टीचर ने टॉयलेट में खड़ा किया, डिप्रेशन में लड़की

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Image caption 11 साल की बच्ची अब स्कूल जाने के लिए राज़ी नहीं है

हैदराबाद के एक स्कूल में पांचवीं में पढ़ने वाली लड़की को सज़ा के तौर पर लड़कों के टॉयलेट में खड़ा कर दिया गया जिसके चलते वह मानसिक तौर पर परेशान हो गई है.

लड़की के पिता रामकृष्ण अमरीशेट्टी ने कहा, ''वह घर लौटी और रोने लगी. वह लगातार कह रही थी कि स्कूल नहीं जाएगी. वह कह रही थी कि मैं घर के काम करूंगी, बर्तन धो दूंगी, लेकिन स्कूल नहीं जाऊंगी.''

11 साल की बच्ची पर स्कूल में मिली सज़ा का असर इतना गहरा हुआ कि वह काफ़ी परेशान है और उसके पिता उसे मनोचिकित्सक के पास ले जा रहे हैं.

उन्होंने बताया, ''वह डिप्रेशन में आ गई है और मैं उसे बाल मनोचिकित्सक के पास ले जा रहा हूं.'' बेटी की इस हालत से परेशान होकर उन्होंने संबंधित टीचर के ख़िलाफ पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रेन अगेंस्ट सेक्शुअल ऑफ़ेंसेज़ बिल, 2011) के तहत केस दर्ज कराया है.

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स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा, ''हर तरफ़ से लगातार दबाव बढ़ रहा था जिसके बाद हमने शारीरिक शिक्षा ट्रेनर को सस्पेंड कर दिया है.''

रामकृष्ण ने बताया कि उनकी बेटी ने कई बार पूछने पर सारी घटना बताई. उनकी पत्नी ने स्कूल डायरी में शनिवार को यह लिखकर दिया था कि उनकी बेटी स्कूल यूनिफॉर्म गंदी होने की वजह से सिविल ड्रेस में जा रही है.

क्लास टीचर ने बच्ची को क्लास में बैठने की अनुमति दे दी, लेकिन चौथे पीरियड के बाद बच्ची टॉयलेट गई तभी शारीरिक शिक्षा ट्रेनर ने उनको देखा और डांटने लगी.

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शिकायत

बच्ची ने बताया, ''उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने यूनिफॉर्म क्यों नहीं पहनी. मैंने बताया दिया कि धुली नहीं थी. इससे वह गुस्सा हो गईं और मुझे लड़कों के टॉयलेट में ले जाकर खड़ा कर दिया.''

उन्होंने आगे बताया, ''क्लास के सभी बच्चों ने मुझे वहां देखा और हंसने लगे. बाद में वह मुझे क्लास में ले गईं और सभी के सामने बेइज्ज़त किया. मैं स्कूल नहीं जाऊंगी.''

बच्ची के पिता ने यह वीडियो तेलंगाना राज्य के जुवेनाइल जस्टिस डिपार्टमेंट के चाइल्ड प्रोटेक्शन सेल को दिखाया और कार्रवाई की मांग की.

बेटी को परेशान देखकर रामकृष्ण उसको साथ लेकर फिर से स्कूल गए, लेकिन बातचीत के दौरान स्कूल प्रशासन का लहजा सही न लगने की वजह से उन्होंने पुलिस से शिकायत की.

रामकृष्ण ने कहा, ''वे लगातार कहते रहे कि हमने बच्ची की पिटाई नहीं की. उन्हें यह महसूस नहीं हुआ कि बच्ची पर इस घटना का कैसा असर पड़ा है.''

उन्होंने कहा, ''वह डिप्रेशन में है. आज स्कूल में परीक्षा थी, तो मैं उसके साथ आया और पूरे समय वहां बैठा रहा. मैं जबरन उसे साथ ले गया था. वह अब नहीं पढ़ना चाहती.''

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'समझने की कोशिश'

स्कूल की प्रिंसिपल नव्या ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''टीचर ने कहा कि उन्होंने ऐसा सिर्फ़ बच्ची से यह जानने के लिए किया कि उसने ड्रेस क्यों नहीं पहनी. हम बच्ची को भी दोष नहीं दे सकते. हम मामले को समझने की कोशिश कर रहे हैं.''

बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन बल्लाकु बक्कुलु संघ के अच्युत राव से भी रामकृष्ण ने मदद मांगी. उन्होंने बताया, ''हैदराबाद में ऐसी सज़ा देने के तीन-चार मामले सामने आ चुके हैं. मेरे संस्थान में ही एक महीने में 15 से 20 शिकायतें आती हैं.''

राव ने कहा कि स्कूलों में नौकरी देते वक़्त सिर्फ़ शैक्षिक योग्यता देखी जाती है. टीचर को पर्याप्त ट्रेनिंग मिली है या नहीं इसका ख़्याल नहीं रखा जाता.

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