नज़रिया: समानता के 'फ़रेब' पर टिका बाबाओं का साम्राज्य

इमेज कॉपीरइट MSG

उत्तर भारत के एक चर्चित धर्मगुरु गुरमीत राम रहीम के भक्तों ने कई शहरों और कस्बों में तांडव मचा दिया. वाहनों को आग लगा दी, स्टेशन फूंक दिए, संपत्तियां नष्ट कर दीं, मीडिया की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर दी और सुरक्षाबलों से हिंसक झड़पें कीं. इस हिंसा में दर्जनों लोग भी मारे गए.

ये भक्त गुस्से में हैं क्योंकि सीबीआई की एक अदालत ने गुरमीत राम रहीम को दो साध्वियों के साथ बलात्कार का दोषी माना है. ये बलात्कार गुरमीत राम रहीम के धार्मिक समूह डेरा सच्चा सौदा के सिरसा स्थित मुख्यालय में साल 2002 में हुए थे.

इमेज कॉपीरइट EPA

गुरमीत राम रहीम के दसियों लाख भक्त हैं जिनमें से अधिकतर ग़रीब, पिछड़ी जातियों के पुरुष और महिलाएं हैं. सिंह अपने डेरे के एक बहरुपिए नेता हैं. वो सहजता से एक धर्मगुर से भड़कीले अभिनेता का रूप धारण कर लेते हैं.

वो लोगों को जीवन में उचित संयम बरतने का उपदेश देते हैं, लेकिन स्वयं आलीशान जीवन जीते हैं. गुरमीत राम रहीम को कुछ लोग 'चमकीला बाबा' भी कहते हैं और ये बाबा कई भड़कीली स्वनिर्मित फ़िल्मों के मुख्य अभिनेता भी हैं और अपने भक्तों की भरमार वाले कॉन्सर्ट के मुख्य गायक भी.

वो दस सवाल जिनसे हरियाणा सरकार परेशान

इन बाबाओं में ऐसा क्या है जो दीवाना बना लेता है?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
लोगों ने सुनाई उपद्रव की आंखों देखी

कई छवियों वाले बाबा

'लव चार्जर' नाम की उनकी पहली म्यूज़िक एलबम की दसियों लाख प्रतियां बिकीं थीं. हालांकि अधिकतर ख़रीदार उनके भक्त ही थे.

गुरु राम रहीम के सामाजिक सरोकार भी चौंकाने वाले हैं. वो चैरिटी चलाते हैं, रक्तदान, नेत्रदान और अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाते हैं, शाकाहार को बढ़ावा देते हैं और साथ ही समलैंगिक लोगों को समलैंगिकता छोड़ने की कसम भी खिलाते हैं. उन पर एक बार अपने भक्तों को ईश्वर के क़रीब लाने के लिए उनकी नसबंदी कराने के आरोप भी लग चुके हैं.

बाबा गुरमीत राम रहीम के सौ से ज़्यादा डेरे हैं. उनके डेरा मुख्यालय का दौरा करने वाली एक पत्रकार ने एक बार मुझे बताया था कि वह वहां मानवों के कान के आकार की खिड़कियों और दीवारों में लगे क़ीमती पत्थरों को देखकर चौंक गई थीं.

"मुझे ऐसा लगा कि ये वो गुरु हैं जो अपने सपनों और कल्पनाओं को जी रहे हैं. वो फ़िल्मस्टार हैं, रॉकस्टार हैं, राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं और लोगों की नज़रों में नायक हैं. इसी प्रक्रिया में वो अपने भक्तों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित भी करते हैं."

हरियाणाः मरने वाले लोग आखिर हैं कौन?

ऐसी बीती राम रहीम की जेल में पहली रात...

