इस्लामिक स्टेट के चंगुल से छूटे भारत के फ़ादर टॉम

फ़ादर टॉम
Image caption फ़ादर टॉम की सलामती के लिए उनके गांव रामापुरम में प्रार्थना की गई

दक्षिण भारत में केरल के रामापुरम गांव में जश्न जैसा माहौल है. इस गांव के रहने वाले फ़ादर टॉम उज़ुनालिल कथित चरमपंथी गुट इस्लामिक स्टेट के चंगुल से छूट आए हैं.

58 वर्षीय फ़ादर टॉम को इस्लामिक स्टेट ने 4 मार्च 2016 को यमन के अदन से अग़वा किया था. वहां वो मिशीनरीज़ ऑफ़ चैरिटी के एक वृद्धाश्रम में काम कर रहे थे.

वहां रहने वाले बाक़ी लोगों को मार दिया गया था और फ़ादर टॉम को अग़वा कर लिया गया था. कई बार मीडिया में फ़ादर टॉम की मौत की ख़बरें आईं जिससे रामापुरम के लोग काफ़ी व्यथित भी हुए.

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Image caption इस्लामिक स्टेट का झंडा

ओमान के सुल्तान ने दी रिहाई की ख़बर

मंगलवार को ओमान के सुल्तान की ओर से फ़ादर टॉम की रिहाई की ख़बर उस वक़्त आई जब उज़ुनालिल परिवार एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए गांव में जुटा था.

उनके एक रिश्तेदार सनिल अब्राहम ने बीबीसी को बताया, "दोपहर के 3.15 बजे थे. परिवार के लोग जश्न मना रहे थे, गांव के लोग भी जश्न में शामिल थे जिसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी थे. हम सभी फ़ादर टॉम की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे और हमारी प्रार्थना सुन ली गई."

फ़ादर टॉम के भतीजे नविथा एलिज़ाबेथ कहते हैं, "चारों तरफ खुशी का माहौल है, फ़ादर टॉम अच्छे से जानते थे कि उस देश में क्या हो रहा है. उनका मानना था कि वे एक मिशनरी हैं और उस जगह में रहने का क्या औचित्य जहां सुरक्षा हो और आप लोगों की मदद ना कर पा रहे हों."

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Image caption फ़ादर टॉम के वापिस आने की ख़बर मिलने पर उनके परिवार में खुशी की लहर है.

चाचा का साथ देने गए थे यमन

फ़ादर टॉम साल 1989 में सिलेसियन समूह में शामिल हुए थे. उन्होंने कई साल डॉन बॉस्को समूह के साथ काम किया. उसके बाद वे अपने चाचा फ़ादर मैथ्यू के साथ यमन चले गए.

फ़ादर मैथ्यू 16 साल से मिशीनरीज़ ऑफ चैरिटी से जुड़े हुए थे, लेकिन उन्हें अपना कोई उत्तराधिकारी नहीं मिल रहा था.

फ़ादर टॉम के भतीजे वेडकल थॉमस ने बताया, "फ़ादर टॉम ने यमन जाने के बाद फ़ादर मैथ्यू के साथ जुड़ने का फैसला कर लिया था. साल 2015 में जब यमन में युद्ध के हालात पैदा हुए और उनके चाचा की मृत्यु हो गई तब फ़ादर टॉम केरल आए थे. दिसंबर 2015 में दोबारा यमन लौट गए."

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Image caption पोप फ्रांसिस

पोप से मिलने रोम गए

थॉमस कहते हैं, "आज अगर फ़ादर टॉम जीवित हैं तो इसके पीछे गांव के सभी लोगों की दुआएं हैं. जब उनका अपहरण हुआ था तो पूरा परिवार टूट-सा गया था, पिछले 17 महीने हमारे लिए बहुत ही मुश्किल भरे थे. जब कभी ऐसी ख़बरें या वीडियो आते जिसमें बताया जाता कि उन्हें सूली पर लटका दिया गया है तो हम बहुत निराश हो जाते. लेकिन आज पूरे गांव में खुशी का माहौल है."

थॉमस केरल सरकार, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, चर्च और ओमान के सुल्तान का धन्यवाद करना नहीं भूलते.

वो कहते हैं, "हम उनका इंतजार कर रहे थे, हमारे पास आखिरी जानकारी यह थी कि वे मंगलवार को मस्कट(ओमान) से रोम चले गए हैं, जहां वे पोप से मिलेंगे."

नविथा और अब्राह्म फ़ादर टॉम के बारे में बताते हैं कि "उनका स्वभाव बहुत ही दोस्ताना है, वे दयालु और धार्मिक व्यक्ति हैं."

अब्राह्म कहते हैं, "फ़ादर टॉम इतने अच्छे इंसान हैं कि उन्होंने अपने अपहरणकर्ताओं को भी अपना दोस्त बना लिया होगा."

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