‘आपदा के समान था नोटबंदी का फ़ैसला'

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा नोटबंदी के बाद जारी किए गए आंकड़ों पर विपक्षी दल सरकार को घेरने लगे हैं. विपक्षी पार्टियां नोटबंदी को आपदा के समान बता रही हैं.

बुधवार को केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए आंकड़ों में बताया गया है कि जितनी मुद्रा बैंक द्वारा प्रतिबंधित की गई थी उसमें से लगभग 99 प्रतिशत वापिस जमा हो गई है.

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नोटबंदी से कितने क़ाबू में आए नक्सली

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प्रधानमंत्री माफ़ी मांगें

कांग्रेस ने मांग की है प्रधानमंत्री अपने इस कदम के लिए देश से माफी मांगें. प्रधानमंत्री ने नोटबंदी को कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक करार दिया था.

कांग्रेस का कहना है कि नोटबंदी की वजह से विदेश में भारत की छवि खराब हुई है. वहीं सरकार का दावा है कि नोटबंदी के बाद टैक्स रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज हुई है.

पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिंदबरम ने कहा कि इस कदम से ना सिर्फ़ आरबीआई पर जनता का भरोसा कम हुआ है बल्कि विदेशों में भी भारत की छवि खराब हुई है.

नोटबंदी: 16 हज़ार करोड़ नहीं लौटे वापस

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर नोटबंदी को एक 'बड़ी आपदा' करार दिया, जिसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने नोटबंदी को एक बड़ा घोटाला बताया है.

लंबे वक्त में दिखेगा फ़ायदा

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वहीं वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि लंबे वक्त में नोटबंदी का फ़ायदा देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के नतीजे उम्मीदों के मुताबिक ही आए हैं, बैंक में जमा हुआ सारा पैसा वैध नहीं हो गया है.

पिछले साल 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया कि 500 और 1000 के नोट अर्थव्यवस्था में चलन से हटा लिया जाएंगे जो उस वक्त चलन में जारी रुपयों का 85% था.

इस कदम के बाद अचानक ही देश कैश के लिए जनता परेशान हो गई. बैंक और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लगने लगीं. छोटे व्यापारी, किसानों और श्रमिक वर्ग को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

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नोटबंदी के जुए में हारे प्रधानमंत्री?

आर्थिक विश्लेषक विवेक कौल ने नोटबंदी को एक ऐसे जुए की संज्ञा दी है जिसमें प्रधानमंत्री हार गए हैं. उन्होंने कहा कि आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार 15.28 खरब मूल्य के बैंक नोट इस साल 30 जून तक बैंकों में जमा करा दिए गए. इसका सीधा-सा मतलब निकलता है कि चलन से हटाए गए पैसे का 99 फ़ीसदी वापस बैंकों में लौटकर आ गया. यानी नकदी के रूप में मौजूद लगभग पूरा ही काला धन बैंकों में जमा करा दिया गया और उम्मीदों के विपरीत वो चलन के बाहर नहीं हो पाया.

विवेक कौल ने कहा कि, ''जहां तक सरकार का सवाल है वे कभी भी इस फैसले को गलत नहीं मानेंगे और किसी न किसी तर्क के साथ नोटबंदी को सही साबित करने की कोशिश करेंगे.''

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हालांकि कुछ विश्लेषकों ने नोटबंदी के सकारात्मक पहलुओं पर भी नज़र दौड़ाई है, जिसमें बैंकिंग सिस्टम में कैश का जमा होना शामिल है जिसकी वजह से लोन की दर नीचे आई है.

मुंबई स्थित एक अर्थशास्त्री ने कहा, 'फिलहाल नोटबंदी का कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं दिख रहा है, लेकिन इस कदम की वजह से निष्क्रिय हो चुके खाते वित्तीय तंत्र में दोबारा शामिल हुए और ऋण की दरों में भी कमी आई.'

कुछ समीक्षकों के अनुसार सेंट्रल बैंक के ये आंकड़े सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाएंगे क्योंकि सरकार ने उत्तर प्रदेश चुनाव से ठीक पहले नोटबंदी का फैसला लिया था और उन चुनावों में ऐतिहासिक सफलता दर्ज की थी.

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