प्रेस रिव्यू: 'प्रधानमंत्री भारत का होता है बीजेपी का नहीं'

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डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम को बलात्कार का दोषी क़रार दिए जाने के बाद हुई हिंसा में 36 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.

गुरमीत राम रहीम को रोहतक की जेल ले जाया गया है. पंचकुला विशेष सीबीआई अदालत उन्हें सोमवार को सज़ा सुनाएगी.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाबा के सुरक्षाकर्मियों ने उनकी गिरफ़्तारी रोकने की कोशिश की थी.

गुरमीत राम रहीम की ज़ेड प्लस सुरक्षा में तैनात सात पुलिसकर्मियों को उनकी गिरफ़्तारी रोकने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक इन पुलिसकर्मियों ने दोषी क़रार दिए जाने के बाद बाबा राम रहीम को अपने साथ ले जाने की कोशिश की थी.

गिरफ़्तार किए गए ये पुलिसकर्मी बीते छह सात सालों से बाबा राम रहीम की सुरक्षा में तैनात थे.

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राजनीति हावी रही...

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राम रहीम प्रकरण में हुई लापरवाही को लेकर हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है.

हाई कोर्ट ने कहा, "राष्ट्रीय एकता और क़ानून व्यवस्था सबसे ऊपर हैं. हम एक राष्ट्र हैं, किसी पार्टी का राष्ट्र नहीं हैं. नेताओं को समझने की ज़रूरत है कि राष्ट्र एक है. प्रधानमंत्री भारत का होता है, बीजेपी का नहीं. मुख्यमंत्री राज्य का है, बीजेपी का नहीं. आप (सत्यपाल जैन) भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हो, किसी पार्टी के नहीं."

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग भी है, उन्होंने भीड़ को इकट्ठा होने से क्यों नहीं रोका?

अदालत ने कहा, "वो सब बाहर के लोग थे लेकिन उन्हें पंचकुला आने दिया गया, ठहरने और सार्वजनिक स्थलों पर क़ब्ज़ा करने दिया गया."

अदालत ने ये भी कहा कि प्रशासनिक फ़ैसलों पर राजनीति हावी रही.

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सामान्य क़ैदी की तरह...

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोहतक जेल के क़ैदी संख्या 1997 बाबा गुरमीत राम रहीम ने जेल में दाल चावल खाए और फर्श पर रात बिताई.

रिपोर्ट के मुताबिक राम रहीम को सारी रात नींद नहीं आई.

जेल महानिदेशक केपी सिंह के मुताबिक 50 वर्षीय गुरमीत राम रहीम सामान्य क़ैदी की तरह अपनी कोठरी के फर्श पर लेटे.

जेल में उन्होंने बोतलबंद पानी के बजाए अन्य क़ैदियों के लिए मुहैया मशीन का पानी पिया. रिपोर्ट के मुताबिक जिस कोठरी में उन्हें रखा गया है उसमें एसी भी नहीं है.

केपी सिंह के मुताबिक राम रहीम के लिए जेल में कोई विशेष इंतेज़ाम नहीं किए गए हैं और उन्हें बाक़ी क़ैदियों के साथ ही रखा गया है.

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Image caption राकेश कुमार ने ये तस्वीर 24 अगस्त को डेरे के मुख्यालय के बाहर से फ़ेसबुक पर पोस्ट की थी

पत्रकार की आपबीती

द हिंदू अख़बार ने सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में बाबा गुरमीत राम रहीम के भक्तों के ग़ुस्से का निशाना बने पंजाबी टीवी चैनल पीटीसी के दो पत्रकारों की आपबीती प्रकाशित की है.

44 वर्षीय राकेश कुमार का हाथ टूट गया है जबकि 23 वर्षीय कैमरामैन शापिंद्र सिंह का कैमरा छीन लिया गया.

फ़ैसला आने के कुछ ही देर बाद बाकी पत्रकार डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय की मीडिया शाखा से खिसक गए थे जबकि राकेश कुमार और शापिंद्र सिंह करीब चालीस डेरा समर्थकों की भीड़ के हत्थे चढ़ गए.

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कुमार कहते हैं, "हम शाम चार बजे के करी डेरे से शहर की ओर जा रहे थे जब भीड़ ने हमारी कार को घेर लिया. मैं कुछ कह पाता उससे पहले ही भीड़ में से एक व्यक्ति चिल्लाया कि उसने मुझे डेरे के बाहर से रिपोर्ट करते हुए देखा है. जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि हम पत्रकार हैं उन्होंने हमला शुरू कर दिया. हमें कार से बाहर खींच लिया गया. कार में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई."

कुमार बताते हैं, "भीड़ में कुछ लोग चिल्ला रहे थे कि इन्हें मार दो, मार दो." कुमार ने किसी तरह पास के घरों में भागकर अपनी जान बचाई. भीड़ में शामिल एक व्यक्ति की मदद से कैमरामैन भी सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे.

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