इमेज कॉपीरइट MANOJ DHAKA

बाबाओं की कमी नहीं रही

भारत में हमेशा से ही गुरु रहे हैं. महर्षि महेश योगी जैसे वैश्विक पहचान वाले गुरु भी हैं जिनके पास 60 के दशक में बीटल्स जैसे मशहूर संगीत बैंड के सदस्य भी उपदेश लेने आते थे. साथ ही अमीरों और ग़रीबों सबके अपने अपने घरेलू गुरु भी हैं जिनके पास वो उपदेश लेने जाते हैं. इन गुरुओं के भक्त लाखों में हैं.

राजनेता, फ़िल्मी सितारे, क्रिकेट खिलाड़ी, नौकरशाह और आम लोग इन गुरुओं के भक्त होते हैं. ये गुरु स्कूल और अस्पताल चलाते हैं. उनका ख़ासा प्रभाव है. नेता उनके पास सलाह और भक्तों का वोट- दोनों लेने आते हैं. किसी गुरु के साथ नज़दीकी नेता को स्वीकार्यता देती है और उसका राजनीतिक क़द भी बढ़ाती है.

राम रहीम जैसे गुरु अपनी ख़ुद की समानांतर सत्ता चलाते हैं और अपने भक्तों को कई तरह की सेवाएं भी देते हैं.

50 वर्षीय गुरमीत राम रहीम जिन्हें सोमवार को सज़ा सुनाई जाएगी उन गुरुओं में आते हैं जो विवादित रहे हैं. राम रहीम से पहले भी गुरुओं पर क़त्ल, बलात्कार, मानव तस्करी, धोखाधड़ी और हमले करवाने के आरोप लगते रहे हैं.

गुरमीत राम रहीम पर बलात्कार के अलावा हिंदू और सिख धर्मों का अपमान करने का आरोप भी लग चुका है. उन पर क़त्ल का मुक़दमा भी चल रहा है. हालांकि उनके अधिकतर भक्त ग़रीब, कम पढ़े लिखे और पिछड़े हैं, लेकिन पढ़े-लिखे और अमीर भक्त भी ख़ासी तादाद में हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

विशेषज्ञों का मानना है कि गुरमीत राम रहीम जैसे गुरुओं के पास दसियों लाख भक्त इसलिए पहुंच जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मुख्यधारा के धर्मों और राजनीति ने उनके लिए कुछ नहीं किया है. अमीरों और ग़रीबों के बीच बड़े फ़ासलों वाली इस दुनिया में उन्हें लगता है कि उनके नेताओं और धर्मगुरुओं ने उनके लिए कुछ नहीं किया है. ये उदासी ही उन्हें बाबा राम रहीम जैसे गुरुओं के पास ले जाती है.

समाजशास्त्री शिव विश्वनाथन कहते हैं, "राम रहीम जैसे गुरुओं का उत्थान हमें कई तरह से ये बताता है कि किस तरह से सरकारें, राजनीति और धर्म लोगों की एक बड़ी तादाद को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए वो कुछ सम्मान और बेहतर जीवन की आस में डेरा सच्चा सौदा जैसे अपरंपरागत पंथ की ओर चल पड़ते हैं. ऐसे समूहों का उत्थान आधुनिक, प्रजातांत्रिक दुनिया के कई हिस्सों में हुआ है. वे लोग दसियों लाख भक्तों के साथ एक जगह इकट्ठा होकर बराबरी का एहसास करते हैं."

गुरमीत राम रहीम के भक्त एक नया उपनाम 'इंसान' साझा करते हैं. इसकी वजह ये है कि आम उपमान व्यक्ति की जात या सामाजिक स्थिति के बारे में बताते हैं, लेकिन इंसान उपमान सबको बराबर खड़ा कर देता है.

स्पष्ट तौर पर, गुरुओं और धार्मिक समूहों का उत्थान ये बताता है कि भारत अंदरूनी रूप से कितना ज़्यादा बंटा हुआ है. शुक्रवार को हुई हिंसा एक बार फिर ये बताती है कि राम रहीम जैसे गुरू किस तरह से अपनी सामानांतर सत्ता चला सकते हैं और सरकारें उनके सामने किस तरह से बेबस हो सकती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे