रोहिंग्या संकट पर भारत का रुख़ क्या है?

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म्यांमार के रखाइन प्रांत में जारी हिंसा और रोहिंग्या मुसलमानों के लगातार होते पलायन के बीच भारत ने अपना रूख़ साफ किया है.

भारत ने कहा है कि वह म्यांमार में सुरक्षाकर्मियों व आम नागरिकों पर हो रहे हमलों की निंदा करता है. साथ ही भारत ने म्यांमार सरकार के साथ मिलकर इस समस्या को हल करने के लिए अपनी तरफ़ से मदद करने की बात भी कही है.

शनिवार रात भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से रख़ाइन के हालात और वहां हो रहे पलायन पर चिंता ज़ाहिर करते हुए एक बयान जारी किया गया है.

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चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए दृढ़

भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर यह बयान साझा किया है. इसमें कहा गया है कि ''म्यांमार के रखाइन प्रांत में ताज़ा हालात और वहां हो रहे शरणार्थियों के पलायन के प्रति भारत चिंतित है, भारत ने पहले भी रखाइन राज्य में मलेशियाई सेना पर हुए चरमपंथी हमले की निंदा की है. दोनों ही देश साझा रूप से चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ने और उसे किसी भी संदर्भ में सही न ठहराने के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं.''

आगे लिखा गया है ''प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी हालिया म्यांमार यात्रा के दौरान वहां मारे गए सुरक्षाकर्मियों व आम नागरिकों के प्रति गहरी चिंता ज़ाहिर की थी. उन्होंने शांति, सौहार्द्र, मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत म्यांमार संकट को हल करने की बात कही थी.''

विदेश मंत्रालय ने लिखा है ''प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे में इस बात पर भी सहमति दर्ज कराई थी कि भारत म्यांमार सरकार के साथ मिलकर रखाइन राज्य विकास कार्यक्रम के तहत मदद मुहैया कराएगा.''

बयान में अंत में लिखा गया है ''भारत सरकार अपील करती है कि रखाइन प्रांत की स्थिति को संयम और परिपक्वता के साथ सुलझाया जाए. वहां की आम जनता और सुरक्षाकर्मियों का भी ख़्याल रखा जाना चाहिए.''

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प्रधानमंत्री का म्यांमार दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 से 7 सितंबर के बीच म्यांमार के दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने म्यांमार की नेता आंग सान सू ची से मुलाक़ात भी की.

हालांकि इन दोनों नेताओं की मुलाक़ात में रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन का विषय लगभग गायब रहा. मीडिया के हलकों में इसकी आलोचना भी हुई.

भारत "एक्ट ईस्ट" नीति के तहत म्यांमार के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने में दिलचस्पी दिखा रहा है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के म्यांमार दौरे से पहले भारत ने घोषणा की थी कि वह म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करने पर विचार कर रहा है.

भारत में 40,000 रोहिंग्या समुदाय के लोग हो सकते हैं, इसमें 16,000 संख्या उन रोहिंग्या मुसलमानों की है जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं.

इंडोनेशिया के बाली में हुई एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ़्रेंस में म्यांमार के हालिया रोहिंग्या संकट पर चिंता जताई गई. एक साझा वक्तव्य जारी करके सभी पक्षों से स्थिरता और सुरक्षा की बहाली के लिए अपील की गई.

लेकिन भारत ने इस सम्मेलन में अपने प्रतिनिधिमंडल के मौजूद होने के बाद भी इस साझा बयान से ख़ुद को अलग रखा था.

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