैं कि पंचकुला में माहौल देखने में शांतिपूर्ण हैं.

लेकिन इस वजह से हैं क्योंकि कल की हिंसा के बाद अर्धसैनिक बलों ने इलाके में फ़्लैग मार्च किया और वे लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने नहीं दे रहे हैं.

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राजस्थान में भी समर्थकों में गुस्सा

रॉबिन बताते हैं कि हरियाणा, पंजाब समेत राजस्थान में भी राम रहीम के समर्थकों में गुस्सा है और माहौल केवल देखने में शांतिपूर्ण लग रहा है. वह कहते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर यह मान नहीं रहे हैं कि प्रशासन ने ढील दी थी.

वहीं, सिरसा में मौजूद स्थानीय पत्रकार प्रभु दयाल बताते हैं कि सिरसा में सेना के आने के बाद माहौल शांतिपूर्ण दिख रहा है.

उन्होंने बताया कि पूरे सिरसा में सेना का कर्फ़्यू जारी है. वह बताते हैं कि सिरसा में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2 हो चुकी है.

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Image caption कई पुलिसकर्मी भी घायल

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6 लोगों की गोली से मौत

पंचकुला के पुलिस कमिश्नर एस.के. चावला ने बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र को बताया है कि अब तक मरने वालों की संख्या 28 है. वह बताते हैं कि इनमें से 6 लोगों की मौत गोली लगने से हुई है और बाकी मौतों के कारणों का पता स्वास्थ्य विभाग लगा रहा है.

चावला कहते हैं कि हिंसा में किसी पुलिसवाले की मौत नहीं हुई है लेकिन कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हैं. हिंसा पर उतारू लोगों को पंचकुला से हटा दिया गया है.

चंडीगढ़ में मौजूद हमारे सहयोगी फ़ैसल मोहम्मद अली ने कल की हिंसक घटना के बाद वहां के अख़बारों का हाल लिया. वह बताते हैं कि अख़बारों में मरने वालों की संख्या अलग-अलग बताई गई है.

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Image caption प्रशासन का दंगाई हटाए गए

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स्थानीय अख़बारों में 32 की मौत

वह बताते हैं स्थानीय अख़बार दैनिक सवेरा में मरने वालों की संख्या 32 बताई जा रही है, वहीं दैनिक जागरण में भी 32 मौत और हिंदुस्तान टाइम्स में 30 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है.

फ़ैसल इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बारे में बताते हैं कि 7 दिन से भीड़ जमा थी और हाईकोर्ट ने चेतावनी भी दी थी लेकिन खट्टर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

वह कहते हैं कि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह हिंसा एकदम से नहीं हुई इसकी तैयारी काफ़ी पहले ही हुई थी.

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