संत रामपाल दो मामलों में बरी, रहेंगे जेल में

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Image caption संत रामपाल

हरियाणा में हिसार की एक अदालत ने संत रामपाल को दो मामलों में बरी कर दिया है. मंगलवार को रामपाल के ख़िलाफ़ बड़े फ़ैसले का इंतज़ार किया जा रहा था. ऐसा माना जा रहा था कि कोर्ट संत रामपाल पर बड़ा फ़ैसला सुना सकता है.

स्थानीय पत्रकार प्रभु दयाल ने बीबीसी को बताया कि रामपाल को सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में बरी किया गया है.

वह बताते हैं कि रामपाल पर कुल 6 मामले चल रहे थे जिनमें से दो में उनको बरी कर दिया गया है जबकि हत्या, बंधक बनाने, देशद्रोह और अवैध तरीके से सामग्री जमा करने का मामला उन पर चलता रहेगा. फ़िलहाल रामपाल जेल में ही रहेंगे.

एक दिन पहले ही पंचकुला की सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की सजा तय की. उन्हें बलात्कार के मामले में 20 साल क़ैद हुई है.

सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने कथित संत आसाराम बापू के मामले में धीमी सुनवाई पर गुजरात के राज्य सरकार को फटकार लगाई थी.

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कौन हैं संत रामपाल

ख़ुद को संत कबीर का अवतार और भगवान घोषित करने वाले रामपाल की कहानी किसी हिंदी फिल्म के किरदार से कम नहीं.

उनके समर्थकों के लिए वो नायक हैं और आलोचकों के लिए खलनायक और क़ानून की नज़र में वो फिलहाल एक अभियुक्त हैं जिनके ख़िलाफ गैर ज़मानती वारंट जारी हुआ था.

2006 के एक हत्या के मामले में 2008 में संत रामपाल को ज़मानत मिली थी. लेकिन उसके बाद से वे एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए.

लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद और रामपाल समर्थकों के प्रतिरोध के बावजूद नवंबर, 2014 में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और 67 वर्षीय रामपाल तब से जेल में हैं.

अगस्त 2014 में हिसार ज़िला अदालत में उनके समर्थकों ने काफ़ी हुड़दंग मचाया था.

जिसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उन्हें अदालत में पेश होने को कहा था और पूछा था कि उनकी ज़मानत क्यों न रद्द कर दी जाए.

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Image caption नृत्य को हिंदू त्योहारों का ख़ास हिस्सा माना जाता है, लेकिन रामपाल के आश्रम में इसपर रोक है

'पशुओं से बात करते हैं'

सोनीपत के धनाणा गांव में 1951 को जन्मे रामपाल हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर थे.

नौकरी के दौरान ही रामपाल दास सत्संग करने लगे और 'संत रामपाल' बन गए. हरियाणा सरकार ने उन्हें 2000 में इस्तीफा देने को कहा.

उसके बाद रामपाल ने करोंथा गांव में सतलोक आश्रम बनाया. जो फ़िलहाल सरकार के क़ब्ज़े में हैं.

हरियाणा में हिसार के पास बरवाला में स्थित इस आश्रम की ज़मीन को लेकर रामपाल पर कई आरोप लगे.

आश्रम के बाहर रामपाल को गिरफ़्तारी से बचाने के लिए जमा उनके हज़ारों समर्थकों में से एक मनोज दास का कहना था, "बाबा एक चमत्कारी आत्मा है जो धरती पर भगवान का स्वरूप है. कुछ लोग इन्हें फंसा रहे है पर हम खड़े रहेंगे जितनी भी गोलिया क्यों न बरसें."

मनोज का कहना था कि रामपाल तो पशुओं से भी बात कर सकते है.

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ज़मीन ज़ब्त

रामपाल इस्लामी विद्वान डॉक्टर ज़ाकिर नाइक और कई अन्य धर्म गुरुओं पर अपनी टिप्पणियों को लेकर भी चर्चा में रहे.

2006 में स्वामी दयानंद पर संत रामपाल ने एक बयान दिया, जिसके बाद रामपाल और आर्य समाज के समर्थकों के बीच सतलोक आश्रम के बाहर हिंसक झड़प हुई.

इसमें एक महिला की मृत्यु हुई. झड़प के बाद पुलिस ने रामपाल को हत्या के मामले में हिरासत में लिया. 22 महीने जेल में रहने के बाद वह 30 अप्रैल 2008 को रिहा हुए.

रामपाल का आश्रम भी सरकार ने ज़ब्त कर लिया.

रोहतक से बीजेपी के पूर्व विधायक रहे नरेश मालिक का कहना था, "मैंने रामपाल का मुद्दा हरियाणा विधानसभा में उठाया था. लेकिन सरकार ने उसे नज़र अंदाज़ किया. मेरी पार्टी में भी कई लोग बाबा की असलियत नहीं जानते है."

उन्होंने कहा, "लोग कहते थे कि चुनाव से पहले बाबा का आशीर्वाद ले लो पर मैंने मना किया क्योंकि वह अधर्मी है और सभी तरह के ग़लत काम करते हैं."

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तारीख़ पर तारीख़

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में रामपाल की ज़ब्त की गई ज़मीन को उन्हें लौटने के लिए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया.

इसके एक महीने बाद ही मई में आश्रम के बाहर फिर झड़प हुई जिसमें दो लोग मारे गए थे.

कोर्ट ने रामपाल के पेश नहीं होने पर प्रशासन को इस मामले में झाड़ लगाई.

उनके ख़िलाफ़ गैर ज़मानती वारंट जारी किया गया और पुलिस को उन्हें कोर्ट में हाजिर करने के लिए कहा गया.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने 2014 में खुद को आश्रम में ही क़ैद कर लिया.

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अपनी पहरेदारी के लिए समर्थकों की फौज तैनात कर दी जिनके हाथों में पत्थर, पेट्रोल बम और दूसरे हथियार थे.

उन पर कत्ल की साजिश में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप थे. पुलिस को लंबे संघर्ष के बाद रामपाल का आश्रम खाली कराने में कामयाबी मिली.

इस झड़प में छह लोग मारे गए थे.

उनके समर्थक बताते हैं कि रामपाल दूध में नहाते थे और फिर उस दूध से खीर तैयार किया जाता था जिसके बारे में उनके भक्तों की ये राय थी कि इससे बीमारियां ठीक होती हैं.

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