भीड़ जुटाने से कोई सही नहीं हो जाता: केसी त्यागी

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रविवार को पटना के गांधी मैदान में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने 'भाजपा भगाओ, देश बचाओ' रैली का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. इस रैली में लालू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा.

लालू और उनके परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देकर आरजेडी से अलग हुए जनता दल (युनाइटेड) की इस रैली पर क्या प्रतिक्रिया है, जानने के लिए बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने जेडीयू सांसद और प्रवक्ता केसी त्यागी से बात की.

'यह एक परिवार की रैली थी'

यह पूछे जाने पर कि आरजेडी की रैली में जुटी भीड़ से कहीं जेडीयू को एनडीए से जुड़ने का पछतावा तो नहीं हो रहा, केसी त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी चाहे तो इससे बड़ी रैली कल करवा सकती है.

केसी त्यागी ने कहा, ''रैली में कम लोग आते हैं या ज़्यादा, इससे महत्वपूर्ण यह है कि मुद्दे क्या हैं. क्या इस रैली का कोई मुद्दा था? लोहिया और जेपी के कहने पर शरद यादव, नीतीश कुमार और हम वंशवाद की राजनीति के ख़िलाफ लड़ते रहे. मगर वंशवाद का ऐसा प्रदर्शन किसी ने नहीं देखा होगा.''

लालू की रैली में निशाने पर नीतीश और बीजेपी

उन्होंने कहा, ''जेडीयू की रैली में नीतीश कुमार के परिवार का एक भी सदस्य नहीं होता था, मगर आज आरजेडी की रैली में दोनों बेटे लॉन्च किए गए, धर्मपत्नी का भाषण हुआ, बेटी अभिवादन कर रही थीं... यह एक परिवार की रैली थी, अपने पापों पर पर्दा डालने के लिए. जांच एजेंसियों ने प्राथमिकी दर्ज की है, पूरा परिवार भ्रष्टाचार में फंसा है. इसीलिए कुछ पार्टियों के नेताओं को बुलाया गया था.''

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जेडीयू सांसद ने कहा कि यह रैली नकारात्मक थी, इसीलिए सीपीएम ने इससे किनारा किया. उन्होंने कहा, ''इस रैली की कोई राजनीतिक दिशा नहीं थी. इसीलिए मायावती ने इससे किनारा किया और कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता भी नहीं आए. यह पार्टी भाजपा भगाओ नहीं थी, यह एक परिवार के लोगों को बचाने के लिए आयोजित की गई थी.''

'भीड़ जुटाने से कोई सही नहीं हो जाता'

जेडीयू भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर आरजेडी से अलग हुई थी. रैली में जुटी भीड़ को देखते हुए क्या यह कहा जा सकता है कि जेडीयू जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने में कामयाब रही है? इस सवाल पर केसी त्यागी ने कहा कि भीड़ के आधार पर कुछ तय नहीं किया जा सकता.

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Image caption हज़ारों की संख्या में जुटे थे आरजेडी समर्थक

केसी त्यागी ने कहा, 'फिर तो कल को कहा जा सकता है कि राम रहीम द्वारा किया गया बलात्कार भी सही है, क्योंकि कोर्ट के बाहर 2 लाख की भीड़ थी जो लालू जी की रैली के बराबर थी. क्या जातियों, धर्मों और संप्रदायों के समूह राजनीतिक दिशा तय करेंगे? बलात्कार के दोषी के पीछे भी 2 लाख की भीड़ है. तो क्या भीड़ की संख्या अदालत के फ़ैसले और राजनीति की दशा-दिशा तय करेगी?'

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'लालू तो ऐसी भीड़ कभी भी जुटा लेते हैं'

अगर जेडीयू को लगता है कि यह रैली बिना मुद्दे की थी और इस भीड़ की मौजूदगी राजनीतिक दशा-दिशा तय नहीं कर सकती, तो फिर वे कौन लोग थे जो इतनी बड़ी संख्या में रैली मे पहुंचे थे? इसपर के.सी. त्यागी ने कहा, ''ये लालू यादव जी के समर्थक हैं. लालू जी जब चाहते हैं, इतनी बड़ी रैली कर लेते हैं.''

उन्होंने कहा कि यह जनता तब भी लालू के साथ थी जब उनकी पार्टी को 242 में से 22 सीटें मिली थीं और नेता प्रतिपक्ष का दर्जा भी नहीं मिल पाया था.

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केसी त्यागी ने कहा, 'ये तो हम इनके साथ चले आए तो 22 के 80 हो गए. जिस दिन अगला चुनाव होगा, वे फिर 80 से 22 पर पहुंच जाएंगे. इनके पास न कोई भरोसे लायक चेहरा है, न कोई कार्यक्रम है और न ही नीति. एक परिवार के 6 लोग मंच पर बैठे थे, लंबे-चौड़े भाषण दिए गए. लोकतंत्र का इससे बड़ा परिहास क्या हो सकता है?''

विपक्ष की एकता के भविष्य पर उठाए सवाल

लालू की रैली में देशभर की तमाम बड़ी ग़ैर-एनडीए पार्टियों के नेता पहुंचे थे. विपक्षी पार्टियों का एकजुटता दिखाने का यह प्रयास कितना सफ़ल रहेगा, इस पर केसी त्यागी ने कहा कि इनके पास किसी कार्यक्रम को लेकर एकता नहीं है.

केसी त्यागी बोले, ''विपक्षी एकता का सबसे कारगर और साफ़-सुथरा चेहरा नीतीश थे, जो परिवारवाद और भ्रष्टाचार से दूर थे. अगर इनका दिल बड़ा होता तो नीतीश कुमार इनके नेता हो सकते थे. मगर कांग्रेस पार्टी का रुख़ है कि अपने अलावा किसी और बढ़ने नहीं देना है. साथ ही अपने परिवार के अलावा वह किसी और को नेता नहीं बनने देते. ये चीज़ें आने वाले दिनों में इन सभी नेताओं को अखरेंगी, जैसी हमें अखरी थीं.''

इन दिनों पार्टी लाइन से अलग चल रहे जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव भी आरजेडी की रैली में नज़र आए. इस बारे में केसी त्यागी ने कहा, 'राजा-रानियों, सामंतवाद और परिवारवाद के खिलाफ़ जिस लोकतंत्र का जन्म हुआ था, हमारे साथी नेता शरद यादव आज उसी की आहूति देकर आए हैं.'

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